ICAR दाखिले में 6 लाख रुपये की बाधा, कांग्रेस-BJP नेताओं ने मिलकर छात्रा की मदद की

कर्नाटक: बेंगलुरु की छात्रा का ICAR दाखिला दस्तावेजी समस्या से अटक गया था। 6 लाख रुपये की फीस के संकट के बीच कांग्रेस और BJP नेताओं ने मिलकर समस्या सुलझाई।

बेंगलुरु की छात्रा का ICAR दाखिला ऑनलाइन दस्तावेज समस्या के कारण अटक गया था। करीब 6 लाख रुपये की आर्थिक बाधा के बीच मंत्री बालकृष्ण, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या और केंद्रीय मंत्री वी सोमन्ना ने हस्तक्षेप कर समस्या सुलझाने में मदद की।

बेंगलुरु: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में एक छात्रा का कृषि शिक्षा में दाखिला तकनीकी और दस्तावेजी समस्या के कारण मुश्किल में पड़ गया था। ICAR के ऑनलाइन पोर्टल पर जरूरी दस्तावेज अपलोड नहीं होने के चलते परिवार के सामने करीब 6 लाख रुपये की अतिरिक्त फीस भरने की स्थिति बन रही थी। मामला सामने आने के बाद कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने मिलकर हस्तक्षेप किया और छात्रा के दाखिले की समस्या का समाधान कराने में मदद की।

ऑनलाइन दस्तावेज अपलोड नहीं होने से बढ़ी परेशानी

दसरहल्ली की रहने वाली छात्रा कृषि क्षेत्र में उच्च शिक्षा हासिल करना चाहती थी। उसका दाखिला भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद यानी ICAR से जुड़े प्रवेश प्रक्रिया के तहत कृषि पाठ्यक्रम में होना था। उसे बागलकोट स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज में प्रवेश मिलने की प्रक्रिया आगे बढ़ानी थी। हालांकि, ICAR के प्रवेश पोर्टल पर भारतीय निवासी होने की पुष्टि से जुड़ा एक ऑनलाइन दस्तावेज जमा करना जरूरी था। 

छात्रा तकनीकी समस्या के कारण यह दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड नहीं कर सकी। इसके चलते उसका दाखिला अटक गया। परिवार के लिए यह समस्या इसलिए भी गंभीर थी क्योंकि दस्तावेज संबंधी परेशानी दूर नहीं होने पर उन्हें लगभग 6 लाख रुपये की फीस का अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ सकता था।

परिवार ने मंत्री से लगाई मदद की गुहार

दाखिले की समस्या को लेकर छात्रा अपने माता-पिता के साथ कर्नाटक के मंत्री बालकृष्ण के पास पहुंची। परिवार ने उन्हें पूरी स्थिति बताई और बताया कि ऑनलाइन दस्तावेज जमा नहीं होने की वजह से छात्रा की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।

मामले को सुनने के बाद मंत्री ने केवल आश्वासन देने के बजाय खुद इस मुद्दे को आगे बढ़ाने का फैसला किया। चूंकि मामला केंद्र सरकार से जुड़े संस्थान और प्रवेश प्रक्रिया से संबंधित था, इसलिए उन्होंने संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश शुरू की। मंत्री ने छात्रा और उसके पिता को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के आधिकारिक आवास ‘कृष्णा’ भी ले जाकर मामले की जानकारी मुख्यमंत्री के सामने रखी।

मुख्यमंत्री तक पहुंचा मामला

बालकृष्ण ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को छात्रा की परेशानी से अवगत कराया। इसके बाद संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा कर यह पता लगाने की कोशिश की गई कि तकनीकी और दस्तावेजी समस्या का समाधान किस तरह किया जा सकता है।

मामला केवल राज्य स्तर तक सीमित नहीं था, इसलिए मंत्री ने केंद्र से जुड़े प्रतिनिधियों और नेताओं से भी संपर्क किया। इसी क्रम में उन्होंने बेंगलुरु दक्षिण से भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या से संपर्क किया और उन्हें छात्रा की स्थिति के बारे में बताया। इस तरह एक छात्रा की शिक्षा से जुड़ी समस्या को हल करने के लिए अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं के बीच समन्वय शुरू हुआ।

भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने भी की पहल

मंत्री बालकृष्ण ने तेजस्वी सूर्या से छात्रा की समस्या पर हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया। इसके बाद सूर्या के दिल्ली कार्यालय को छात्रा और उसके परिवार के साथ समन्वय करने तथा संबंधित अधिकारियों तक मामला पहुंचाने के लिए कहा गया।

