राजस्थान के नवलगढ़ में स्टेडियम पर बुलडोजर कार्रवाई से बवाल, पूर्व मंत्री भावुक; 200 ग्रामीण हिरासत में

नवलगढ़ के परसरामपुरा गाँव में हाईकोर्ट आदेश पर खेल स्टेडियम पर बुलडोजर चला। पूर्व मंत्री डॉ. राजकुमार शर्मा भावुक हुए, 200 ग्रामीणों को हिरासत में लिया गया।

राजस्थान के झुंझुनूं जिले के परसरामपुरा में हाईकोर्ट आदेश पर प्रशासन ने खेल स्टेडियम पर बुलडोजर कार्रवाई की। पूर्व मंत्री डॉ. राजकुमार शर्मा भावुक हो गए और विरोध में करीब 200 ग्रामीणों को पुलिस ने हिरासत में लिया।

नवलगढ़: राजस्थान के झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ क्षेत्र के परसरामपुरा गांव में बुधवार को उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश के तहत एक खेल स्टेडियम की चारदीवारी हटाने की कार्रवाई शुरू की। यह स्टेडियम कथित तौर पर गैर-मुमकिन नदी भूमि पर बना हुआ था।

जैसे ही बुलडोजर कार्रवाई शुरू हुई, बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया।

पूर्व मंत्री समेत करीब 200 ग्रामीण हिरासत में

कार्रवाई के दौरान विरोध कर रहे पूर्व मंत्री और नवलगढ़ के पूर्व विधायक डॉ. राजकुमार शर्मा सहित लगभग 200 ग्रामीणों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। हालांकि, प्रशासन ने स्थिति सामान्य होने के बाद सभी को रिहा कर दिया।

जानकारी के अनुसार, पूर्व विधायक के पिता और भाई ने भी विरोध जताते हुए गिरफ्तारी दी। पूरे इलाके को एहतियातन पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया ताकि किसी तरह की अप्रिय स्थिति न उत्पन्न हो।

स्टेडियम टूटता देख भावुक हुए पूर्व मंत्री

कार्रवाई के दौरान पूर्व मंत्री डॉ. राजकुमार शर्मा भावुक हो गए। मीडिया से बातचीत में उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने कहा कि यह स्टेडियम उनके विधायक कार्यकाल के दौरान गांव के युवाओं के खेल और भविष्य को ध्यान में रखते हुए बनवाया गया था।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई युवाओं के सपनों पर चोट है। उनके अनुसार, “यह सिर्फ एक स्टेडियम नहीं था, बल्कि क्षेत्र के बच्चों और युवाओं के भविष्य की उम्मीद थी।”

प्रशासन की कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश पर

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी कार्रवाई हाईकोर्ट के आदेश और कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित भूमि को गैर-मुमकिन नदी क्षेत्र में चिह्नित किया गया था, जिस पर निर्माण को अवैध माना गया।

12 मई को प्रशासन की ओर से पहले ही नोटिस जारी कर दिया गया था, जिसमें स्पष्ट कहा गया था कि किसी भी तरह का विरोध या सरकारी काम में बाधा डालने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

भारी पुलिस बल की मौजूदगी में चला अभियान

बुधवार सुबह जैसे ही प्रशासनिक टीम मौके पर पहुंची, ग्रामीणों की भीड़ धीरे-धीरे बढ़ने लगी। लोगों ने स्टेडियम को बचाने की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए भारी पुलिस बल और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर तैनात रहे। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करते हुए कार्रवाई को आगे बढ़ाया।

ग्रामीणों में भारी आक्रोश, राजनीतिक माहौल गर्माया

इस कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि यह स्टेडियम युवाओं के लिए खेल गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र था, जिसे तोड़ा जाना गलत निर्णय है।

वहीं, इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक माहौल भी गरमा गया है। स्थानीय नेताओं ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं और इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा बताया है।

प्रशासन का पक्ष: कानून से ऊपर कोई नहीं

प्रशासन ने दोहराया कि यह कार्रवाई पूरी तरह न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए की गई है। अधिकारियों ने कहा कि सरकारी भूमि पर अवैध निर्माण को लेकर कई बार नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन अनुपालन नहीं हुआ।

प्रशासन का कहना है कि कानून का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य है और किसी भी स्थिति में अवैध निर्माण को संरक्षण नहीं दिया जा सकता।

ग्रामीणों और प्रशासन के बीच टकराव जैसी स्थिति

कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों और प्रशासन के बीच तनावपूर्ण माहौल बन गया था। हालांकि पुलिस ने स्थिति को बिगड़ने से रोकते हुए संयम के साथ कार्रवाई पूरी कराई।

हिरासत में लिए गए लोगों को बाद में समझाइश देकर छोड़ दिया गया।

स्टेडियम को लेकर वर्षों पुराना विवाद

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह स्टेडियम लंबे समय से विवादों में रहा है। भूमि की स्थिति और निर्माण की वैधता को लेकर पहले भी आपत्तियां दर्ज की गई थीं। मामला कोर्ट तक पहुंचा, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई।

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