हरियाणा में इस मानसून सीजन 317.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य 413 मिलीमीटर से 23 प्रतिशत कम है। कम बारिश से कृषि प्रभावित होने की आशंका है, जबकि बढ़ते तापमान के कारण बिजली की मांग भी बढ़ी है।
हिसार: हरियाणा से मानसून बुधवार को सामान्य से 23 प्रतिशत कम बारिश के साथ विदा हो गया। इस सीजन प्रदेश में 317.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि सामान्य आंकड़ा 413 मिलीमीटर है। पलवल को छोड़कर सभी जिलों में बारिश सामान्य से कम रही। मौसम में बदलाव के बीच बढ़ते तापमान और पश्चिमी गर्म व शुष्क हवाओं का असर भी देखने को मिल रहा है।
317.5 मिलीमीटर बारिश के साथ मानसून की विदाई
हरियाणा में इस बार मानसून सीजन के दौरान कुल 317.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। यह प्रदेश की सामान्य 413 मिलीमीटर वर्षा के मुकाबले 23 प्रतिशत कम है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के नजदीक स्थित यमुनानगर को छोड़कर लगभग पूरे प्रदेश से मानसून लौट चुका है।

पलवल को छोड़कर हरियाणा के सभी जिलों में वर्षा सामान्य से कम रही। कम बारिश का असर कृषि क्षेत्र पर पड़ने की आशंका है। मानसून के दौरान पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खेती के लिए उपलब्ध पानी और सिंचाई की जरूरत पर असर पड़ सकता है।
पश्चिमी गर्म हवाओं से बढ़ रहा तापमान
मानसून की विदाई के बाद प्रदेश में तापमान में भी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार, राजस्थान में बने प्रति चक्रवातीय परिसंचरण के कारण हरियाणा और एनसीआर में पश्चिमी गर्म और शुष्क हवाएं चल रही हैं।
इन हवाओं के कारण वातावरण में नमी कम हो रही है और दिन के तापमान में वृद्धि हो रही है। बुधवार को भी प्रदेश के लगभग सभी जिलों में तापमान बढ़ा। गुरुग्राम में अधिकतम तापमान 38.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि 37.4 डिग्री सेल्सियस के साथ फरीदाबाद दूसरे स्थान पर रहा।
प्रदेश के सभी जिलों में न्यूनतम तापमान 20 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा। तापमान में कमी नहीं आने के कारण बिजली की खपत भी बढ़ी हुई है।
25 सितंबर से मौसम में बदलाव की संभावना
25 सितंबर को एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है। इसके प्रभाव से हरियाणा के उत्तरी जिलों में कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी हो सकती है।
इसके बाद 28 से 30 सितंबर के दौरान पश्चिमी विक्षोभ और बंगाल की खाड़ी से जुड़ी मौसम प्रणाली के प्रभाव से उत्तरी और पूर्वी जिलों में मौसम में बदलाव की संभावना है। इन क्षेत्रों में हल्की बारिश भी हो सकती है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून की वापसी के लिए लगातार बारिश का न होना, निचले वायुमंडल में प्रतिचक्रवात का बनना और हवा में नमी की कमी प्रमुख संकेत माने जाते हैं।
2016 में भी रहा था कमजोर मानसून
हरियाणा में इससे पहले 2016 में भी मानसून कमजोर रहा था। उस वर्ष सामान्य से 58 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी। हालांकि, 2015 में स्थिति इससे भी कमजोर रही थी। उस दौरान सामान्य से 126 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी और प्रदेश में कुल 287.7 मिलीमीटर वर्षा हुई थी।
इस लिहाज से इस वर्ष का मानसून भी पिछले एक दशक के कमजोर मानसून वाले वर्षों में शामिल रहा है।










