नालंदा सदर अस्पताल में हाईटेक फायर सेफ्टी सिस्टम, लेकिन जिले के कई निजी अस्पताल बिना NOC के संचालित

नालंदा सदर अस्पताल में अलार्म और ऑटोमैटिक फायर सेफ्टी सिस्टम लगाए गए हैं। वहीं जिले के कई निजी अस्पताल अब भी बिना फायर NOC के संचालित हो रहे हैं।
नालंदा सदर अस्पताल में हाईटेक फायर सेफ्टी सिस्टम, लेकिन जिले के कई निजी अस्पताल बिना NOC के संचालित
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बिहार के नालंदा में अस्पतालों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर चर्चा में है। हाल के दिनों में विभिन्न अस्पतालों में आग लगने की घटनाओं के बाद स्वास्थ्य संस्थानों की सुरक्षा तैयारियों की समीक्षा की जा रही है। इस बीच नालंदा सदर अस्पताल ने फायर सेफ्टी को लेकर खुद को काफी हद तक तैयार कर लिया है। अस्पताल में आधुनिक अलार्म सिस्टम, ऑटोमैटिक फायर सेफ्टी उपकरण और आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्थाएं स्थापित की गई हैं।

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए भवन को आधुनिक सुरक्षा तकनीकों से लैस किया गया है। अस्पताल के विभिन्न हिस्सों में फायर अलार्म लगाए गए हैं, जो धुआं या आग का संकेत मिलते ही तुरंत सक्रिय हो जाते हैं। इसके अलावा कई स्थानों पर ऑटोमैटिक फायर कंट्रोल सिस्टम भी लगाए गए हैं, जिससे शुरुआती स्तर पर आग पर काबू पाने में मदद मिल सकती है।

सदर अस्पताल में आपातकालीन निकास मार्ग, अग्निशमन यंत्र और सुरक्षा संबंधी अन्य उपकरणों की भी व्यवस्था की गई है। अस्पताल कर्मियों को समय-समय पर प्रशिक्षण देने और मॉक ड्रिल आयोजित करने की भी योजना बनाई जाती है, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया दी जा सके। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीजों और उनके परिजनों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।

हालांकि इस सकारात्मक तस्वीर के बीच एक चिंताजनक पहलू भी सामने आया है। जिले के कई निजी अस्पतालों के पास अब भी आवश्यक फायर एनओसी (नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट) नहीं होने की बात सामने आ रही है। नियमों के अनुसार अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों को अग्निशमन विभाग से सुरक्षा प्रमाणपत्र प्राप्त करना आवश्यक होता है, लेकिन कई निजी संस्थान इस मानक को पूरा नहीं कर पा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में फायर सेफ्टी केवल कानूनी औपचारिकता नहीं बल्कि जीवन सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीज, बुजुर्ग, बच्चे और गंभीर रोगी मौजूद रहते हैं, जिन्हें आपात स्थिति में तुरंत बाहर निकालना आसान नहीं होता। ऐसे में सुरक्षा मानकों का पालन बेहद आवश्यक हो जाता है।

बिहार अग्निशमन सेवा द्वारा समय-समय पर विभिन्न संस्थानों की जांच की जाती है। अधिकारियों का कहना है कि जिन संस्थानों के पास आवश्यक सुरक्षा प्रमाणपत्र नहीं हैं, उन्हें नियमों का पालन करने के निर्देश दिए जाते हैं। आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

हाल के वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों में अस्पतालों में आग लगने की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें जनहानि भी हुई है। इन घटनाओं ने स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। इसी कारण अब अस्पतालों की फायर सेफ्टी व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

नालंदा सदर अस्पताल में आधुनिक सुरक्षा उपकरणों की मौजूदगी को एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल सरकारी अस्पताल ही नहीं, बल्कि सभी निजी अस्पतालों को भी समान सुरक्षा मानकों का पालन करना चाहिए। जब तक जिले के हर अस्पताल में फायर सेफ्टी के पर्याप्त इंतजाम नहीं होंगे, तब तक मरीजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहेगी।

फिलहाल नालंदा सदर अस्पताल अपनी तैयारियों के कारण एक उदाहरण के रूप में सामने आया है, लेकिन जिले के उन निजी अस्पतालों पर भी निगाहें टिकी हैं जो अभी तक आवश्यक फायर एनओसी और सुरक्षा मानकों को पूरी तरह लागू नहीं कर पाए हैं। प्रशासनिक स्तर पर इस दिशा में आगे की कार्रवाई और निगरानी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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