झारखंड के हजारीबाग में एनटीपीसी की ट्रांसपोर्टिंग गाड़ी की चपेट में आने से 55 वर्षीय जयपाली महतो की मौत हो गई। हादसे के बाद ग्रामीणों ने सड़क जाम कर मुआवजा, रोजगार और अलग ट्रांसपोर्टिंग सड़क की मांग की।
हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले के बड़कागांव थाना क्षेत्र में शुक्रवार सुबह हुए सड़क हादसे में 55 वर्षीय जयपाली महतो की मौत हो गई। जानकारी के अनुसार, चेपाकला मार्ग पर एनटीपीसी की ट्रांसपोर्टिंग गाड़ी की चपेट में आने से यह दुर्घटना हुई। टक्कर इतनी गंभीर थी कि जयपाली महतो ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के बाद घटनास्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण और मृतक के परिजन जुट गए। घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई। आक्रोशित ग्रामीणों ने एनटीपीसी के चार नंबर गेट के पास ट्रांसपोर्टिंग सड़क को जाम कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि कोयले की ढुलाई के लिए इस्तेमाल होने वाले भारी वाहनों के कारण स्थानीय लोगों के लिए सड़क पर आवाजाही मुश्किल हो रही है और दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है।
चेपाकला की ओर जा रहे थे जयपाली महतो
बताया गया कि जयपाली महतो मंझली डाडी से चेपाकला की ओर जा रहे थे। इसी दौरान एनटीपीसी से जुड़ी ट्रांसपोर्टिंग गाड़ी ने उन्हें टक्कर मार दी। दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी।
सूचना मिलने के बाद डाड़ीकला सहायक थाना के एसआई चंद्रमोहन झा पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने हादसे की जानकारी जुटाई और दुर्घटना में शामिल वाहन तथा घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी। पुलिस की ओर से मामले से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।
मुआवजे और परिवार के एक सदस्य को रोजगार की मांग
हादसे में जयपाली महतो की मौत के बाद उनके परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई। ग्रामीणों ने एनटीपीसी के चार नंबर गेट के पास सड़क पर प्रदर्शन करते हुए ट्रांसपोर्टिंग मार्ग को बाधित कर दिया।
प्रदर्शन कर रहे लोगों की मुख्य मांग मृतक के परिवार को उचित मुआवजा देना और परिवार के एक सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराना है। ग्रामीणों का कहना है कि परिवार के सामने अचानक आर्थिक और सामाजिक संकट खड़ा हो गया है, इसलिए कंपनी प्रबंधन को परिवार की सहायता के लिए आगे आना चाहिए।
ग्रामीणों ने यह भी मांग रखी कि स्थानीय लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ट्रांसपोर्टिंग वाहनों के लिए अलग सड़क बनाई जाए। उनका कहना है कि सार्वजनिक रास्तों पर भारी वाहनों की आवाजाही से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है और आम लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है।
सार्वजनिक सड़क से कोयला ढुलाई रोकने की मांग
स्थानीय लोगों ने एनटीपीसी प्रबंधन से सार्वजनिक सड़कों के जरिए कोयले की ट्रांसपोर्टिंग बंद करने की मांग की है। ग्रामीणों के अनुसार, भारी वाहनों की लगातार आवाजाही से सड़क पर यातायात का दबाव बढ़ रहा है। पैदल चलने वाले लोगों और दोपहिया वाहन चालकों के लिए भी जोखिम बना रहता है।
ग्रामीणों ने कहा कि कोयला और अन्य सामग्री की ढुलाई के लिए यदि अलग ट्रांसपोर्टिंग मार्ग बनाया जाता है तो इससे स्थानीय आबादी को राहत मिल सकती है। साथ ही भारी वाहनों और आम यातायात के बीच टकराव की आशंका भी कम होगी।
पुलिस ने शुरू की हादसे की जांच
पुलिस ने दुर्घटना के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल पर मौजूद लोगों से जानकारी जुटाई जा रही है और हादसे में शामिल वाहन से संबंधित तथ्यों की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसमें वाहन चालक की क्या भूमिका थी।
हादसे के बाद बड़ी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी में स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया। प्रशासन और कंपनी प्रबंधन के सामने अब ग्रामीणों की मांगों को लेकर समाधान निकालने की चुनौती है।
भारी वाहनों की आवाजाही पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक और खनन क्षेत्रों में भारी वाहनों की आवाजाही से जुड़ी सड़क सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं। कोयला परिवहन से जुड़े मार्गों पर अक्सर भारी वाहन चलते हैं, जिससे स्थानीय आबादी और परिवहन व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास और औद्योगिक गतिविधियों के साथ आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी जरूरी है। उनका आग्रह है कि ट्रांसपोर्टिंग व्यवस्था ऐसी हो जिससे कंपनी का काम भी प्रभावित न हो और स्थानीय लोगों को दुर्घटनाओं का सामना भी न करना पड़े।
फिलहाल ग्रामीणों की मांगों, सड़क जाम और दुर्घटना की परिस्थितियों को लेकर प्रशासन तथा संबंधित पक्षों के बीच बातचीत की स्थिति पर नजर बनी हुई है। पुलिस की जांच के बाद हादसे के कारणों और जिम्मेदारी को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।











