गयाजी में अब तक 16.61 लाख श्रद्धालुओं ने किया पिंडदान बुधवार को 3.95 लाख पहुंचे; AI से 16 हजार यात्रियों की मदद

गयाजी में अब तक 16.61 लाख श्रद्धालु पिंडदान कर चुके हैं। बुधवार को 3.95 लाख पहुंचे, AI से 16 हजार यात्रियों की मदद और कंट्रोल रूम में 270 शिकायतें आईं।
गयाजी में अब तक 16.61 लाख श्रद्धालुओं ने किया पिंडदान बुधवार को 3.95 लाख पहुंचे; AI से 16 हजार यात्रियों की मदद
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गयाजी में चल रहे पितृपक्ष मेले में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना लेकर गया पहुंच रहे हैं। फल्गु नदी के घाटों से लेकर विष्णुपद मंदिर, देवघाट, प्रेतशिला, रामशिला और दूसरी पिंडवेदियों तक सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें दिखाई दे रही हैं। प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 16.61 लाख श्रद्धालु गयाजी पहुंचकर पिंडदान और तर्पण कर चुके हैं। अकेले बुधवार को करीब 3.95 लाख तीर्थयात्रियों के पहुंचने का आंकड़ा सामने आया है। भीड़ बढ़ने के साथ प्रशासन ने धार्मिक व्यवस्थाओं के साथ-साथ तकनीक का इस्तेमाल भी बढ़ा दिया है।

पितृपक्ष के दौरान गयाजी में देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। कई परिवार अपने पूर्वजों के लिए निर्धारित धार्मिक परंपराओं के अनुसार अलग-अलग पिंडवेदियों पर जाकर कर्मकांड कर रहे हैं। सुबह से ही विष्णुपद क्षेत्र, फल्गु नदी के घाटों और प्रमुख वेदियों पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है। बड़ी संख्या में लोग स्नान, तर्पण और पिंडदान के बाद मंदिरों में दर्शन कर रहे हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार गयाजी में पिंडदान और तर्पण करने से पितरों को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते पितृपक्ष के दौरान यहां श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ती है।

बुधवार को 3.95 लाख तीर्थ यात्रियों के पहुंचने से मेला क्षेत्र में भीड़ का दबाव और बढ़ गया। एक ही दिन में इतनी बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी के बीच प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से पिंडवेदियों और मंदिरों तक पहुंचाने की रहती है। इसके लिए प्रमुख मार्गों पर निगरानी, भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और सूचना केंद्रों को सक्रिय रखा गया है। श्रद्धालुओं को रास्ते, पार्किंग, घाट, स्वास्थ्य केंद्र और अन्य जरूरी सुविधाओं की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए अलग-अलग माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

गयाजी में इस बार पितृपक्ष मेले की व्यवस्थाओं में तकनीक की भूमिका भी काफी बढ़ाई गई है। प्रशासन ने AI और CCTV आधारित निगरानी व्यवस्था लागू की है। पहले से तैयार व्यवस्था के तहत 543 से अधिक CCTV कैमरों से मेला क्षेत्र की रियल टाइम निगरानी की जा रही है। किसी इलाके में भीड़ बढ़ने या किसी तरह की समस्या की स्थिति बनने पर संबंधित अधिकारियों को अलर्ट देने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना और किसी अप्रिय स्थिति की संभावना को कम करना है।

AI तकनीक का इस्तेमाल केवल निगरानी तक सीमित नहीं रखा गया है। मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं को जानकारी उपलब्ध कराने और उनकी समस्याओं को समझने में भी तकनीक की मदद ली जा रही है। प्रशासन के अनुसार अब तक करीब 16 हजार यात्रियों को AI आधारित सुविधा के माध्यम से मदद पहुंचाई गई है। अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों के लिए भाषा की समस्या भी सामने आती है। इसे ध्यान में रखते हुए डिजिटल ट्रांसलेशन और भाषिणी जैसे तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि श्रद्धालु अपनी भाषा में अपनी बात रख सकें और उन्हें आवश्यक जानकारी मिल सके।

