IFR 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु करेंगी अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू का निरीक्षण, 70 से अधिक युद्धपोत होंगे शामिल

द्रौपदी मुर्मु अंतरराष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू (IFR) 2026 का निरीक्षण करेंगी, जिसमें दुनिया भर के 70 से अधिक युद्धपोत शामिल होंगे। जानें इस महत्वपूर्ण सैन्य

द्रौपदी मुर्मु मंगलवार को दो दिन के दौरे पर विशाखापत्तनम पहुंचेंगी। वे यहां आयोजित होने जा रहे इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (आईएफआर) में शामिल होंगी। राष्ट्रपति भारत की सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर होती हैं, इसलिए वे इस कार्यक्रम का औपचारिक निरीक्षण करेंगी।

नई दिल्ली: Droupadi Murmu आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में आयोजित होने जा रहे International Fleet Review (IFR 2026) में हिस्सा लेंगी। दो दिवसीय दौरे के दौरान राष्ट्रपति, जो भारत की सशस्त्र सेनाओं की सर्वोच्च कमांडर हैं, भारत और मित्र देशों के 70 से अधिक युद्धपोतों, पनडुब्बियों और नौसैनिक विमानों के विशाल बेड़े का औपचारिक निरीक्षण करेंगी। यह आयोजन हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री शक्ति, रणनीतिक सहयोग और कूटनीतिक मित्रता का महत्वपूर्ण प्रदर्शन माना जा रहा है।

विशाखापत्तनम में भव्य आयोजन

आईएफआर 2026 की शुरुआत राष्ट्रपति बैंक्वेट से होगी, जिसके बाद अगले दिन समुद्र में निर्धारित क्षेत्र में फ्लीट रिव्यू आयोजित किया जाएगा। इस दौरान राष्ट्रपति भारतीय नौसेना और मित्र देशों के जहाजों का निरीक्षण करेंगी। कार्यक्रम में आंध्र प्रदेश के राज्यपाल S. Abdul Nazeer और मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu भी उपस्थित रहेंगे।

भारतीय नौसेना के अनुसार, यह आयोजन केवल सैन्य क्षमता का प्रदर्शन नहीं, बल्कि वैश्विक समुद्री साझेदारी और क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

आईएनएस विक्रांत रहेगा मुख्य आकर्षण

इस बार के फ्लीट रिव्यू में स्वदेश निर्मित विमानवाहक पोत INS Vikrant विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। यह भारत की समुद्री आत्मनिर्भरता और रक्षा उत्पादन क्षमता का प्रतीक है। आईएनएस विक्रांत ने हाल के अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इसे भारतीय नौसेना की रणनीतिक शक्ति का प्रमुख स्तंभ माना जाता है। मित्र देशों की नौसेनाएं इस स्वदेशी विमानवाहक पोत को नजदीक से देखने और इसकी तकनीकी क्षमता को समझने का अवसर प्राप्त करेंगी।

भारत इससे पहले 2001 में मुंबई और 2016 में विशाखापत्तनम में आईएफआर का आयोजन कर चुका है। 2016 के संस्करण में 50 से अधिक देशों के लगभग 100 युद्धपोतों ने भाग लिया था, जो उस समय का सबसे बड़ा समुद्री जमावड़ा था। आईएफआर 2026 के जरिए भारत हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी बढ़ती भूमिका और समुद्री सुरक्षा में नेतृत्व को प्रदर्शित कर रहा है। यह आयोजन ‘सुरक्षित समुद्र, साझा समृद्धि’ की अवधारणा को भी सशक्त करता है।

मिलन 2026: बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास

आईएफआर के साथ-साथ विशाखापत्तनम में भारतीय नौसेना का प्रमुख बहुपक्षीय अभ्यास MILAN 2026 (मिलन 26) भी आयोजित किया जा रहा है। यह इसका 13वां संस्करण है, जिसमें 135 से अधिक देशों को आमंत्रित किया गया है। पूर्वी नौसैनिक कमान के नेतृत्व में बंगाल की खाड़ी में आयोजित यह अभ्यास मित्र देशों की नौसेनाओं के बीच पेशेवर तालमेल, रणनीतिक समझ और संयुक्त अभियानों की क्षमता को मजबूत करेगा।

मिलन अभ्यास का उद्देश्य साझा समुद्री चुनौतियों—जैसे समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता और आपदा राहत—से निपटने के लिए सहयोग को बढ़ावा देना है।विशाखापत्तनम में इसी दौरान Indian Ocean Naval Symposium (IONS) सम्मेलन भी आयोजित किया जा रहा है। यह मंच हिंद महासागर क्षेत्र की नौसेनाओं के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा देता है।

यह पहली बार है जब भारत एक साथ तीन बड़े समुद्री आयोजनों—आईएफआर, मिलन और IONS—की मेजबानी कर रहा है। इससे भारत की समुद्री कूटनीति और वैश्विक रणनीतिक भूमिका को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

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