हंगरी की संसद ने ओर्बान के आलोचक न्यायाधीश आंद्रास बाका को राष्ट्रपति चुना

हंगरी की संसद ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट प्रमुख आंद्रास बाका को देश का नया राष्ट्रपति चुना है। न्यायपालिका की आलोचना करने वाले बाका को मतदान में 140 वोट मिले।

हंगरी की संसद ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट प्रमुख आंद्रास बाका को देश का नया राष्ट्रपति चुना है। विक्टर ओर्बान के शासनकाल में न्यायपालिका की आलोचना करने वाले बाका को मतदान में 140 वोट मिले। उनकी नियुक्ति को लोकतांत्रिक सुधारों का संकेत माना जा रहा है।

बुडापेस्ट: हंगरी की संसद ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट प्रमुख और पूर्व न्यायाधीश आंद्रास बाका को देश का नया राष्ट्रपति चुन लिया है। बाका लंबे समय से पूर्व प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान की नीतियों और न्यायपालिका से जुड़े फैसलों के आलोचक रहे हैं। उन्हें मंगलवार को हुए संसदीय मतदान में 140 वोट मिले, जबकि छह सांसदों ने उनके खिलाफ मतदान किया। 73 वर्षीय बाका की नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब हंगरी की राजनीति में सत्ता परिवर्तन के बाद राज्य संस्थानों में सुधार और कानून के शासन को मजबूत करने की कोशिश चल रही है। प्रधानमंत्री पीटर मग्यार की प्रो-यूरोपीय सरकार ने ओर्बान के लंबे शासन के बाद संस्थागत बदलावों को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया है।

राष्ट्रपति का पद हंगरी में मुख्य रूप से संवैधानिक और औपचारिक भूमिका वाला माना जाता है, लेकिन बाका की नियुक्ति को देश में न्यायपालिका की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की बहाली के प्रतीक के तौर पर देखा जा रहा है।

140 सांसदों ने बाका के पक्ष में किया मतदान

हंगरी की संसद में प्रधानमंत्री पीटर मग्यार की तिस्जा पार्टी के पास दो-तिहाई बहुमत है। इसी पार्टी ने शनिवार को आंद्रास बाका को राष्ट्रपति पद के लिए नामित किया था।

संसदीय मतदान में बाका के पक्ष में 140 वोट पड़े, जबकि छह सांसदों ने उनका विरोध किया। पूर्व प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान की फिदेज पार्टी और उसकी सहयोगी केडीएनपी ने मतदान का बहिष्कार किया।

इन पार्टियों ने पूर्व राष्ट्रपति तामास शुल्योक को हटाए जाने की प्रक्रिया को अनुचित बताते हुए इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ करार दिया। विपक्षी दलों का आरोप है कि राष्ट्रपति पद में बदलाव की प्रक्रिया सत्ता परिवर्तन के बाद संस्थानों के पुनर्गठन की राजनीतिक कोशिश का हिस्सा है।

ओर्बान के शासनकाल में बाका को पद से हटाया गया था

आंद्रास बाका का नाम हंगरी की न्यायपालिका और यूरोपीय मानवाधिकार व्यवस्था से लंबे समय से जुड़ा रहा है। वह वर्ष 1991 से 2008 तक यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय यानी ECHR में न्यायाधीश रहे।

इसके बाद वर्ष 2009 में उन्हें हंगरी के सुप्रीम कोर्ट का प्रमुख नियुक्त किया गया। हालांकि, विक्टर ओर्बान की सरकार के दौरान न्यायाधीशों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति की उम्र घटाने के फैसले का विरोध करने के बाद बाका को अपने पद से हटा दिया गया।

ओर्बान सरकार ने न्यायाधीशों की अनिवार्य सेवानिवृत्ति की उम्र 70 वर्ष से घटाकर 62 वर्ष करने का फैसला किया था। बाका ने इस कदम की आलोचना की और इसे न्यायपालिका के खिलाफ कार्रवाई बताया था।

इसके बाद वर्ष 2012 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख पद से हटा दिया गया। यूरोपीय संघ और अमेरिका ने भी उस समय न्यायाधीशों की सेवानिवृत्ति उम्र घटाने के फैसले पर आपत्ति जताई थी।

यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय ने बाका के पक्ष में फैसला दिया

बाका ने अपने पद से हटाए जाने के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी। वर्ष 2016 में यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय ने फैसला दिया कि उनकी बर्खास्तगी ने उनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन किया था।

यह फैसला बाका के लिए व्यक्तिगत न्याय की जीत के साथ-साथ हंगरी में न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर चल रही बहस में भी महत्वपूर्ण माना गया। बाका ने उस समय न्यायपालिका पर सरकार के प्रभाव और न्यायिक स्वतंत्रता को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त की थीं।

अब राष्ट्रपति पद पर उनकी नियुक्ति को उनके पुराने संघर्ष की पृष्ठभूमि में भी देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, उनका राष्ट्रपति बनना हंगरी में कानून के शासन और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने के प्रयास का प्रतीकात्मक संदेश दे सकता है।

प्रधानमंत्री पीटर मग्यार ने बाका की तारीफ की

प्रधानमंत्री पीटर मग्यार ने आंद्रास बाका की उम्मीदवारी का समर्थन करते हुए उनके सार्वजनिक जीवन और न्यायिक अनुभव की सराहना की।

मग्यार के अनुसार बाका का जीवन लोकतांत्रिक कानून व्यवस्था और संवैधानिक सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्धता का उदाहरण है। उनका कहना है कि हंगरी को कानून के शासन और संवैधानिक व्यवस्था के रास्ते पर वापस ले जाने की जरूरत है।

मग्यार की सरकार ने सत्ता में आने के बाद संस्थागत सुधारों का वादा किया है। सरकार का दावा है कि ओर्बान के लंबे शासन के दौरान राज्य संस्थानों में राजनीतिक प्रभाव बढ़ा और अब लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है।

पूर्व राष्ट्रपति को हटाए जाने पर विवाद

बाका का राष्ट्रपति बनना हंगरी में राष्ट्रपति पद से जुड़े हालिया राजनीतिक विवाद के बीच हुआ है। इससे पहले तामास शुल्योक राष्ट्रपति थे। उन्हें ओर्बान के राजनीतिक सहयोगी के रूप में देखा जाता था।

संवैधानिक संशोधन के जरिए उनका कार्यकाल निर्धारित समय से पहले समाप्त कर दिया गया। यह बदलाव प्रधानमंत्री मग्यार की सुधार प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया।

हालांकि, मानवाधिकार संगठनों और आलोचकों ने इस कदम पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि राष्ट्रपति को हटाने के लिए जिस तरह संवैधानिक बदलाव किया गया, वह उसी तरह की राजनीतिक संस्थागत हस्तक्षेप की याद दिलाता है जिसकी आलोचना ओर्बान के शासन के दौरान की जाती रही थी।

ओर्बान की फिदेज पार्टी ने राष्ट्रपति को हटाने की प्रक्रिया को अत्याचारी और अवैध बताया तथा इसी वजह से बाका के चुनाव से जुड़े संसदीय मतदान का बहिष्कार किया।

बाका ने भी असाधारण संवैधानिक कदमों पर जताई चिंता

दिलचस्प बात यह है कि आंद्रास बाका ने पूर्व राष्ट्रपति तामास शुल्योक को हटाए जाने की प्रक्रिया की उसी तरह आलोचना नहीं की, जैसी आलोचना ओर्बान के शासनकाल में न्यायपालिका से जुड़े फैसलों की करते रहे थे।

हालांकि, उन्होंने पिछले महीने कहा था कि कानून के शासन वाले देश में इस तरह के असाधारण उपायों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ओर्बान के दौर में हंगरी एक ऐसे राज्य में बदल गया था, जहां राजनीतिक व्यवस्था पर मजबूत नियंत्रण कायम हो गया था।

बाका के अनुसार, उस समय कई संवैधानिक पदों पर नियुक्त लोगों की भूमिका सरकार की शक्ति पर नियंत्रण रखने के बजाय पुरानी राजनीतिक व्यवस्था के अस्तित्व को बनाए रखने से जुड़ी हुई थी।

