हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार रात भूकंप के तीन झटके महसूस किए गए, जिनमें सबसे तेज झटका 5.0 तीव्रता का था। चंबा केंद्रित इन झटकों से कांगड़ा और आसपास के इलाकों में मकानों को नुकसान पहुंचा, जबकि पालमपुर अस्पताल की छत का हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया।
शिमला: हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार रात आए लगातार तीन भूकंप के झटकों ने लोगों को दहशत में डाल दिया। सबसे पहले आए 5.0 तीव्रता के भूकंप के बाद दो और झटके महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र चंबा जिला रहा, जबकि कांगड़ा, धर्मशाला और पालमपुर समेत कई क्षेत्रों में इसका असर देखने को मिला। कुछ मकानों में दरारें आईं और एक अस्पताल भवन को भी नुकसान पहुंचा है।
रातभर दहशत में रहे लोग
हिमाचल प्रदेश में शुक्रवार रात सबसे पहला भूकंप रात 10:04 बजे दर्ज किया गया, जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5.0 मापी गई। इसके बाद रात 11:04 बजे 2.8 और 11:52 बजे 3.0 तीव्रता के दो और झटके महसूस किए गए। तीनों भूकंपों का केंद्र चंबा जिला बताया गया है।

पहला झटका काफी तेज होने के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में लोग घबराकर घरों और इमारतों से बाहर निकल आए। कई स्थानों पर देर रात तक लोग खुले स्थानों में रहे। भूकंप के झटके पड़ोसी राज्य पंजाब के कुछ इलाकों में भी महसूस किए गए।
धर्मशाला और शाहपुर में संपत्ति को नुकसान
भूकंप के कारण जिला कांगड़ा के धर्मशाला क्षेत्र में कई मकानों में दरारें आने की सूचना मिली है। स्थानीय लोगों के अनुसार झटके इतने तेज थे कि घरों के भीतर रखे सामान भी हिलने लगे। इससे लोगों में भय का माहौल बन गया।
शाहपुर विधानसभा क्षेत्र के माहड़ गांव में एक स्लेटपोश मकान को भी नुकसान पहुंचा है। मकान की छत बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसके बाद परिवार के लिए वहां रहना मुश्किल हो गया है। प्रभावित परिवार ने प्रशासन से राहत और सहायता की मांग की है।
पालमपुर अस्पताल की छत का हिस्सा गिरा
भूकंप का असर पालमपुर के सिविल अस्पताल में भी देखने को मिला। अस्पताल के पुराने भवन की दूसरी मंजिल की छत का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया। घटना के समय अस्पताल में मरीज मौजूद थे, लेकिन राहत की बात यह रही कि किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार प्रभावित भवन काफी पुराना है और पहले से असुरक्षित श्रेणी में माना जाता रहा है। छत को नुकसान पहुंचने के बाद मरीजों और उनके परिजनों में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बन गया।
पर्यटन स्थलों पर भी दिखा असर
धर्मशाला और आसपास के पर्यटन क्षेत्रों में ठहरे पर्यटक भी भूकंप के झटकों से घबरा गए। कई होटल मेहमान रात में कमरों से बाहर निकल आए। कुछ स्थानों पर अफरा-तफरी जैसी स्थिति भी देखने को मिली, हालांकि किसी बड़े हादसे की सूचना नहीं है।
प्रशासन ने स्थिति पर नजर बनाए रखी और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। विभिन्न जिलों में नुकसान का आकलन करने का काम भी शुरू कर दिया गया है।
विशेषज्ञों ने बताई वजह
भूकंप विशेषज्ञों का कहना है कि अपेक्षाकृत कम गहराई में आने वाले भूकंप का असर अधिक महसूस होता है। इसी कारण 5.0 तीव्रता का यह झटका प्रदेश के बड़े हिस्से में स्पष्ट रूप से महसूस किया गया। पिछले दो दशकों में हिमाचल प्रदेश में अधिकांश भूकंप 2 से 4 रिक्टर स्केल के बीच दर्ज किए गए हैं, जबकि यह झटका अपेक्षाकृत अधिक तीव्र माना जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश का कांगड़ा क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। वर्ष 1905 में कांगड़ा में आए विनाशकारी भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी, जिसमें हजारों लोगों की जान गई थी। इसी वजह से क्षेत्र में भूकंप संबंधी गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जाती है।











