HQ-29 बनाम S-500: चीन की मिसाइल तैनाती के बीच भारत के लिए क्या होंगे रणनीतिक विकल्प?

चीन द्वारा HQ-29 और S-500 Prometey जैसी एडवांस मिसाइल प्रणालियों की तैनाती के बीच भारत की सुरक्षा रणनीति पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जानिए भारत के सामने

चीन ने भारत सीमा के पास तिब्बत में HQ-29 मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात किया है। China और Tibet में सैन्य गतिविधियों की खबरें समय-समय पर आती रहती हैं, लेकिन इस तरह के किसी खास सिस्टम की तैनाती को लेकर भरोसेमंद रक्षा स्रोतों या सरकारी स्तर पर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।

नई दिल्ली: चीन और भारत के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एशिया के सुरक्षा परिदृश्य में एक नई बहस तेज हो गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, China ने तिब्बत क्षेत्र में अपने उन्नत मिसाइल डिफेंस सिस्टम HQ-29 की तैनाती शुरू कर दी है, जिससे भारत-चीन सीमा पर रणनीतिक समीकरण और अधिक जटिल हो गए हैं। इसी बीच भारत के लिए रूस से अत्याधुनिक S-500 एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने की संभावनाएं भी चर्चा में हैं।

तिब्बत में चीन की सैन्य तैनाती और HQ-29 सिस्टम

रिपोर्ट्स के अनुसार, चीनी सोशल मीडिया और रक्षा विश्लेषणों में यह दावा किया जा रहा है कि चीन ने कम से कम आठ HQ-29 लॉन्चर्स और 16 इंटरसेप्टर मिसाइलों को रेलवे के माध्यम से तिब्बत क्षेत्र की ओर भेजा है। हालांकि आधिकारिक तौर पर बीजिंग ने इन तैनातियों की पुष्टि नहीं की है। HQ-29 को पहली बार सितंबर 2025 में एक सैन्य परेड में सार्वजनिक रूप से दिखाया गया था। इसे चीन की नई पीढ़ी की लंबी दूरी की मिसाइल डिफेंस तकनीक माना जा रहा है।

HQ-29 की संभावित क्षमता

विशेषज्ञों के अनुमान के अनुसार, HQ-29 एक बहु-स्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम हो सकता है, जिसकी क्षमताएं बेहद उन्नत बताई जा रही हैं।अनुमानों में कहा गया है कि यह सिस्टम:

  • लगभग 2,500 किलोमीटर तक की रेंज को कवर कर सकता है
  • 150 से 850 किलोमीटर ऊंचाई तक इंटरसेप्शन करने में सक्षम हो सकता है
  • 6 से 10 मैक की गति वाली मिसाइलों को नष्ट कर सकता है
  • इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) और हाइपरसोनिक हथियारों को रोकने की क्षमता रख सकता है
  • यहां तक कि लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट्स को भी निशाना बना सकता है

यदि ये दावे पूरी तरह सत्य साबित होते हैं, तो HQ-29 चीन को वैश्विक स्तर पर अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस तकनीक वाले देशों की अग्रिम पंक्ति में ला सकता है।

रूस का S-500 सिस्टम: क्या भारत करेगा खरीद?

इसी बीच Russia के अत्याधुनिक S-500 “Prometheus” एयर डिफेंस सिस्टम को लेकर भी भारत में चर्चा तेज हो गई है। यह सिस्टम रूस की सबसे उन्नत मिसाइल रक्षा तकनीक माना जाता है और इसे 2021 में सेना में शामिल किया गया था। S-500 की प्रमुख विशेषताएं:

  • लगभग 600 किलोमीटर तक लक्ष्य भेदने की क्षमता
  • 200 किलोमीटर ऊंचाई तक इंटरसेप्शन
  • हाइपरसोनिक मिसाइलों और बैलिस्टिक हथियारों को नष्ट करने की क्षमता
  • अंतरिक्ष-स्तरीय (space-level) सुरक्षा क्षमता

तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो S-400 सिस्टम, जो पहले से भारत के पास है, 400 किलोमीटर रेंज तक काम करता है और कई ऑपरेशनल परिस्थितियों में सफल साबित हो चुका है।

भारत की मौजूदा रक्षा रणनीति

India पहले से ही अपनी एयर डिफेंस और मिसाइल क्षमता को मजबूत करने पर लगातार काम कर रहा है। भारत के पास S-400 Triumf जैसे सिस्टम पहले से मौजूद हैं, जिन्हें सीमा सुरक्षा में महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा भारत की अग्नि सीरीज बैलिस्टिक मिसाइलें और स्वदेशी डिफेंस प्रोग्राम भी लगातार विस्तार में हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत “मल्टी-लेयर डिफेंस स्ट्रैटेजी” पर काम कर रहा है, जिसमें अलग-अलग दूरी और ऊंचाई पर खतरे को रोकने की क्षमता शामिल है।

रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, चीन की सैन्य गतिविधियां केवल तकनीकी विकास नहीं बल्कि रणनीतिक दबाव का हिस्सा हैं। तिब्बत क्षेत्र में डिफेंस सिस्टम की तैनाती को भारत-चीन सीमा पर शक्ति संतुलन बदलने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

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