नए राष्ट्रपति की भूमिका होगी अहम

विश्लेषकों का मानना है कि बाका की नियुक्ति का महत्व उनके संवैधानिक अधिकारों से अधिक उनके प्रतीकात्मक महत्व में है। वह ऐसे न्यायाधीश रहे हैं जिन्होंने न्यायपालिका की स्वतंत्रता और यूरोपीय कानूनी मानकों के मुद्दे पर सरकार का विरोध किया था।

सेंटर फॉर फेयर पॉलिटिकल एनालिसिस के विश्लेषक बुल्चू ज़िगा के अनुसार, बाका की नियुक्ति यह संकेत दे सकती है कि हंगरी में उदार लोकतंत्र और कानून के शासन की बहाली के प्रयास एक निर्धारित दिशा में आगे बढ़ेंगे।

उन्होंने बाका की नियुक्ति को इसलिए भी महत्वपूर्ण बताया क्योंकि बाका ने अपने पद से हटाए जाने के बाद यूरोपीय न्यायिक व्यवस्था के जरिए यह साबित किया था कि उनके साथ हुई कार्रवाई यूरोपीय मानकों के अनुरूप नहीं थी।

राष्ट्रपति पद पर बाका का कार्यकाल लंबा नहीं होगा

प्रधानमंत्री पीटर मग्यार ने संकेत दिया है कि आंद्रास बाका का कार्यकाल पूरा संवैधानिक कार्यकाल नहीं हो सकता। उनका राष्ट्रपति पद एक अंतरिम चरण के रूप में काम कर सकता है।

सरकार ओर्बान के दौर में लागू किए गए बेसिक लॉ यानी मौजूदा संविधान को बदलने की योजना पर भी काम कर रही है। इसके लिए व्यापक सार्वजनिक भागीदारी के साथ नया संविधान तैयार करने का प्रस्ताव है।

मग्यार ने अनुमान लगाया है कि नए संविधान को तैयार करने की प्रक्रिया में लगभग एक से डेढ़ वर्ष लग सकता है। सरकार अगले महीने से इस संबंध में सार्वजनिक परामर्श शुरू करने की तैयारी में है।

राष्ट्रपति पद के लिए पहले जुडित पोल्गर को दिया गया था प्रस्ताव

आंद्रास बाका से पहले प्रधानमंत्री मग्यार ने राष्ट्रपति पद के लिए प्रसिद्ध शतरंज खिलाड़ी जुडित पोल्गर को नामित करने की पेशकश की थी। हालांकि, पोल्गर ने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया।

उनका इनकार ऐसे समय में आया जब प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया में जनता से पर्याप्त सलाह नहीं लेने को लेकर आलोचना का सामना करना पड़ रहा था।

इसके बाद तिस्जा पार्टी ने बाका को उम्मीदवार बनाया। उनके लंबे न्यायिक अनुभव, यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय में कार्यकाल और ओर्बान सरकार के दौरान न्यायिक स्वतंत्रता को लेकर उनके रुख ने उनकी उम्मीदवारी को विशेष राजनीतिक महत्व दे दिया।

हंगरी की राजनीति में नए दौर का संकेत

आंद्रास बाका का राष्ट्रपति चुना जाना हंगरी की राजनीति में व्यापक बदलाव की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। 16 वर्षों तक विक्टर ओर्बान की राजनीति का देश की संस्थाओं पर व्यापक प्रभाव रहा। अब प्रधानमंत्री पीटर मग्यार की सरकार राज्य संस्थानों में सुधार और यूरोपीय मूल्यों के अनुरूप कानून के शासन को मजबूत करने का दावा कर रही है।

हालांकि, आगे की राह आसान नहीं होगी। संवैधानिक बदलाव, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, राष्ट्रपति पद की भूमिका और पुराने संस्थागत ढांचे में सुधार जैसे मुद्दे आने वाले समय में हंगरी की राजनीति के केंद्र में रहेंगे।

ऐसे में आंद्रास बाका की नियुक्ति केवल एक नए राष्ट्रपति का चुनाव नहीं है, बल्कि इसे हंगरी की न्यायिक और संवैधानिक व्यवस्था में बदलाव के व्यापक राजनीतिक प्रयास के प्रतीक के रूप में भी देखा जा रहा है।

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