हेमंत सोरेन पर बयानबाजी मामले में झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, बाबूलाल मरांडी को मिली राहत को किया खारिज

झारखंड हाई कोर्ट ने हेमंत सोरेन पर बयानबाजी मामले में अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने बाबूलाल मरांडी की राहत की मांग खारिज कर दी। जानिए पूरे मामले की कानूनी स्थिति

झारखंड हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके परिवार के खिलाफ बयान देने के मामले में जनता दल (जेएमएम) के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी को मिली अंतरिम राहत को खारिज कर दिया है। 

रांची: झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके परिवार के खिलाफ बयान देने के मामले में दर्ज प्राथमिकी को लेकर बाबूलाल मरांडी द्वारा दाखिल याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने पीड़क कार्रवाई नहीं करने के पहले के आदेश को वापस ले लिया। इस दौरान बाबूलाल मरांडी की ओर से समय दिए जाने की मांग की गई, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह होगी।

बाबूलाल मरांडी पर दर्ज प्राथमिकी

बाबूलाल मरांडी के खिलाफ झारखंड के चार जिलों—रामगढ़, सिमडेगा, बरहेट और मधुपुर—में प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह मामला तब सामने आया था जब मरांडी ने एक यूट्यूब चैनल को दिए साक्षात्कार में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनके परिवार के खिलाफ टिप्पणी की थी। साक्षात्कार में मरांडी ने आरोप लगाया कि, हेमंत सोरेन और उनका परिवार पूरे राज्य में भ्रष्टाचार फैला रहे हैं।

इस बयान के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकर्ताओं ने विभिन्न थानों में रिपोर्ट दर्ज कराई। 25 अगस्त 2023 को सिमडेगा, रामगढ़ और मधुपुर में एफआईआर दर्ज की गई थी।

हेमंत सोरेन पर बयानबाजी मामले में झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, बाबूलाल मरांडी को मिली राहत को किया खारिज

हाई कोर्ट में बाबूलाल मरांडी की याचिका

प्राथमिकी के खिलाफ बाबूलाल मरांडी ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी और प्राथमिकी को निरस्त करने का आग्रह किया था। याचिका में उन्होंने बताया कि उनका बयान केवल राजनीतिक टिप्पणी थी और इसमें किसी प्रकार का व्यक्तिगत अपमान या अपराध करने का इरादा नहीं था। हालांकि, हाई कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के दौरान पीड़क कार्रवाई न करने के आदेश को वापस ले लिया। इस दौरान बाबूलाल मरांडी की ओर से समय मांगा गया, जिसे अदालत ने स्वीकार किया। अब मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह तय की गई है।

यह मामला झारखंड की राजनीति में बड़े विवाद का रूप ले चुका है। बाबूलाल मरांडी पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड विकास मोर्चा (प्रखण्ड) के प्रमुख हैं और हेमंत सोरेन झारखंड के वर्तमान मुख्यमंत्री हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला न केवल मरांडी की राजनीतिक गतिविधियों के प्रति ध्यान खींचता है, बल्कि झारखंड में सत्ता और विपक्ष के बीच बढ़ते तनाव को भी उजागर करता है।

अदालत की कार्रवाई

झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस अनिल कुमार चौधरी ने बुधवार को बाबूलाल मरांडी की याचिका पर सुनवाई की। अदालत ने अंतरिम राहत को खारिज कर दिया, जिससे मरांडी की सुरक्षा में अस्थायी सुविधा समाप्त हो गई। बाबूलाल मरांडी को सुनवाई के लिए समय दिया गया और अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई।

फिलहाल बाबूलाल मरांडी पर दर्ज प्राथमिकी न्यायालय के नियंत्रण में है। हाई कोर्ट की इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक बयानबाजी के दायरे को लेकर नए सवाल खड़े कर रहा है।

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