वैश्विक तनाव और घरेलू आर्थिक जरूरतों के बीच RBI की मौद्रिक नीति बैठक अहम मानी जा रही है। बाजार को उम्मीद है कि रिजर्व बैंक रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर सकता है, जिससे लोन सस्ते होंगे।
RBI Repo Rate: दुनिया के स्तर पर अनिश्चितता एक बार फिर बढ़ती दिख रही है। अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड वॉर दोबारा तेज हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडाई विमानों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की चेतावनी दी है। इस तरह के वैश्विक घटनाक्रम का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ-साथ उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ता है। ऐसे समय में भारत की मौद्रिक नीति को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अगली मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक 4 से 6 फरवरी के बीच होने वाली है। इस बैठक में रेपो रेट (Repo Rate) को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। बाजार और इकोनॉमिस्ट्स के बीच यह उम्मीद बन रही है कि RBI इस बार रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती कर सकता है।
RBI के सामने बड़ी चुनौती
इस समय भारतीय अर्थव्यवस्था एक अहम मोड़ पर खड़ी है। एक तरफ महंगाई पर काबू बनाए रखना जरूरी है, तो दूसरी तरफ आर्थिक ग्रोथ को रफ्तार देना भी उतना ही अहम है। RBI के लिए इन दोनों के बीच बैलेंस बनाना सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।
हाल के महीनों में रिजर्व बैंक का फोकस सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ाने पर रहा है। इसका मकसद यह है कि बाजार में पैसा आसानी से उपलब्ध हो, जिससे कंज्यूमर खर्च और इन्वेस्टमेंट को सपोर्ट मिल सके। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसी रणनीति के तहत RBI रेपो रेट को मौजूदा स्तर से 0.25 प्रतिशत घटाकर 5.25 प्रतिशत तक ला सकता है।
Repo Rate कटौती से क्या बदलेगा
रेपो रेट वह दर होती है, जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। जब रेपो रेट घटता है, तो बैंकों के लिए फंड सस्ता हो जाता है। इसका सीधा फायदा आम ग्राहकों तक पहुंचता है, क्योंकि बैंक लोन की ब्याज दरों में कटौती करते हैं।
अगर RBI इस बार भी रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती करता है, तो इसका सबसे बड़ा फायदा होम लोन, ऑटो लोन और अन्य रिटेल लोन लेने वालों को मिल सकता है। इसके अलावा, कम ब्याज दरें कॉरपोरेट सेक्टर को भी निवेश के लिए प्रोत्साहित करती हैं।
होम लोन पर होगी बड़ी बचत
रेपो रेट में कटौती का सबसे सीधा असर होम लोन पर पड़ता है। मान लीजिए किसी व्यक्ति ने 9 प्रतिशत की ब्याज दर पर 20 साल के लिए 50 लाख रुपये का होम लोन लिया है। अगर रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती होती है, तो ब्याज दर घटकर 8.75 प्रतिशत हो सकती है।
इस स्थिति में हर महीने की EMI में करीब 800 रुपये की बचत हो सकती है। यानी सालाना लगभग 9,600 रुपये की राहत। पूरे लोन पीरियड में देखें, तो टोटल इंटरेस्ट में करीब 1.9 लाख रुपये तक की बचत हो सकती है।
EMI घटाएं या लोन अवधि कम करें
रेपो रेट कटौती के बाद होम लोन लेने वालों के पास दो विकल्प होते हैं। पहला विकल्प यह है कि वे अपनी EMI कम करवा लें, जिससे मासिक बजट पर दबाव कम हो जाए। दूसरा विकल्प यह है कि EMI को पहले जितना ही रखें और लोन की अवधि कम करवा लें।
अगर कोई व्यक्ति EMI को समान रखता है, तो 20 साल के लोन की अवधि 10 से 12 महीने तक कम हो सकती है। इससे कुल ब्याज में 4 लाख रुपये से ज्यादा की बचत संभव है। यही वजह है कि ब्याज दरों में छोटी सी कटौती भी लंबे समय में बड़ा फर्क डालती है।
एक्सपर्ट्स की राय
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि घरेलू मांग को मजबूत बनाए रखने के लिए RBI को सपोर्टिव पॉलिसी अपनानी होगी। कंज्यूमर खर्च और प्राइवेट इन्वेस्टमेंट अभी भी पूरी तरह से मजबूत नहीं हुआ है। ऐसे में ब्याज दरों में कटौती से इकोनॉमी को जरूरी सपोर्ट मिल सकता है।
इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर बढ़ते ट्रेड टेंशन और अनिश्चितता को देखते हुए भी RBI सतर्क रुख अपना सकता है। अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड वॉर जैसे हालात ग्लोबल ग्रोथ पर असर डाल सकते हैं, जिसका अप्रत्यक्ष प्रभाव भारत पर भी पड़ता है।
CRISIL की चेतावनी
हालांकि सभी एक्सपर्ट्स रेपो रेट कटौती को लेकर एकमत नहीं हैं। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल (CRISIL) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि महंगाई में हो रही बढ़ोतरी को देखते हुए RBI अपनी अगली मॉनिटरी पॉलिसी रिव्यू में ब्याज दरों को स्थिर भी रख सकता है।
क्रिसिल का मानना है कि अगर महंगाई के आंकड़े उम्मीद से ज्यादा ऊपर बने रहते हैं, तो RBI फिलहाल पॉलिसी रेट्स में कोई बदलाव नहीं करेगा। एजेंसी के मुताबिक, महंगाई पर काबू पाना अभी भी RBI की प्राथमिकता बनी हुई है।
2025 में Repo Rate में कितनी कटौती हुई
अगर पिछले साल की बात करें, तो MPC ने फरवरी 2025 से अब तक रेपो रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है। फरवरी और अप्रैल 2025 में 25-25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की गई थी। इसके बाद जून में 50 बेसिस पॉइंट्स की बड़ी कटौती देखने को मिली। दिसंबर 2025 में एक बार फिर 25 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की गई।
हालांकि अगस्त और अक्टूबर 2025 की मॉनिटरी पॉलिसी रिव्यू बैठकों में RBI ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया था। इससे साफ है कि रिजर्व बैंक पूरी तरह डेटा-ड्रिवन अप्रोच अपना रहा है।









