साल 2008 में स्टीव जॉब्स ने iPhone पर दिख रहे Google लोगो के एक रंग को लेकर गूगल एग्जीक्यूटिव को फोन किया था। यह घटना बताती है कि जॉब्स डिजाइन की छोटी से छोटी डिटेल को भी कितना गंभीरता से लेते थे और परफेक्शन को नेतृत्व का हिस्सा मानते थे।
Steve Jobs design perfection: जनवरी 2008 में, जब गूगल के सीनियर एग्जीक्यूटिव विक गुंडोत्रा चर्च में थे, तब उन्हें स्टीव जॉब्स का अर्जेंट कॉल मिला। वजह थी iPhone स्क्रीन पर दिख रहे Google लोगो में दूसरे “O” के पीले ग्रेडिएंट का सही न लगना। जॉब्स ने तुरंत एपल की डिजाइन टीम को सुधार के निर्देश दिए। यह घटना दिखाती है कि क्यों जॉब्स डिजाइन, प्रोडक्ट क्वालिटी और यूजर अनुभव को हर हाल में प्राथमिकता देते थे।
जब चर्च में बैठे गूगल एग्जीक्यूटिव को आया कॉल
जनवरी 2008 की एक रविवार सुबह गूगल के सीनियर एग्जीक्यूटिव विक गुंडोत्रा चर्च में थे, तभी उनके फोन पर मिस्ड कॉल आया। बाद में पता चला कि यह कॉल एपल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स का था।
वापस कॉल करने पर जॉब्स ने सीधे मुद्दे पर आते हुए बताया कि आईफोन की स्क्रीन पर दिख रहे Google लोगो में दूसरे “O” का पीला ग्रेडिएंट सही नहीं लग रहा है। उनके लिए यह मामूली बात नहीं थी, बल्कि डिजाइन के सिद्धांतों से जुड़ा मामला था।

एक पीला शेड, लेकिन बड़ा डिजाइन सबक
जॉब्स को लगा कि लोगो का कलर कैलिब्रेशन स्क्रीन पर ठीक से रेंडर नहीं हो रहा। उन्होंने तुरंत एपल के सीनियर डिजाइन लीड ग्रेग क्रिस्टी को निर्देश दिए कि इसे जल्द से जल्द सुधारा जाए।
ग्रेग क्रिस्टी ने Icon Ambulance सब्जेक्ट के साथ ईमेल भेजकर सही ग्रेडिएंट फाइल गूगल टीम को दी। बिना किसी विवाद के बदलाव कर दिया गया। उस दौर में एपल और गूगल के रिश्ते सहयोग पर आधारित थे, इसलिए यह प्रक्रिया सहज रही।
तीन साल बाद सामने आई पूरी कहानी
यह किस्सा लंबे समय तक सार्वजनिक नहीं हुआ। करीब तीन साल बाद, 2011 में स्टीव जॉब्स के सीईओ पद छोड़ने के बाद, विक गुंडोत्रा ने इसे एक पोस्ट के जरिए साझा किया। बाद में यह कहानी वाल्टर इसाकसन की जीवनी का भी हिस्सा बनी।
इस घटना को आज भी प्रोडक्ट लीडरशिप की मिसाल के तौर पर देखा जाता है। संदेश साफ था, बेहतरीन प्रोडक्ट वही होता है, जिसमें हर पिक्सल पर ध्यान दिया जाए।







