Harvard University में बदल सकता है Grading System, अब सिर्फ 20% छात्रों को मिलेगा A ग्रेड

Harvard University में नए ग्रेडिंग सिस्टम पर विचार हो रहा है। प्रस्ताव के तहत अब सिर्फ 20% छात्रों को ही A ग्रेड दिए जाने की संभावना है।

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में ग्रेडिंग सिस्टम बदलने का प्रस्ताव सामने आया है। नए नियम के तहत किसी भी क्लास में सीमित छात्रों को ही A ग्रेड मिलेगा, ताकि ग्रेड इन्फ्लेशन को कम किया जा सके।

कैम्ब्रिज: Harvard University में ग्रेडिंग सिस्टम को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। यूनिवर्सिटी फैकल्टी एक ऐसे प्रस्ताव पर विचार कर रही है, जिसके तहत किसी भी क्लास में केवल सीमित छात्रों को ही A ग्रेड दिया जाएगा। यह कदम ग्रेड इन्फ्लेशन को कम करने और अकादमिक मूल्यांकन को अधिक संतुलित बनाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।

हार्वर्ड में A ग्रेड देने के नियम में बदलाव की तैयारी

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएट छात्रों के लिए ग्रेडिंग सिस्टम को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। प्रस्ताव के मुताबिक, अब किसी भी क्लास में केवल 20 प्रतिशत छात्रों और चार अतिरिक्त स्टूडेंट्स को ही A ग्रेड दिया जाएगा। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो यह नियम अकादमिक ईयर 2027 से लागू किया जा सकता है।

यूनिवर्सिटी का मानना है कि मौजूदा व्यवस्था में जरूरत से ज्यादा छात्रों को उच्च ग्रेड दिए जा रहे हैं, जिससे अकादमिक मूल्यांकन की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

ग्रेड इन्फ्लेशन को लेकर लंबे समय से उठ रहे थे सवाल

रिपोर्ट्स के अनुसार, 2025 में हार्वर्ड में दिए गए कुल ग्रेड्स में करीब 60 प्रतिशत A ग्रेड थे। यह आंकड़ा 2006 की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा माना जा रहा है। बाद में यूनिवर्सिटी ने फैकल्टी को ग्रेडिंग में सख्ती बरतने के निर्देश दिए, जिसके बाद A ग्रेड का प्रतिशत घटकर 53 प्रतिशत तक पहुंच गया।

अमेरिका की कई प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज पर लंबे समय से ग्रेड इन्फ्लेशन के आरोप लगते रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि जरूरत से ज्यादा उच्च ग्रेड देने से सर्वश्रेष्ठ और औसत प्रदर्शन करने वाले छात्रों के बीच का अंतर कम हो जाता है।

ट्रंप प्रशासन ने भी उठाए थे सवाल

अमेरिका में यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का हिस्सा भी बन चुका है। राष्ट्रपति Donald Trump की सरकार पहले भी कह चुकी है कि बढ़ा-चढ़ाकर नंबर देना मेरिट आधारित शिक्षा प्रणाली के खिलाफ है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ यूनिवर्सिटीज को यह संकेत भी दिया गया था कि फंडिंग और नीतिगत प्राथमिकता के लिए उन्हें अपने ग्रेडिंग सिस्टम में सुधार करना होगा।

छात्रों और प्रोफेसरों के बीच मतभेद

हार्वर्ड में प्रस्तावित बदलाव का कई छात्र विरोध कर रहे हैं। एक सर्वे के अनुसार, लगभग 85 प्रतिशत छात्रों ने नए सिस्टम पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इससे प्रतिस्पर्धा और मानसिक दबाव बढ़ सकता है।

कुछ छात्रों का मानना है कि सख्त ग्रेडिंग की वजह से छात्र कठिन विषयों को चुनने से बच सकते हैं। वहीं, प्रोफेसरों का तर्क है कि सभी छात्रों को लगभग समान ग्रेड देना अकादमिक ईमानदारी के खिलाफ है और इससे उत्कृष्ट प्रदर्शन की पहचान कमजोर होती है।

नए सिस्टम में हो सकते हैं और बदलाव

रिपोर्ट के मुताबिक, हार्वर्ड GPA आधारित सम्मान प्रणाली में भी बदलाव पर विचार कर रहा है। यूनिवर्सिटी “परसेंटाइल रैंकिंग” जैसे विकल्पों पर काम कर सकती है, ताकि छात्रों के प्रदर्शन का अधिक सटीक मूल्यांकन किया जा सके।

फिलहाल इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला होना बाकी है, लेकिन इसकी चर्चा अमेरिका के उच्च शिक्षा क्षेत्र में तेजी से हो रही है।

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