बिहार के शिवहर जिले के प्रिंस कुमार ने आर्थिक चुनौतियों और शुरुआती असफलताओं के बावजूद UPSC में सफलता हासिल की। मोटरसाइकिल मैकेनिक के बेटे प्रिंस पहले IPS बने और चौथे प्रयास में AIR 89 लाकर IAS बनने का लक्ष्य पूरा किया।
UPSC Success Story: बिहार के शिवहर जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर IAS अधिकारी बनने तक प्रिंस कुमार का सफर संघर्ष और लगातार प्रयासों की कहानी है। मोटरसाइकिल मैकेनिक के बेटे प्रिंस ने सरकारी स्कूल से पढ़ाई की और अंग्रेजी को लेकर झिझक के बावजूद सिविल सेवा की तैयारी जारी रखी। शुरुआती दो प्रयासों में असफलता के बाद तीसरे प्रयास में उनका चयन IPS के लिए हुआ। इसके बाद चौथे प्रयास में AIR 89 हासिल कर उन्होंने IAS बनने का सपना पूरा किया।
बिहार के छोटे से गांव से IAS अधिकारी बनने तक का सफर

बिहार के शिवहर जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर IAS अधिकारी बनने तक प्रिंस कुमार का सफर मेहनत, संघर्ष और दृढ़ संकल्प की कहानी है। एक साधारण परिवार में पले-बढ़े प्रिंस के पिता मोटरसाइकिल मैकेनिक हैं। आर्थिक चुनौतियों और पढ़ाई के दौरान आई मुश्किलों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा। शुरुआती दो प्रयासों में असफल होने के बाद उन्होंने तीसरे प्रयास में UPSC परीक्षा पास कर IPS सेवा हासिल की। इसके बाद चौथे प्रयास में ऑल इंडिया रैंक (AIR) 89 प्राप्त कर IAS बनने का सपना पूरा किया।
सरकारी स्कूल से पढ़ाई, अंग्रेजी को लेकर थी झिझक
प्रिंस कुमार ने अपनी स्कूली शिक्षा सरकारी स्कूल से पूरी की। ग्रामीण परिवेश में पढ़ाई करने के कारण उन्हें अंग्रेजी बोलने में परेशानी और झिझक महसूस होती थी। वह खुद को पढ़ाई में एक औसत छात्र मानते थे, लेकिन उनके मन में कुछ बड़ा करने की इच्छा हमेशा रही।
प्रिंस के पिता मोटरसाइकिल मैकेनिक हैं। ऐसे में परिवार की आर्थिक परिस्थितियां भी उनकी यात्रा की चुनौतियों में शामिल थीं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने आगे बढ़ने का फैसला किया और अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए।
शुरुआत में प्रिंस का सपना नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA) में शामिल होकर रक्षा क्षेत्र में करियर बनाने का था। हालांकि, अंग्रेजी को लेकर आत्मविश्वास की कमी के कारण उन्होंने यह रास्ता छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का निर्णय लिया और अपने सपने को पूरा करने के लिए दिल्ली पहुंच गए।
दो बार असफलता, फिर IPS बनने में मिली सफलता
UPSC जैसी कठिन परीक्षा में सफलता हासिल करना प्रिंस के लिए आसान नहीं रहा। शुरुआती दो प्रयासों में उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा। इस दौरान उन्हें लोगों के ताने भी सुनने पड़े। कुछ लोगों का मानना था कि गांव से आने वाला छात्र कलेक्टर नहीं बन सकता।
लेकिन प्रिंस ने इन बातों को अपनी राह की बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने अपनी पिछली गलतियों को समझा और तैयारी के तरीके में बदलाव किया। तीसरे प्रयास में उन्होंने मैथिली साहित्य को वैकल्पिक विषय के रूप में चुना और परीक्षा की तैयारी पर अधिक ध्यान दिया।
इस बार उनकी मेहनत सफल रही और उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए हो गया। यह उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि थी, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जाना था।
चौथे प्रयास में AIR 89 हासिल कर बने IAS अधिकारी
IPS में चयन होने के बाद भी प्रिंस कुमार ने अपने IAS बनने के सपने को पूरा करने के लिए तैयारी जारी रखी। उन्होंने पिछले प्रयासों से मिले अनुभव का इस्तेमाल किया और इस बार इंटरव्यू तथा निबंध लेखन पर विशेष ध्यान दिया।
चौथे प्रयास में उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में AIR 89 हासिल की। इस रैंक के साथ उनका IAS अधिकारी बनने का सपना पूरा हो गया। उनकी सफलता उन लोगों के लिए भी जवाब बनी, जिन्होंने उनकी ग्रामीण पृष्ठभूमि और क्षमताओं पर सवाल उठाए थे।
प्रिंस कुमार की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों और शुरुआती असफलताओं के बावजूद बड़े लक्ष्य हासिल करना चाहते हैं। उनका सफर बताता है कि असफलताओं से सीखना, कमजोरियों को पहचानना और लगातार मेहनत करना सफलता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।











