हरिद्वार: हरिद्वार में होने वाले कुंभ मेला 2027 को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की तैयारी तेज हो गई है। मेले में लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सरकार ऐसा डिजिटल सिस्टम तैयार करने की दिशा में काम कर रही है, जिससे मेले के दौरान किसी व्यक्ति के खो जाने पर उसकी तलाश आसान हो सके। इसके लिए ऑनलाइन खोया-पाया पोर्टल तैयार किया जाएगा। श्रद्धालु डिजिटल माध्यम से खोए हुए व्यक्ति की शिकायत दर्ज करा सकेंगे और उपलब्ध जानकारी के आधार पर उसकी तलाश की जा सकेगी। डिजिटल कुंभ की योजना में वेबसाइट, मोबाइल ऐप, डिजिटल आईडी और एआई आधारित सेवाओं को भी शामिल किया गया है।
हरिद्वार कुंभ में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। इतनी बड़ी भीड़ के बीच परिवार के सदस्यों का एक-दूसरे से बिछड़ जाना बड़ी चुनौती बन जाता है। खासकर बुजुर्ग, बच्चे और ऐसे लोग जो पहली बार कुंभ में पहुंचते हैं, उनके लिए भीड़ में अपने साथियों से अलग होने के बाद उन्हें तलाशना मुश्किल हो जाता है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए डिजिटल खोया-पाया व्यवस्था को मजबूत करने की योजना बनाई जा रही है।
नए सिस्टम का उद्देश्य यह है कि किसी व्यक्ति के खोने के बाद उसकी जानकारी केवल किसी एक खोया-पाया केंद्र तक सीमित न रहे, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो जाए। इससे अलग-अलग स्थानों पर तैनात पुलिस, प्रशासन, मेला कर्मियों और सहायता केंद्रों के बीच सूचना साझा करना आसान हो सकेगा।
सरकार की प्रस्तावित डिजिटल कुंभ योजना में डिजिटल प्लेटफॉर्म और सिटीजन सर्विस को महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। इसके तहत कुंभ की वेबसाइट और मोबाइल ऐप के साथ डिजिटल खोया-पाया पोर्टल तैयार करने की योजना है। श्रद्धालुओं को ई-पास और डिजिटल आईडी जैसी सुविधाएं देने का प्रस्ताव भी है।
इस व्यवस्था में अगर कोई व्यक्ति मेले में अपने परिवार से बिछड़ जाता है तो उसके परिजन ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इसमें व्यक्ति का नाम, उम्र, पहचान, कपड़ों का विवरण, फोटो और अन्य जरूरी जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है। शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित जानकारी सिस्टम में दर्ज होगी, जिससे उसे अलग-अलग सहायता केंद्रों तक पहुंचाया जा सके।
मान लीजिए कोई बच्चा भीड़ में अपने माता-पिता से अलग हो गया। परिवार को अलग-अलग स्थानों पर भटकने के बजाय डिजिटल पोर्टल के जरिए उसकी जानकारी दर्ज कराने का विकल्प मिल सकता है। यदि बच्चा किसी सहायता केंद्र, पुलिस टीम या खोया-पाया केंद्र तक पहुंचता है तो उसकी जानकारी सिस्टम में दर्ज कर परिवार तक पहुंचाने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
इसी तरह बुजुर्गों के मामले में भी डिजिटल सिस्टम काफी मददगार साबित हो सकता है। कई बार बुजुर्ग भीड़ में रास्ता भूल जाते हैं और अपना पता या मोबाइल नंबर ठीक से नहीं बता पाते। ऐसी स्थिति में उनकी फोटो और अन्य पहचान संबंधी जानकारी के आधार पर तलाश करने में डिजिटल रिकॉर्ड उपयोगी हो सकता है।
डिजिटल खोया-पाया व्यवस्था को केवल पोर्टल तक सीमित रखने की योजना नहीं है। प्रस्तावित डिजिटल कुंभ में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की भी भूमिका होगी। यहां से मेले की विभिन्न गतिविधियों और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की जा सकेगी। भीड़ प्रबंधन, ट्रैफिक और सुरक्षा से जुड़ी सूचनाओं को भी तकनीक के माध्यम से जोड़े जाने की योजना है।
कुंभ जैसे विशाल आयोजन में सबसे बड़ी चुनौती भीड़ का प्रबंधन होती है। इसी वजह से डिजिटल योजना में सेंसर आधारित भीड़ सघनता की निगरानी, हीटमैप आधारित भीड़ प्रवाह डैशबोर्ड और संवेदनशील क्षेत्रों में जियोफेंसिंग जैसी तकनीकों का प्रस्ताव है। इससे प्रशासन को यह समझने में मदद मिल सकती है कि किस क्षेत्र में कितनी भीड़ जमा हो रही है और वहां अतिरिक्त सुरक्षा या सहायता की जरूरत है।
