होर्मुज संकट के बीच भारत को बड़ी राहत मिली है। तीन हफ्तों से फंसा एलपीजी टैंकर सुरक्षित निकल गया। भारतीय नौसेना की मदद से जहाज अब भारत की ओर बढ़ रहा है और ऊर्जा आपूर्ति बनी रहने की उम्मीद बढ़ी।
Iran-Israel-US war: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। कई हफ्तों से खतरे में फंसा भारतीय ध्वज वाला एलपीजी से भरा जहाज आखिरकार सुरक्षित रूप से होर्मुज के रास्ते को पार कर भारत की ओर बढ़ गया है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और इस कारण समुद्री रास्तों पर खतरा बना हुआ है। इस जहाज के सुरक्षित निकलने को भारत के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है, क्योंकि इस मार्ग से गैस की आपूर्ति देश की ऊर्जा जरूरतों के लिए बेहद अहम है।
तीन हफ्ते तक फंसा रहा जहाज
यह एलपीजी टैंकर मूल रूप से एक सप्ताह के भीतर भारत पहुंचने वाला था, लेकिन युद्ध के कारण स्थिति पूरी तरह बदल गई। जहाज 28 फरवरी के आसपास रवाना हुआ था, लेकिन होर्मुज जलमार्ग में बढ़ते खतरे और सीमित अनुमति के कारण यह लंबे समय तक वहीं फंसा रहा।
करीब तीन हफ्तों तक जहाज को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिल सकी। इस दौरान केवल चुनिंदा जहाजों को ही इस मार्ग से गुजरने दिया जा रहा था। इस वजह से जहाज की यात्रा में काफी देरी हुई और यह तय समय से काफी देर बाद आगे बढ़ पाया।
खौफ के साये में बीते दिन
इस जहाज पर मौजूद 27 क्रू मेंबर्स के लिए यह समय बेहद डरावना रहा। जहाज के चीफ अधिकारी सोहन लाल ने उस स्थिति का वर्णन करते हुए बताया कि हर दिन उनके ऊपर से मिसाइलें और ड्रोन गुजरते दिखाई देते थे।

क्रू मेंबर्स लगातार तनाव में थे और हर पल खतरे का सामना कर रहे थे। उन्होंने बताया कि स्थिति इतनी गंभीर थी कि किसी भी समय हमले की आशंका बनी रहती थी। इस दौरान जहाज पर मौजूद सभी लोग अपनी सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित थे।
अनुमति मिलने में हुई देरी
भारतीय अधिकारियों ने जहाज के क्रू को मार्च के मध्य में रवाना होने के लिए तैयार रहने को कहा था। लेकिन युद्ध की स्थिति लगातार बिगड़ती गई और जहाज को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिल पाई।
आखिरकार 23 मार्च के आसपास जहाज को आगे बढ़ने की मंजूरी मिली। यह देरी इस बात को दर्शाती है कि उस समय हालात कितने संवेदनशील थे और किसी भी जहाज को बिना अनुमति के आगे बढ़ने की इजाजत नहीं थी।
लारक मार्ग से निकाला गया जहाज
इस जहाज को सुरक्षित निकालने के लिए एक विशेष रणनीति अपनाई गई। सीधे होर्मुज के मुख्य मार्ग से जाने के बजाय जहाज को ईरान के तट से दूर एक संकरे रास्ते से गुजरने की अनुमति दी गई।
यह मार्ग लारक द्वीप के उत्तर में स्थित है और अपेक्षाकृत सुरक्षित माना गया। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि मुख्य मार्ग पर बारूदी सुरंगों और हमलों का खतरा ज्यादा था। इस वैकल्पिक रास्ते ने जहाज को सुरक्षित निकलने में मदद की और बड़ी दुर्घटना से बचाया।
भारतीय नौसेना ने दी सुरक्षा
जब जहाज ने अपनी यात्रा शुरू की तो भारतीय नौसेना ने उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाली। ओमान की खाड़ी से लेकर अरब सागर तक के रास्ते में करीब 20 घंटे तक नौसेना ने जहाज को मार्गदर्शन और सुरक्षा प्रदान की। इस दौरान नौसेना ने यह सुनिश्चित किया कि जहाज सुरक्षित तरीके से अपने गंतव्य की ओर बढ़ सके। यह सहयोग इस मिशन की सफलता में बेहद अहम साबित हुआ।










