इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहुल गांधी के बयान पर एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने मामले में पर्याप्त आधार न पाते हुए इसे मेरिटहीन बताया और निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा।
Prayagraj: Allahabad High Court ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi के बयान को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने मामले में पर्याप्त आधार न पाते हुए इसे कमजोर बताया और निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया। यह याचिका ‘इंडियन स्टेट’ संबंधी बयान को लेकर दायर की गई थी, जिसे कोर्ट ने सुनवाई के बाद निरस्त कर दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहुल गांधी के खिलाफ FIR की मांग वाली याचिका खारिज की

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान की एकल पीठ ने मामले में मेरिट की कमी पाते हुए यह फैसला सुनाया।
यह याचिका सिमरन गुप्ता द्वारा दायर की गई थी, जिसमें संभल जिले की चंदौसी अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट ने पूर्व में आदेश सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाते हुए याचिका को निरस्त कर दिया गया।
‘इंडियन स्टेट’ वाले बयान को लेकर विवाद
मामला उस बयान से जुड़ा है, जो राहुल गांधी ने पिछले वर्ष कांग्रेस मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ के उद्घाटन के दौरान दिया था। उन्होंने भाजपा और आरएसएस के साथ-साथ ‘इंडियन स्टेट’ से लड़ने की बात कही थी और संस्थानों की निष्पक्षता व मीडिया की स्वतंत्रता पर भी सवाल उठाए थे।
याची का आरोप था कि यह बयान देश की संप्रभुता के खिलाफ है और इसके आधार पर राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जानी चाहिए। हालांकि अदालत ने इस तर्क को पर्याप्त आधार नहीं माना।
निचली अदालतों में भी खारिज हो चुका था मामला
इस मामले की शुरुआत संभल की एमपी/एमएलए कोर्ट में प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग से हुई थी, जिसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने क्षेत्राधिकार के आधार पर खारिज कर दिया था। इसके बाद जिला जज की अदालत में पुनरीक्षण याचिका दायर की गई।
बाद में चंदौसी की अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने भी मामले को कमजोर बताते हुए नवंबर 2025 में याचिका खारिज कर दी थी। इसी आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया था।
हाईकोर्ट के फैसले का प्रभाव
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब राहुल गांधी के खिलाफ इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग पर कानूनी प्रक्रिया समाप्त हो गई है। अदालत के निर्णय से स्पष्ट हो गया है कि प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर आपराधिक मामला बनता नहीं है।
यह फैसला राजनीतिक बयानों से जुड़े मामलों में न्यायिक दृष्टिकोण को भी रेखांकित करता है, जहां अदालत तथ्यों और कानूनी आधार की मजबूती को प्राथमिकता देती है।











