मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश सरकार ने किशाऊ बांध परियोजना में राज्य के हितों की रक्षा करते हुए एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
शिमला: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच नई दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय बैठक चर्चा का विषय बनी हुई है। इस बैठक में हिमाचल प्रदेश के हितों, विशेषकर किशाऊ बांध परियोजना से जुड़े वित्तीय और ऊर्जा घटकों पर महत्वपूर्ण सहमति बनी है। यह परियोजना हिमाचल और उत्तराखंड की सीमा पर टौंस नदी पर विकसित की जा रही एक बड़ी बहु-राज्यीय जलविद्युत योजना है।
बैठक को राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक और आर्थिक उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें परियोजना से जुड़े लंबे समय से चल रहे वित्तीय विवादों के समाधान की दिशा में प्रगति हुई है।
किशाऊ बांध परियोजना पर बड़ा निर्णय
Kishau Dam Project लगभग 15,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली 422 मेगावाट क्षमता की महत्वाकांक्षी जलविद्युत परियोजना है। यह परियोजना हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की संयुक्त सीमा पर विकसित की जा रही है और टौंस नदी पर स्थित है। बैठक में परियोजना के वित्तीय ढांचे को लेकर महत्वपूर्ण सहमति बनी, जिसके तहत विद्युत घटक से जुड़े लगभग 2,000 करोड़ रुपये के खर्च को लाभान्वित राज्यों—दिल्ली, राजस्थान और हरियाणा—द्वारा वहन करने पर सैद्धांतिक सहमति दी गई है। इस निर्णय से हिमाचल प्रदेश पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ काफी हद तक कम होने की उम्मीद है।
लंबे समय से चल रहे गतिरोध का समाधान
सरकारी सूत्रों के अनुसार, किशाऊ परियोजना से जुड़े वित्तीय योगदान को लेकर पिछले कई वर्षों से विवाद चल रहा था। विशेष रूप से विद्युत घटक के खर्च के वितरण पर असहमति बनी हुई थी। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बैठक में प्रदेश के हितों की मजबूती से पैरवी की और इस गतिरोध को समाप्त करने में अहम भूमिका निभाई। राज्य सरकार का तर्क था कि जब जल घटक पर केंद्र सरकार 90 प्रतिशत अनुदान दे रही है, तो विद्युत घटक पर समान रूप से समर्थन मिलना चाहिए।
सरकारी जानकारी के अनुसार, इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद हिमाचल प्रदेश को प्रतिवर्ष लगभग 100 करोड़ यूनिट बिजली का हिस्सा प्राप्त होगा। इसकी अनुमानित आर्थिक कीमत लगभग 600 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष आंकी गई है। यह न केवल राज्य के ऊर्जा संसाधनों को मजबूत करेगा, बल्कि दीर्घकाल में वित्तीय स्थिरता बढ़ाने में भी सहायक होगा।
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बैठक में कौन-कौन शामिल रहा?
मुख्यमंत्री सुक्खू ने बैठक में यह भी स्पष्ट किया कि इस परियोजना के कारण सबसे अधिक विस्थापन का प्रभाव हिमाचल प्रदेश की आबादी पर पड़ेगा। ऐसे में राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश ने हमेशा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, इसलिए परियोजना से मिलने वाले लाभों में राज्य की उचित हिस्सेदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की। बैठक में कई वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री और अधिकारी उपस्थित थे, जिनमें शामिल हैं:
- केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर
- केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल
- लाभान्वित राज्यों के मुख्यमंत्री
- संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी
- हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव के.के. पंत
- मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार राम सुभग सिंह
- ऊर्जा निदेशक राकेश प्रजापति
इस व्यापक भागीदारी ने बैठक की महत्ता को और बढ़ा दिया। हिमाचल प्रदेश सरकार का कहना है कि यह निर्णय राज्य के वित्तीय हितों की रक्षा की दिशा में एक बड़ी सफलता है।









