गाजियाबाद की गौर ग्रीन एवेन्यू सोसायटी में 29 अप्रैल को लगी आग की वजह नौ दिन बाद भी स्पष्ट नहीं हो सकी है। जांच समिति ने रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसे शुक्रवार को जिलाधिकारी को सौंपा जाएगा। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट और गैस सिलिंडर कारण नहीं मिले।
गाजियाबाद: अभय खंड स्थित गौर ग्रीन एवेन्यू सोसायटी में छह फ्लैटों में लगी आग की घटना की जांच अब भी जारी है। 29 अप्रैल को हुए इस हादसे के बाद डीएम द्वारा गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है, लेकिन आग लगने की सटीक वजह सामने नहीं आई है। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट और गैस सिलिंडर विस्फोट जैसी संभावनाएं खारिज होने के बाद मामले में गहन जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।
जांच रिपोर्ट तैयार, लेकिन वजह अब भी साफ नहीं
गाजियाबाद की अभय खंड स्थित गौर ग्रीन एवेन्यू सोसायटी में 29 अप्रैल को लगी आग की घटना के नौ दिन बाद भी प्रशासन को इसकी सटीक वजह नहीं मिल सकी है। हादसे के बाद गठित जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है और इसे शुक्रवार को जिलाधिकारी को सौंपा जा सकता है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
घटना में छह फ्लैट आग की चपेट में आए थे। शुरुआती जांच में यह सामने आया कि आग लगने के समय न तो शॉर्ट सर्किट हुआ था और न ही गैस सिलिंडर में विस्फोट जैसी कोई स्थिति थी। ऐसे में आग किस कारण से फैली, यह अब भी जांच का मुख्य विषय बना हुआ है।
हादसा या साजिश? कई पहलुओं पर फोकस
प्रशासनिक स्तर पर अब इस बात की भी पड़ताल की जा रही है कि मामला केवल दुर्घटना था या इसके पीछे कोई दूसरी वजह हो सकती है। जांच टीम ने कई तकनीकी और सुरक्षा पहलुओं की समीक्षा की है। अधिकारियों का मानना है कि स्पष्ट कारण तक पहुंचने के लिए विस्तृत तकनीकी जांच की जरूरत पड़ सकती है।
सोसायटी में रहने वाले लोगों के बीच भी घटना को लेकर चिंता बनी हुई है। आग तेजी से फैलने और कई फ्लैटों के प्रभावित होने के कारण सुरक्षा इंतजामों पर सवाल उठ रहे हैं।
सोसायटी में अवैध निर्माण भी आया सामने
जांच समिति को निरीक्षण के दौरान सोसायटी परिसर में नक्शे के विपरीत निर्माण कार्य होने के संकेत भी मिले हैं। रिपोर्ट में इस पहलू का भी उल्लेख किया गया है। माना जा रहा है कि प्रशासन अब अवैध निर्माण और फायर सेफ्टी मानकों को लेकर अलग से कार्रवाई कर सकता है।
डीएम ने 30 अप्रैल को जीडीए सचिव विवेक मिश्रा की अध्यक्षता में समिति गठित की थी। समिति को तीन दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का दायरा बढ़ाया गया।