गयाजी के विशाल पितृपक्ष मेले में हजारों लोग पहली बार आते हैं। ऐसे श्रद्धालुओं को पिंडवेदियों, मंदिरों, घाटों और आवासन स्थलों की जानकारी देने के लिए सूचना केंद्र बनाए गए हैं। डिजिटल माध्यमों के जरिए भी श्रद्धालु अलग-अलग स्थानों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। ‘पिंडदान गया जी’ ऐप और वेबसाइट के जरिए पिंडवेदियों, आवासन, पार्किंग, यातायात, स्वास्थ्य, सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इससे बाहर से आने वाले लोगों को पहले से अपनी यात्रा की योजना बनाने में मदद मिलती है।

मेले में भीड़ के कारण लोगों के एक-दूसरे से बिछड़ने की समस्या भी सामने आती है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह समस्या अधिक गंभीर हो सकती है। इसे देखते हुए QR कोड वाले कलाई बैंड की व्यवस्था की गई है। इसमें परिजनों की जरूरी जानकारी दर्ज की जा सकती है, जिससे बिछड़ने की स्थिति में परिवार से संपर्क करने में सहायता मिले। डिजिटल खोया-पाया सुविधा भी मेला प्रबंधन का हिस्सा बनाई गई है।

बुधवार को कंट्रोल रूम में कुल 270 शिकायतें दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। पितृपक्ष मेले में इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के कारण अलग-अलग तरह की शिकायतें और मदद की जरूरतें सामने आती रहती हैं। इनमें रास्ते की जानकारी, भीड़, खोए हुए लोग, सुविधाओं से जुड़ी समस्या और अन्य स्थानीय शिकायतें शामिल हो सकती हैं। कंट्रोल रूम के माध्यम से इन शिकायतों को संबंधित टीमों तक पहुंचाने और उनके समाधान की कोशिश की जा रही है।

इससे पहले भी मेला क्षेत्र में खोया-पाया व्यवस्था के जरिए बड़ी संख्या में लोगों को उनके परिजनों से मिलाया गया है। मंगलवार तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार एक ही दिन में 95 बिछड़े लोगों को परिजनों से मिलाया गया था और मेले की शुरुआत से 225 लोगों को उनके परिवार से मिलाने की जानकारी सामने आई थी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि लाखों लोगों की भीड़ के बीच प्रशासन के लिए खोया-पाया व्यवस्था कितनी महत्वपूर्ण है।

पितृपक्ष मेले में बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। अलग-अलग घाटों और पिंडदान स्थलों तक पहुंचने में परेशानी न हो, इसके लिए व्हीलचेयर और निशुल्क ई-रिक्शा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इससे उन श्रद्धालुओं को राहत मिल रही है जो लंबी दूरी पैदल तय करने में सक्षम नहीं हैं। मेले की शुरुआत में ही प्रशासन की ओर से 150 निशुल्क ई-रिक्शा उपलब्ध कराने की जानकारी दी गई थी।

गयाजी में पिंडदान करने आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सफाई व्यवस्था पर भी विशेष जोर दिया गया है। फल्गु नदी के घाटों, विष्णुपद मंदिर के आसपास और प्रमुख पिंडदान स्थलों पर लगातार सफाई कराई जा रही है। घाटों पर शौचालय, चेंजिंग रूम और पेयजल जैसी सुविधाओं की निगरानी की जा रही है। भीड़ बढ़ने के साथ सफाई कर्मियों की सक्रियता भी बढ़ाई गई है, ताकि धार्मिक अनुष्ठान के लिए आने वाले लोगों को गंदगी या अव्यवस्था का सामना न करना पड़े।

फल्गु नदी क्षेत्र में स्वच्छता के लिए तकनीकी साधनों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इस बार नदी की सफाई के लिए रोबोटिक तकनीक के इस्तेमाल की जानकारी प्रशासन की ओर से दी गई थी। ‘क्लियरबॉट’ जैसी मशीनों के जरिए सफाई की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बावजूद घाटों और नदी क्षेत्र को साफ रखना है।

विष्णुपद मंदिर पितृपक्ष मेले का प्रमुख केंद्र है। यहां भगवान विष्णु के चरणचिह्न के दर्शन और पिंडदान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कतार व्यवस्था लागू की गई है। श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से मंदिर में प्रवेश और बाहर निकलने की सुविधा देने पर जोर दिया गया है। बारिश के कारण फर्श पर फिसलन की स्थिति नहीं बने, इसके लिए पानी हटाने और लगातार सफाई रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