प्रस्तावित व्यवस्था में सीसीटीवी और एआई कैमरों की जियो-टैगिंग भी शामिल है। इसका उद्देश्य मेले के अलग-अलग हिस्सों में सुरक्षा निगरानी को बेहतर बनाना है। हालांकि किसी भी तकनीकी निगरानी व्यवस्था में लोगों की निजता और डेटा सुरक्षा का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण होगा।
कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए डिजिटल सहायता का दायरा केवल खोया-पाया सेवा तक सीमित नहीं रहेगा। योजना में एआई चैटबॉट की सुविधा भी प्रस्तावित है, जिसके जरिए श्रद्धालु मेले से जुड़े सवालों के जवाब हासिल कर सकेंगे। सूचना कियोस्क और क्यूआर कोड साइनेज के जरिए भी महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराने की तैयारी है।
इस डिजिटल सिस्टम से श्रद्धालुओं को मेले में रास्ता तलाशने, जरूरी सेवाओं की जानकारी लेने और आपात स्थिति में सहायता प्राप्त करने में भी मदद मिल सकती है। इसके लिए मोबाइल ऐप और वेबसाइट को एक ही डिजिटल इकोसिस्टम से जोड़ने की योजना बताई गई है।
सरकार ने डिजिटल कुंभ के लिए करीब 45 करोड़ रुपये का विस्तृत प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म और नागरिक सेवाओं के लिए अलग बजट प्रस्तावित है। इसके अलावा भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, श्रद्धालु सुविधाओं, पर्यावरण निगरानी और आपदा प्रबंधन के लिए भी अलग-अलग राशि प्रस्तावित की गई है।
कुंभ के दौरान आपदा प्रबंधन भी बड़ी चुनौती होती है। लाखों लोगों की मौजूदगी में आग, बाढ़, अत्यधिक भीड़ या स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति पैदा होने पर प्रशासन को तेजी से निर्णय लेना पड़ता है। डिजिटल कमांड सेंटर और रियल टाइम डेटा ऐसी परिस्थितियों में प्रशासन की मदद कर सकता है।
गंगा घाटों पर पानी की गुणवत्ता की निगरानी के लिए सेंसर लगाने की योजना भी डिजिटल कुंभ का हिस्सा है। इसके अलावा स्वच्छता, टेंट और अन्य सुविधाओं की डिजिटल निगरानी का प्रस्ताव है। यानी तकनीक का इस्तेमाल केवल श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे मेला प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए किया जाना है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि खोया-पाया पोर्टल को जमीन पर मौजूद सहायता केंद्रों से कितनी प्रभावी तरीके से जोड़ा जाता है। केवल ऑनलाइन शिकायत दर्ज होने से समस्या हल नहीं होगी। इसके लिए पुलिस, प्रशासन, अस्पताल, सहायता केंद्र और स्वयंसेवकों के बीच तेज सूचना साझा करने की व्यवस्था भी जरूरी होगी।
यदि किसी व्यक्ति की जानकारी पोर्टल पर दर्ज होने के बाद संबंधित टीमों तक तुरंत पहुंचती है और अलग-अलग केंद्रों पर उसकी पहचान की जा सकती है, तो तलाश का समय काफी कम हो सकता है। यही इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा होगा।
हालांकि इसके लिए श्रद्धालुओं को भी जागरूक करना जरूरी होगा। परिवार के लोग मेले में पहुंचने से पहले अपने साथियों की फोटो, मोबाइल नंबर और जरूरी पहचान संबंधी जानकारी सुरक्षित रख सकते हैं। बच्चों और बुजुर्गों के पास पहचान संबंधी कार्ड रखना भी उपयोगी हो सकता है।
कुंभ में आने वाले लोगों को डिजिटल सुविधाओं के इस्तेमाल की जानकारी देने के लिए मेला क्षेत्र में हेल्प डेस्क और सूचना केंद्र भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले ऐसे श्रद्धालु जो ऑनलाइन सेवाओं के अभ्यस्त नहीं हैं, उन्हें सहायता उपलब्ध कराना जरूरी होगा।
कुल मिलाकर हरिद्वार कुंभ 2027 को 'डिजिटल कुंभ' के रूप में विकसित करने की तैयारी में तकनीक को बड़े स्तर पर इस्तेमाल करने की योजना है। खोया-पाया पोर्टल इस व्यवस्था का ऐसा हिस्सा होगा, जिसका सीधा फायदा श्रद्धालुओं और उनके परिवारों को मिल सकता है।
अगर यह सिस्टम सही तरीके से लागू होता है तो मेले में किसी के खोने की स्थिति में परिजनों को केवल मेला क्षेत्र में पोस्टर लगाने या अलग-अलग केंद्रों पर भटकने की जरूरत कम हो सकती है। एक क्लिक पर शिकायत दर्ज होने और सूचना कई संबंधित केंद्रों तक पहुंचने से तलाश की प्रक्रिया तेज और व्यवस्थित हो सकती है।
हालांकि पोर्टल की वास्तविक कार्यप्रणाली, लॉन्च की तारीख और श्रद्धालुओं के लिए उपलब्ध होने वाली अंतिम सुविधाएं सरकार की अंतिम व्यवस्था और तकनीकी क्रियान्वयन पर निर्भर करेंगी। अभी यह डिजिटल कुंभ की प्रस्तावित योजना का हिस्सा है।









