हिमाचल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, कैप्टिव डीजल जनरेटर की बिजली पर नहीं लगेगा Electricity Duty

हिमाचल हाई कोर्ट ने कैप्टिव या स्टैंडबाय डीजल जनरेटर से बनी बिजली पर Electricity Duty लगाने का प्रावधान रद्द किया। उद्योगों को राहत मिली।

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कैप्टिव या स्टैंडबाय डीजल जनरेटर से खुद के इस्तेमाल के लिए बनाई गई बिजली पर Electricity Duty लगाने के प्रावधान को रद्द कर दिया है। फैसले से औद्योगिक उपभोक्ताओं को राहत मिली है।

शिमला: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने कैप्टिव पावर को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि उपभोक्ता द्वारा अपने इस्तेमाल के लिए डीजल जनरेटर या अन्य माध्यम से तैयार की गई बिजली पर राज्य सरकार Electricity Duty नहीं लगा सकती। अदालत ने हिमाचल प्रदेश Electricity (Duty) Act, 2009 की धारा 3(1)(xi) को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया।

कैप्टिव बिजली पर टैक्स लगाने का प्रावधान रद्द

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने औद्योगिक और अन्य उपभोक्ताओं को राहत देते हुए कैप्टिव या स्टैंडबाय पावर के लिए डीजल जनरेटर से बनाई गई बिजली पर Electricity Duty लगाने से जुड़ा प्रावधान रद्द कर दिया है। यह मामला मेसर्स रुचिरा पेपर्स लिमिटेड समेत कई औद्योगिक इकाइयों की याचिकाओं से जुड़ा था। हाई कोर्ट के रिकॉर्ड में रुचिरा पेपर्स की याचिका CWP No. 12369 of 2024 के रूप में दर्ज है।

कोर्ट के सामने मुख्य सवाल यह था कि क्या राज्य सरकार उस बिजली पर भी Electricity Duty लगा सकती है, जिसे कोई उपभोक्ता अपने ही इस्तेमाल के लिए जनरेटर से तैयार करता है। अदालत ने कानून की charging provision की व्याख्या करते हुए इस तरह की levy को चुनौती देने वाली दलीलों पर विचार किया।

2009 के कानून की धारा 3(1)(xi) पर क्या था विवाद?

हिमाचल प्रदेश Electricity (Duty) Act, 2009 की धारा 3(1) बिजली की खपत और supply से जुड़ी परिस्थितियों में राज्य सरकार को Electricity Duty लगाने का आधार देती है। इसी धारा के clause (xi) में डीजल generating sets या किसी अन्य माध्यम से captive/standby power के लिए खुद की खपत हेतु बनाई गई बिजली पर प्रति यूनिट duty का प्रावधान किया गया था। मूल प्रावधान में यह दर 30 पैसे प्रति यूनिट थी।

रुचिरा पेपर्स की ओर से दलील दी गई कि बिजली बोर्ड की supply में कटौती के कारण उद्योगों को अपने संचालन को जारी रखने के लिए महंगे डीजल जनरेटर का इस्तेमाल करना पड़ता है। ऐसे में अपने इस्तेमाल के लिए अतिरिक्त खर्च करके बिजली तैयार करने वाले उपभोक्ताओं पर अलग से duty लगाना उचित नहीं है।

बिजली कटौती के कारण जनरेटर पर निर्भरता का तर्क

याचिकाकर्ता कंपनी के अनुसार, नियमित बिजली आपूर्ति बाधित होने पर उत्पादन प्रभावित होने से बचाने के लिए उसे डीजल जनरेटर का सहारा लेना पड़ता था। जनरेटर से तैयार बिजली सामान्य grid supply की तुलना में काफी महंगी पड़ती है।

कंपनी ने इसी आधार पर तर्क दिया कि मजबूरी में खुद बिजली तैयार करने वाले उद्योग पर अतिरिक्त Electricity Duty लगाना उपभोक्ता पर दोहरा आर्थिक बोझ डालता है। दूसरी ओर, राज्य की ओर से जनरेटर से होने वाले वायु प्रदूषण और पर्यावरणीय प्रभावों का मुद्दा भी उठाया गया था।

कोर्ट ने कानून की मुख्य charging provision पर दिया जोर

अदालत के समक्ष कानून की उस मूल व्यवस्था की व्याख्या महत्वपूर्ण रही, जिसके तहत Electricity Duty लगाई जा सकती है। अधिनियम की धारा 3(1) में duty को उस energy से जोड़ा गया है जो बोर्ड, licensee, electricity trader या generating company द्वारा consume की जाती है या उनके द्वारा consumer को supplied की जाती है।

इस कानूनी व्याख्या के आधार पर कोर्ट ने अपने लिए captive generation करने वाले consumer पर duty लगाने की व्यवस्था को चुनौती के संदर्भ में देखा। फैसला औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि captive या standby generation का इस्तेमाल बिजली supply बाधित होने की स्थिति में कई इकाइयां करती हैं।

औद्योगिक उपभोक्ताओं को मिल सकती है राहत

इस फैसले का सीधा असर उन industrial consumers पर पड़ सकता है जो अपने संचालन के लिए captive या standby diesel generator का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, किसी विशेष उपभोक्ता पर फैसले का आर्थिक प्रभाव उसके मामले के तथ्यों, लागू notifications और संबंधित demand पर निर्भर करेगा।

हिमाचल प्रदेश में Electricity Duty की दरों को लेकर पहले भी औद्योगिक उपभोक्ताओं और सरकार के बीच कानूनी विवाद सामने आते रहे हैं। इसलिए इस फैसले को केवल एक tax-rate revision के बजाय captive power generation पर duty लगाने के कानूनी अधिकार से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय के रूप में देखा जा रहा है।

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