पितृपक्ष मेले में देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले लोगों की संख्या के कारण भाषा संबंधी परेशानी भी सामने आती है। बिहार या हिंदी भाषी क्षेत्र से बाहर के श्रद्धालुओं के लिए स्थानीय कर्मचारियों से संवाद करना हमेशा आसान नहीं होता। इसी को ध्यान में रखते हुए हेल्प डेस्क पर डिजिटल ट्रांसलेशन सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। भाषिणी ऐप और गूगल ट्रांसलेटर जैसी तकनीक के जरिए अलग-अलग भाषाओं में संवाद करने में मदद दी जा रही है। इससे श्रद्धालु अपनी समस्या अपनी भाषा में बता सकते हैं और उन्हें जानकारी भी अपनी समझ की भाषा में मिल सकती है।

मेले में सुरक्षा के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम लगातार सक्रिय है। CCTV कैमरों के अलावा ड्रोन और अन्य वीडियो माध्यमों से भी प्रमुख क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। बड़ी भीड़ वाले स्थानों की निगरानी इसलिए भी जरूरी है क्योंकि पितृपक्ष के दिनों में कुछ खास समय पर अचानक श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में प्रशासन को भीड़ के दबाव वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां व्यवस्था मजबूत करने में तकनीकी निगरानी से मदद मिलती है।

गयाजी में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए केवल धार्मिक व्यवस्था ही नहीं, बल्कि आवासन और परिवहन की सुविधा भी महत्वपूर्ण है। मेला क्षेत्र में टेंट सिटी, होटल, धर्मशालाओं और पार्किंग की जानकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराई गई है। ऐप के जरिए यातायात व्यवस्था, स्थानीय परिवहन, पार्किंग स्थल और निर्धारित किराये जैसी जानकारी हासिल की जा सकती है। इससे बाहर से आने वाले लोगों को शहर में पहुंचने के बाद बार-बार अलग-अलग जगहों पर जानकारी लेने की जरूरत कम होती है।

पितृपक्ष मेले में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ गयाजी की अर्थव्यवस्था और स्थानीय गतिविधियों में भी तेजी आती है। होटल, धर्मशाला, परिवहन, पूजा सामग्री, फूल-माला, धार्मिक सामग्री और खान-पान से जुड़े कारोबार में भी बाहर से आने वाले लोगों की वजह से गतिविधियां बढ़ती हैं। हालांकि मेले की प्राथमिकता श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से धार्मिक अनुष्ठान कराने की रहती है।

16.61 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का आंकड़ा इस बात को दिखाता है कि पितृपक्ष के दौरान गयाजी में किस स्तर पर धार्मिक गतिविधियां चल रही हैं। बुधवार को 3.95 लाख लोगों की आमद ने प्रशासन के सामने व्यवस्थाओं को लगातार सक्रिय रखने की चुनौती और बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में भी श्रद्धालुओं की संख्या में उतार-चढ़ाव के बीच प्रशासन को सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य, यातायात और भीड़ प्रबंधन पर लगातार नजर रखनी होगी।

गयाजी में इस बार परंपरा के साथ तकनीक का इस्तेमाल भी मेले की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। एक ओर फल्गु नदी के घाटों पर पुरानी धार्मिक परंपराओं के अनुसार पिंडदान और तर्पण हो रहा है, वहीं दूसरी ओर AI, CCTV, QR कोड, डिजिटल हेल्प डेस्क और मोबाइल ऐप जैसी तकनीकें श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा में इस्तेमाल की जा रही हैं। प्रशासन का प्रयास है कि लाखों लोगों की मौजूदगी के बावजूद पितृपक्ष मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुष्ठान करने के साथ-साथ जरूरी सुविधाएं भी आसानी से मिल सकें।

फिलहाल गयाजी में पिंडदान का सिलसिला लगातार जारी है। विष्णुपद मंदिर से लेकर देवघाट और अन्य पिंडवेदियों तक श्रद्धालुओं की भीड़ बनी हुई है। कंट्रोल रूम शिकायतों पर नजर रख रहा है, AI और CCTV के जरिए मेला क्षेत्र की निगरानी की जा रही है और विभिन्न टीमों को जरूरत के अनुसार मौके पर भेजा जा रहा है। लाखों श्रद्धालुओं के बीच तकनीक और प्रशासनिक व्यवस्था का यह संयोजन इस बार के पितृपक्ष मेले की एक महत्वपूर्ण तस्वीर सामने रख रहा है।

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