गया: पितृपक्ष मेला शुरू होने से ठीक पहले गयाजी में बारिश ने प्रशासन की तैयारियों की परीक्षा लेनी शुरू कर दी है। बारिश के बाद शहर की कई प्रमुख सड़कों पर पानी जमा हो गया। विष्णुपद मंदिर जाने वाले प्रमुख मार्ग पर चार जगह जलजमाव मिलने के बाद जिलाधिकारी खुद स्थिति का जायजा लेने के लिए सड़क पर उतरे। डीएम ने जलजमाव वाले स्थानों का निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को पानी की निकासी जल्द सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। पितृपक्ष के दौरान देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पिंडदानी गयाजी पहुंचते हैं, ऐसे में मुख्य मार्गों पर जलजमाव प्रशासन के लिए बड़ी चिंता का विषय बन गया है।
पितृपक्ष मेला गयाजी के लिए साल का सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन माना जाता है। इस दौरान विष्णुपद मंदिर, फल्गु नदी तट और आसपास के पिंडदान स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रहती है। ऐसे में मेला शुरू होने से पहले सड़कों, नालियों और जलनिकासी व्यवस्था को दुरुस्त रखना प्रशासन की प्राथमिकता में है। जिला प्रशासन की ओर से मेला क्षेत्र में साफ-सफाई, सड़क, नाली, पेयजल, रोशनी और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने का काम चल रहा है।
बारिश के बाद जब जिलाधिकारी ने शहर के प्रमुख मार्गों का निरीक्षण किया तो विष्णुपद मंदिर की ओर जाने वाली सड़क पर अलग-अलग स्थानों पर पानी जमा मिला। चार जगहों पर जलजमाव की स्थिति सामने आने के बाद अधिकारियों से इसकी वजह पूछी गई। नालियों की सफाई, पानी की निकासी और सड़क पर जमा पानी को जल्द हटाने को लेकर जरूरी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
विष्णुपद मंदिर मार्ग पितृपक्ष के दौरान सबसे व्यस्त रहने वाले रास्तों में शामिल है। देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले पिंडदानी इसी क्षेत्र में पहुंचकर अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान और तर्पण करते हैं। यदि बारिश के दौरान सड़क पर पानी जमा रहता है तो बुजुर्ग श्रद्धालुओं, महिलाओं और बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी हो सकती है। भीड़ के बीच जलजमाव होने से पैदल चलने वालों के साथ-साथ वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हो सकती है।
प्रशासन के लिए चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि पितृपक्ष मेला नजदीक है और आने वाले दिनों में बारिश की संभावना बनी हुई है। ऐसे में सिर्फ मौजूदा जलजमाव हटाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उन स्थानों की पहचान करनी होगी जहां बारिश होते ही पानी जमा हो जाता है। इन जगहों पर स्थायी जलनिकासी व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत होगी।
गयाजी में पितृपक्ष की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन पहले से ही अलग-अलग विभागों के साथ काम कर रहा है। सड़क और नाली व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ मेला क्षेत्र की सफाई पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य है कि श्रद्धालुओं को पिंडदान स्थलों तक पहुंचने में किसी तरह की परेशानी न हो और बारिश होने की स्थिति में भी जलजमाव लंबे समय तक न रहे।
शहर में जलजमाव की समस्या का एक बड़ा कारण कई स्थानों पर नालियों की क्षमता और जलनिकासी व्यवस्था का कमजोर होना भी माना जाता है। तेज बारिश के दौरान कम समय में बड़ी मात्रा में पानी सड़कों पर आ जाता है। यदि नालियां पूरी क्षमता से पानी बाहर नहीं निकाल पातीं तो सड़क पर जलजमाव हो जाता है। पितृपक्ष के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना बढ़ जाने के कारण यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
प्रशासन की कोशिश है कि मेला क्षेत्र में ऐसी स्थिति पैदा न हो। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को जलजमाव वाले स्थानों पर तत्काल कार्रवाई करने के साथ-साथ नालियों की सफाई और जलनिकासी के रास्तों को खुला रखने के निर्देश दिए गए हैं। बारिश के पानी की निकासी के लिए जरूरत के अनुसार पंप और अन्य संसाधनों की व्यवस्था भी की जा सकती है।
गयाजी में पितृपक्ष के दौरान केवल विष्णुपद मंदिर ही नहीं, बल्कि फल्गु नदी और आसपास के विभिन्न पिंडदान स्थलों पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ होती है। इसलिए प्रशासन के सामने पूरे मेला क्षेत्र को जलजमाव से मुक्त रखने की चुनौती है। मुख्य सड़कों के साथ गलियों और संपर्क मार्गों पर भी पानी की निकासी जरूरी होगी।
पिछले वर्षों की तरह इस बार भी प्रशासन का फोकस श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा पर है। पितृपक्ष मेले में आने वाले लोगों को पेयजल, शौचालय, प्रकाश, सफाई, यातायात और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री स्तर पर भी पहले पितृपक्ष की तैयारियों में श्रद्धालुओं की सुविधा, सफाई, पेयजल और यातायात व्यवस्था को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए जा चुके हैं।
बारिश के बीच सड़क पर पानी जमा होने से स्थानीय लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगह वाहन चालकों को पानी से होकर गुजरना पड़ा। जलजमाव के कारण सड़क पर बने गड्ढों का पता लगाना भी मुश्किल हो जाता है, जिससे दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
डीएम के निरीक्षण के बाद अब संबंधित विभागों पर जलजमाव की समस्या को जल्द दूर करने की जिम्मेदारी है। खासतौर पर विष्णुपद मंदिर मार्ग जैसे महत्वपूर्ण रास्ते को पितृपक्ष शुरू होने से पहले पूरी तरह दुरुस्त करना जरूरी माना जा रहा है। प्रशासन की कोशिश होगी कि श्रद्धालुओं की भीड़ शुरू होने से पहले सड़क और नालियों से जुड़ी कमियों को दूर कर लिया जाए।
पितृपक्ष के दौरान गयाजी में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है। ऐसे में बारिश और जलजमाव की समस्या को छोटी चुनौती मानना भारी पड़ सकता है। एक तरफ श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुष्ठान के लिए अलग-अलग स्थानों तक पहुंचना होगा, वहीं दूसरी तरफ शहर में यातायात का दबाव भी बढ़ेगा। यदि प्रमुख मार्गों पर पानी जमा रहा तो इससे ट्रैफिक व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
फिलहाल जिलाधिकारी के निरीक्षण के बाद प्रशासन ने जलजमाव वाले स्थानों पर कार्रवाई तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है। विष्णुपद मंदिर मार्ग पर चार जगह पानी जमा मिलना पितृपक्ष से पहले प्रशासन के लिए अलर्ट जैसा है। अब देखना होगा कि आने वाली बारिश के दौरान इन स्थानों पर पानी की निकासी कितनी तेजी से होती है और मेला शुरू होने से पहले शहर की जलनिकासी व्यवस्था को कितना बेहतर किया जा पाता है।