शेयर बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। ICICI Bank ने 10 ट्रिलियन रुपये का मार्केट कैप पार कर TCS को पीछे छोड़ दिया है, जबकि आईटी सेक्टर में दबाव के कारण TCS की बाजार वैल्यू लगातार घट रही है।
TCS Share: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी Tata Consultancy Services यानी TCS की मार्केट कैप में लगातार गिरावट जारी रही, जबकि ICICI Bank ने पहली बार 10 ट्रिलियन रुपये का आंकड़ा पार कर लिया। इस बदलाव के साथ ही ICICI Bank ने TCS को पीछे छोड़ते हुए मार्केट कैप के मामले में अहम बढ़त हासिल कर ली।
यह पहली बार है जब जून 2009 के बाद ICICI Bank की बाजार वैल्यू TCS से ज्यादा हुई है। इस घटनाक्रम ने निवेशकों का ध्यान बैंकिंग सेक्टर की मजबूती और आईटी सेक्टर में चल रहे दबाव की ओर खींचा है।
ICICI Bank ने रचा इतिहास
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे ICICI Bank का मार्केट कैप बढ़कर 10.18 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच गया। यह बैंक के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।
ICICI Bank के शेयरों में लगातार खरीदारी देखने को मिल रही है। गुरुवार को बैंक का शेयर 1,428 रुपये तक पहुंच गया, जो इस साल 16 जनवरी के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। मजबूत बैलेंस शीट, बेहतर एसेट क्वालिटी और स्थिर ग्रोथ आउटलुक के चलते निवेशकों का भरोसा बैंक पर बना हुआ है।
TCS की मार्केट कैप में लगातार गिरावट
दूसरी ओर Tata Consultancy Services के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। TCS की मार्केट कैप घटकर 10.02 ट्रिलियन रुपये रह गई। गुरुवार को कंपनी के शेयर 2,766 रुपये तक फिसल गए, जो दिसंबर 2020 के बाद का सबसे निचला स्तर है।
आईटी सेक्टर में कमजोरी और AI से जुड़ी अनिश्चितताओं का असर TCS के शेयरों पर साफ नजर आ रहा है। निवेशक फिलहाल आईटी कंपनियों में नए दांव लगाने से बचते दिख रहे हैं।
बाजार का समग्र माहौल
गुरुवार को शेयर बाजार का मूड कमजोर रहा। Nifty50 इंडेक्स में 0.5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई। आईटी शेयरों में भारी बिकवाली और वैश्विक संकेतों की अनिश्चितता ने बाजार पर दबाव बनाए रखा।
हालांकि बैंकिंग शेयरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया, जिससे बाजार को कुछ हद तक सहारा मिला।
मार्केट कैप में शीर्ष कंपनियां
मार्केट कैप के लिहाज से Reliance Industries अब भी पहले स्थान पर बनी हुई है। रिलायंस की बाजार वैल्यू करीब 19.71 ट्रिलियन रुपये रही। HDFC Bank दूसरे स्थान पर है, जिसकी मार्केट कैप 14.19 ट्रिलियन रुपये के आसपास है। वहीं Bharti Airtel तीसरे स्थान पर बनी हुई है, जिसकी मार्केट वैल्यू 11.51 ट्रिलियन रुपये आंकी गई है।
इन आंकड़ों से साफ है कि बैंकिंग और टेलीकॉम सेक्टर में निवेशकों का भरोसा मजबूत बना हुआ है।
आईटी कंपनियों पर AI का दबाव
TCS सहित अन्य प्रमुख आईटी कंपनियों की मार्केट कैप में गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह AI से जुड़ी चिंताएं मानी जा रही हैं। वैश्विक स्तर पर टेक शेयरों पर दबाव बढ़ा है और निवेशक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बदलते परिदृश्य को लेकर सतर्क हो गए हैं।
इस हफ्ते निवेशकों की बेचैनी उस समय और बढ़ गई जब AI स्टार्टअप Anthropic ने इन-हाउस लॉयर्स के लिए नया productivity tool लॉन्च किया। इससे यह आशंका बढ़ गई कि AI आधारित समाधान सॉफ्टवेयर और आईटी सेवाओं की मांग को प्रभावित कर सकते हैं।
Nifty IT इंडेक्स में बड़ी गिरावट
गुरुवार को Nifty IT इंडेक्स में करीब 5 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई। साल की शुरुआत से अब तक यह इंडेक्स 11.7 प्रतिशत टूट चुका है और अप्रैल के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।
आईटी सेक्टर में जारी कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। कई बड़े आईटी शेयर इस साल दोहरे अंकों में गिरावट दर्ज कर चुके हैं।
किन कंपनियों में सबसे ज्यादा गिरावट
सालाना आधार पर Wipro सबसे ज्यादा दबाव में रही है, जिसके शेयर करीब 16.8 प्रतिशत गिर चुके हैं। इसके बाद Coforge में 14 प्रतिशत, LTIMindtree में 13.8 प्रतिशत और TCS में 13.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
इन आंकड़ों से साफ है कि आईटी सेक्टर में दबाव केवल एक या दो कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सेक्टर पर इसका असर पड़ा है।
आगे क्या कहते हैं विश्लेषक
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले 3 से 6 महीनों तक AI-native partnerships पर बाजार की कड़ी नजर बनी रहेगी। मोतीलाल ओसवाल के विशेषज्ञों के अनुसार, यह साझेदारियां अगले 12 से 14 महीनों में आईटी सेवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर सकती हैं।
उनका कहना है कि 2026 के मध्य तक छोटे चक्र वाले AI से जुड़े deals में तेजी देखने को मिल सकती है, जिससे आईटी कंपनियों के लिए ग्रोथ के नए रास्ते खुल सकते हैं।
वैश्विक सॉफ्टवेयर कंपनियों पर भी असर
AI को लेकर बढ़ती चिंताओं का असर सिर्फ भारतीय कंपनियों तक सीमित नहीं है। वैश्विक सॉफ्टवेयर कंपनियों जैसे Salesforce सहित कई एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर फर्मों में भी भारी बिकवाली देखने को मिली है।
बाजार को लग रहा है कि AI आधारित बदलाव को तेजी से अपनाया जाएगा, जिससे पारंपरिक सॉफ्टवेयर मॉडल पर असर पड़ सकता है।
आईटी सेवाओं की भूमिका बनी रहेगी
ICICI की एक रिपोर्ट के मुताबिक AI workspace जैसे Claude Cowork एजेंट-आधारित automation की दिशा में बदलाव का संकेत देते हैं। हालांकि बड़ी कंपनियों को अभी भी data modernization, system orchestration और governance जैसे बड़े स्तर के integration की जरूरत है। यही वे क्षेत्र हैं जहां आईटी सेवाओं की भूमिका आगे भी अहम बनी रह सकती है।
TCS के तिमाही नतीजों का असर
दिसंबर तिमाही में TCS का शुद्ध मुनाफा घटकर 10,657 करोड़ रुपये रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी का मुनाफा 12,380 करोड़ रुपये था। तिमाही आधार पर मुनाफे में 11.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि कंपनी की revenue growth ब्लूमबर्ग के अनुमानों से बेहतर रही, लेकिन मुनाफा उम्मीद से कमजोर रहा।









