पश्चिम एशिया में युद्ध आज 30वें दिन में है। इजरायल ने ईरान और लेबनान में हमले तेज किए हैं। अमेरिका बातचीत पर जोर दे रहा है, जबकि ईरान जमीनी हमले का जवाब देने को तैयार है, तनाव बढ़ता जा रहा है।
Isreal-Iran War: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध आज अपने 30वें दिन में प्रवेश कर गया है। अभी तक इस संघर्ष का कोई समाधान नहीं निकल पाया है। अमेरिका ईरान को बातचीत के लिए राजी करने में लगा हुआ है, वहीं इजरायल लगातार हमलों में सक्रिय है। दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है और स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है।
इजरायल ने ईरान को दी चेतावनी
इजरायल ने ईरान के उच्च प्राथमिकता वाले ठिकानों पर हमले की चेतावनी दी है। इसमें ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल उत्पादन केंद्र और परमाणु कमांड व कंट्रोल सेंटर शामिल हैं। इजरायल का दावा है कि ये ठिकाने उसकी सुरक्षा के लिए सबसे अहम हैं और इन पर हमले की योजना जल्द ही अमल में लाई जाएगी। इजरायल डिफेंस फोर्स के प्रवक्ता नादव शोशानी के अनुसार, ठिकानों को अलग-अलग ग्रुप में बांटा गया है। हर ग्रुप के भीतर अलग-अलग कैटेगरी हैं – जरूरी, अहम और अतिरिक्त।
लेबनान में भी हमले

सिर्फ ईरान ही नहीं, इजरायल ने साउथ लेबनान में भी हमले किए हैं। हाल ही में एक एंबुलेंस पर हमला हुआ, जिसमें एक पैरामेडिक और उसका मरीज मारे गए। इजरायल का दावा है कि हिज्बुल्लाह ऑपरेशन के लिए एंबुलेंस कर्मियों का इस्तेमाल ढाल के रूप में किया जाता है। लेबनान ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद अब तक लगभग 47 लोग मारे जा चुके हैं।
अमेरिका का भी दबाव
इजरायल के हमलों के बीच अमेरिका ने भी ईरान में संभावित जमीनी हमले की धमकी दी है। ईरान ने साफ किया है कि वह किसी भी जमीनी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कलीबाफ़ ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह संभावित बातचीत का संदेश भेजते हुए गुपचुप तरीके से अपनी जमीनी सेना भेजने की योजना बना रहा है।
युद्ध के कारण क्षेत्रीय तनाव
पश्चिम एशिया में जारी इस संघर्ष ने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। सभी देशों की अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं और सामान्य नागरिक भी इस हिंसा से सुरक्षित नहीं हैं। तेल और ऊर्जा के बाजार पर भी इसके नकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही कोई राजनीतिक समाधान नहीं निकला तो युद्ध और लंबा खिंच सकता है।








