गुरुग्राम और गुजरात में नकली BP दवाओं के मामले सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। गुरुग्राम FDA ने कार्रवाई में कंपनी निदेशक समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि गुजरात मामले में भी कई राज्यों तक जांच पहुंची है।
गुरुग्राम: देश में नकली BP दवाओं की सप्लाई को लेकर दो अलग-अलग मामलों ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ाई है। गुरुग्राम में टेल्मा-एएम की संदिग्ध नकली खेप मिलने के बाद FDA की जांच में कंपनी निदेशक समेत पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई है। वहीं, गुजरात में निकार्डिया रिटार्ड-10 की संदिग्ध नकली दवा मिलने के बाद जांच की कड़ी कई राज्यों तक पहुंचने की बात सामने आई है।
नकली BP दवाओं की जांच का दायरा बढ़ा
देश में नकली BP दवाओं की सप्लाई को लेकर गुरुग्राम और गुजरात से सामने आए दो मामलों ने जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा है। गुरुग्राम में टेल्मा-एएम की संदिग्ध नकली दवा मिलने के बाद FDA ने कार्रवाई करते हुए कंपनी निदेशक समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं, गुजरात में निकार्डिया रिटार्ड-10 की संदिग्ध नकली खेप मिलने के बाद जांच अहमदाबाद से आगे कई राज्यों तक पहुंचने की बात सामने आई है।
गुरुग्राम और गुजरात में सामने आए मामलों में दवाओं के ब्रांड अलग-अलग हैं, लेकिन जांच में एक समान पैटर्न सामने आया है। दोनों मामलों में असली कंपनियों के नाम, बैच नंबर और पैकेजिंग का इस्तेमाल करके दवाओं को बाजार में पहुंचाने की बात सामने आई है। हालांकि, अभी तक जांच एजेंसियों को दोनों मामलों के बीच कोई सीधा संबंध नहीं मिला है। इसके बावजूद समान तरीके से नकली दवाओं की पैकेजिंग और सप्लाई किए जाने के कारण जांच का दायरा बढ़ाया गया है।
गुरुग्राम में टेल्मा-एएम की संदिग्ध दवा से खुला मामला
गुरुग्राम में मामले की शुरुआत जुलाई में सुभाष नगर के एक मेडिकल स्टोर से संदिग्ध टेल्मा-एएम की खेप मिलने के बाद हुई। इसके बाद FDA ने दवा के स्रोत और सप्लाई चैन की जांच शुरू की। जांच आगे बढ़ने के साथ कई लोगों के नाम सामने आए और कार्रवाई का दायरा गुरुग्राम से दिल्ली तक पहुंच गया।
19 जुलाई को सुब्रत द्विवेदी को गिरफ्तार किया गया। इसके अगले दिन मुरादाबाद निवासी जुबैर को भी गिरफ्तार किया गया। पूछताछ और आगे की जांच के बाद सितंबर में रुड़की निवासी विपिन कुमार और काशीपुर निवासी प्रदीप कुमार को गिरफ्तार किया गया।
जांच के दौरान करीब 90 हजार गोलियां तैयार किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद FDA ने कंपनी निदेशक मनीष सिंह राठौर को भी गिरफ्तार किया। अब एजेंसी दवा के निर्माण से लेकर उसकी पैकिंग और बाजार में सप्लाई तक पूरी कड़ी की जांच कर रही है।
निर्माण से लेकर सप्लाई तक खंगाली जा रही पूरी चेन
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि संदिग्ध नकली दवाओं के निर्माण के लिए कच्चा माल कहां से खरीदा गया था। इसके साथ ही पैकेजिंग सामग्री, नकली लेबल और असली कंपनियों से मिलते-जुलते पैक तैयार करने की प्रक्रिया की भी पड़ताल की जा रही है।
जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा यह पता लगाना है कि तैयार की गई दवाएं किन माध्यमों से मेडिकल स्टोर्स और बाजार तक पहुंचाई गईं। इसके लिए सप्लाई नेटवर्क से जुड़े लोगों और स्रोतों की जानकारी जुटाई जा रही है।
गुजरात में निकार्डिया रिटार्ड-10 का मामला
गुजरात में भी नकली BP दवा का मामला एक कंपनी की शिकायत के बाद सामने आया। बाजार में निकार्डिया रिटार्ड-10 की संदिग्ध नकली दवा मिलने के बाद स्थानीय एजेंसी FDCA ने जांच शुरू की।
जांच के दौरान अहमदाबाद से तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद जांच की कड़ी उत्तराखंड, राजस्थान और उत्तर प्रदेश तक पहुंचने की बात सामने आई है। एजेंसी अलग-अलग स्थानों पर दवा के निर्माण और वितरण से जुड़े संभावित नेटवर्क की जानकारी जुटा रही है।
क्या दोनों मामलों के बीच है कोई कनेक्शन?
गुरुग्राम और गुजरात के मामलों में फिलहाल सीधा कनेक्शन सामने नहीं आया है। हालांकि, दोनों जगह असली कंपनी के नाम, बैच और पैकेजिंग का इस्तेमाल किए जाने का समान तरीका जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण बिंदु है।
अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या कच्चे माल, पैकेजिंग सामग्री, नकली लेबल या वितरण नेटवर्क का कोई साझा स्रोत मौजूद है। अगर किसी साझा सप्लायर या पैकेजिंग नेटवर्क की पुष्टि होती है, तो जांच का दायरा कई राज्यों तक बढ़ सकता है। फिलहाल दोनों मामलों को अलग-अलग जांचा जा रहा है और साझा नेटवर्क की संभावना अभी जांच का विषय है।










