PM मोदी से मुलाकात के 8 दिन बाद असगर अली वोहरा को जमीन विवाद में राहत, नरेंद्र मेहता की कंपनी ने परमिट सरेंडर किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के 8 दिन बाद असगर अली वोहरा को जमीन विवाद में राहत मिली। सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन ने निर्माण परमिट सरेंडर करने की मांग की।

महाराष्ट्र के मीरा रोड निवासी 81 वर्षीय असगर अली वोहरा को लंबे समय से चले आ रहे जमीन विवाद में राहत मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 8 सितंबर को मुलाकात के बाद सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन ने विवादित प्लॉट की निर्माण अनुमति सरेंडर करने की प्रक्रिया शुरू की है।

मुंबई: महाराष्ट्र के मीरा रोड में 81 वर्षीय असगर अली वोहरा को लंबे समय से चले आ रहे जमीन विवाद में बड़ी राहत मिली है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से 8 सितंबर को मुलाकात के बाद विवादित प्लॉट से जुड़ी कंपनी ने निर्माण अनुमति सरेंडर करने की प्रक्रिया शुरू की है।

15 साल से जमीन विवाद को लेकर सरकारी दफ्तरों के चक्कर

मीरा रोड निवासी असगर अली वोहरा का जमीन विवाद करीब 15 साल से चला आ रहा है। वोहरा का दावा है कि उन्होंने 1989 में भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके में करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन खरीदी थी। उनका आरोप है कि बाद में उनकी जानकारी के बिना जमीन से जुड़े फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और संपत्ति को दो हिस्सों में बांट दिया गया।

वोहरा ने इस मामले में स्वयम बिल्डर्स और सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस का नाम लिया है। उनका आरोप रहा है कि इन कंपनियों से जमीन का विवाद जुड़ा है। सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन की वेबसाइट पर नरेंद्र मेहता को कंपनी के संस्थापक और 711 ग्रुप का प्रमुख बताया गया है।

विवाद को लेकर पहले भी पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर शिकायतें की गई थीं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस मामले में 2015 में एफआईआर भी दर्ज हुई थी। हालांकि, जमीन के मालिकाना हक और दस्तावेजों से जुड़े दावे पर अंतिम कानूनी स्थिति को अदालत और संबंधित जांच प्रक्रियाओं के संदर्भ में देखा जाना है।

8 सितंबर को PM मोदी से मिले थे असगर अली वोहरा

वोहरा ने 8 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। उन्होंने जमीन विवाद में हस्तक्षेप की मांग करने के साथ मामले की CBI जांच की मांग भी रखी थी। वोहरा का कहना है कि वह और प्रधानमंत्री मोदी गुजरात के वडनगर स्थित B.N. स्कूल में साथ पढ़ते थे। उनकी मुलाकात की तस्वीरें भी सामने आई थीं।

वोहरा ने प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान लंबे समय से चल रहे जमीन विवाद और कथित फर्जी दस्तावेजों का मुद्दा उठाया था। इस मुलाकात के बाद मामले में प्रशासनिक स्तर पर गतिविधियां तेज होने की जानकारी सामने आई।

मीरा-भायंदर नगर निगम ने कंपनियों को बुलाया

मामले में आगे की कार्रवाई के तहत मीरा-भायंदर नगर निगम (MBMC) ने संबंधित कंपनियों के प्रबंधन को 16 सितंबर को अपना पक्ष रखने और मामले पर स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया था।

इससे पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी श्रीकर परदेशी ने मंत्रालय में बैठक बुलाई। बैठक में असगर अली वोहरा, भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता, मीरा-भायंदर नगर निगम आयुक्त राधा बिनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे सहित संबंधित पक्ष मौजूद रहे।

यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब जमीन के स्वामित्व और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर विवाद लंबे समय से प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर चल रहा है।

सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन ने निर्माण अनुमति लौटाने की मांग की

बैठक के बाद सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने विवादित प्लॉट से पीछे हटने की प्रक्रिया शुरू की। कंपनी ने मीरा-भायंदर नगर निगम के असिस्टेंट डायरेक्टर ऑफ टाउन प्लानिंग को पत्र देकर प्लॉट से संबंधित कमेंसमेंट सर्टिफिकेट (Construction Permission) सरेंडर करने की जानकारी दी।

कंपनी के दस्तावेजों के मुताबिक, उसने 13 जून 2019 को रजिस्टर्ड डीड के माध्यम से प्लॉट खरीदा था और 17 अप्रैल 2026 को निर्माण की अनुमति हासिल की थी। बाद में जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद सामने आने के बाद कंपनी ने निर्माण अनुमति वापस करने का फैसला लिया।

कंपनी ने नगर निगम से निर्माण परमिट रद्द करने के साथ परियोजना के लिए जमा की गई फीस वापस करने का अनुरोध भी किया है।

नरेंद्र मेहता ने भी पुरानी शिकायत वापस ली

विवाद में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने पुलिस कमिश्नर को पत्र भेजकर असगर अली वोहरा और उनके सहयोगी अजय ढोका के खिलाफ पहले की गई शिकायत वापस लेने की बात कही।

मेहता के मुताबिक, दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है। संबंधित अधिकारियों को शिकायत वापस लेने से जुड़े दस्तावेज सौंपे गए हैं।

रिपोर्टों के अनुसार, 2015 की शिकायत में वोहरा और ढोका पर अतिक्रमण और धमकी से जुड़े आरोप लगाए गए थे। अब मेहता की ओर से शिकायत वापस लेने की प्रक्रिया इस विवाद में एक नया घटनाक्रम है।

जमीन के मालिकाना हक पर क्या स्थिति है?

इस मामले में यह महत्वपूर्ण है कि जमीन पर अंतिम मालिकाना हक का प्रश्न और संबंधित कानूनी विवाद अलग विषय हैं। हालिया घटनाक्रम में निर्माण अनुमति सरेंडर करने और पुलिस शिकायत वापस लेने की प्रक्रिया सामने आई है, लेकिन इससे अपने-आप अदालत या सक्षम प्राधिकरण द्वारा अंतिम स्वामित्व का निर्धारण नहीं माना जा सकता।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 में एक सिविल कोर्ट के फैसले में वोहरा के कुछ अधिकारों को बरकरार रखा गया था, लेकिन उन्हें पूरी जमीन का मालिक घोषित नहीं किया गया था। रिपोर्ट में कथित दस्तावेजी गड़बड़ियों और CID की जांच का भी उल्लेख है।

इसलिए जमीन के स्वामित्व, पुराने दस्तावेजों और कथित फर्जीवाड़े से जुड़े सभी दावों को अंतिम कानूनी निर्णय आने तक संबंधित पक्षों के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

PM मोदी से मुलाकात के बाद बदला घटनाक्रम

8 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद कुछ ही दिनों में मामले में प्रशासनिक और व्यावसायिक स्तर पर कई कदम सामने आए। विवादित प्लॉट से जुड़ी निर्माण अनुमति वापस करने की कंपनी की पहल और नरेंद्र मेहता की ओर से पुरानी शिकायत वापस लेने की प्रक्रिया ने मामले को नया मोड़ दिया है।

असगर अली वोहरा लंबे समय से अपनी जमीन को लेकर कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर लड़ाई लड़ रहे हैं। अब निर्माण अनुमति सरेंडर किए जाने और दोनों पक्षों के बीच समझौते की बात सामने आने के बाद विवाद के समाधान की दिशा में आगे की प्रक्रिया पर नजर रहेगी।

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