छात्रा के परिवार की आर्थिक स्थिति के बारे में भी मंत्री ने जानकारी ली। बताया गया कि छात्रा के पिता ऑटो रिक्शा चलाकर परिवार का खर्च चलाते हैं। ऐसे में 6 लाख रुपये की अतिरिक्त आर्थिक जिम्मेदारी परिवार के लिए बेहद कठिन होती। इसी आर्थिक स्थिति को देखते हुए मामले को जल्द सुलझाना परिवार के लिए बेहद जरूरी था।

छात्रा और पिता को दिल्ली भेजने की व्यवस्था

मामले को आगे बढ़ाने के लिए मंत्री बालकृष्ण ने छात्रा और उसके पिता के दिल्ली जाने की व्यवस्था भी की। दोनों के लिए हवाई टिकट की व्यवस्था की गई और दिल्ली में ठहरने का इंतजाम भी कराया गया, ताकि वे संबंधित अधिकारियों से सीधे संपर्क कर सकें।

यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि प्रवेश से जुड़ी समस्या केंद्र सरकार से संबंधित संस्थान और उसके ऑनलाइन सिस्टम से जुड़ी थी। छात्रा और उसके पिता को अधिकारियों के सामने अपनी स्थिति स्पष्ट करने का अवसर मिला। मंत्री ने अगले दिन भी छात्रा से संपर्क कर यह जानकारी ली कि वह संबंधित अधिकारियों से मिली या नहीं और मामले में कितनी प्रगति हुई है।

केंद्रीय मंत्री वी सोमन्ना से भी मांगी मदद

मामले को सुलझाने के प्रयास में केंद्रीय मंत्री वी सोमन्ना को भी छात्रा की स्थिति से अवगत कराया गया। बालकृष्ण ने उनसे हस्तक्षेप करने और छात्रा के दाखिले से जुड़ी तकनीकी समस्या को दूर कराने में सहयोग मांगा।

राज्य सरकार के स्तर पर प्रयास, भाजपा सांसद के कार्यालय का समन्वय और केंद्रीय स्तर पर हस्तक्षेप के बाद मामले का समाधान निकालने में सफलता मिली।
 इसके बाद छात्रा के लिए कृषि शिक्षा जारी रखने का रास्ता साफ हो गया और परिवार पर संभावित 6 लाख रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी टल गया।

शिक्षा के लिए साथ आए अलग-अलग दलों के नेता

इस पूरे घटनाक्रम की सबसे खास बात यह रही कि छात्रा की मदद के लिए कांग्रेस और भाजपा से जुड़े नेताओं ने एक साथ प्रयास किया। एक तरफ राज्य सरकार से जुड़े मंत्री और मुख्यमंत्री ने मामले को आगे बढ़ाया, वहीं भाजपा सांसद और केंद्रीय मंत्री ने भी संबंधित स्तर पर हस्तक्षेप किया। राजनीतिक मतभेदों के बीच छात्रा की शिक्षा से जुड़े मामले में दोनों दलों के नेताओं के बीच हुआ यह समन्वय चर्चा का विषय बना है। पूरे मामले में राजनीतिक विवाद से ज्यादा छात्रा की पढ़ाई को प्राथमिकता दी गई।

तकनीकी समस्या से बची छात्रा की पढ़ाई

ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया में एक दस्तावेज अपलोड न हो पाने जैसी तकनीकी समस्या छात्रा के लिए बड़ी बाधा बन गई थी। अगर इसका समय पर समाधान नहीं होता तो उसका दाखिला प्रभावित हो सकता था और परिवार को भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ सकता था। मामले में हस्तक्षेप के बाद अब छात्रा अपनी कृषि शिक्षा जारी रख सकेगी। इस घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि डिजिटल प्रवेश प्रक्रियाओं में तकनीकी समस्या आने पर छात्रों और उनके परिवारों को किस तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

प्रशासनिक प्रक्रियाओं को आसान बनाने की जरूरत

छात्रा के मामले ने उच्च शिक्षा में ऑनलाइन प्रवेश प्रणाली से जुड़ी चुनौतियों पर भी ध्यान खींचा है। दस्तावेज अपलोड करने में छोटी सी तकनीकी परेशानी कई बार छात्रों के भविष्य पर असर डाल सकती है। विशेषज्ञों के स्तर पर लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि ऑनलाइन प्रवेश पोर्टल पर तकनीकी सहायता की व्यवस्था मजबूत हो और छात्रों को समय रहते वैकल्पिक माध्यम उपलब्ध कराया जाए। इससे ऐसी परिस्थितियों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा।

बेंगलुरु की इस घटना में राजनीतिक नेताओं के समन्वित प्रयासों से छात्रा का दाखिला बच गया। अब छात्रा के लिए कृषि क्षेत्र में उच्च शिक्षा हासिल करने का रास्ता खुल गया है।

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