कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस सांसद कीर्ति आजाद को कथित वसूली मामले में फिलहाल गिरफ्तारी समेत पुलिस की दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम राहत दी है। अदालत ने उन्हें CID जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया और जरूरत पड़ने पर पूछताछ के लिए बुलाने की अनुमति दी।
कोलकाता: कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लोकसभा सांसद और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद को कथित वसूली के एक मामले में अंतरिम राहत दी है। अदालत ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी समेत पुलिस की किसी भी जबरदस्ती की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। हालांकि, यह राहत इस शर्त के साथ दी गई है कि आजाद पश्चिम बंगाल पुलिस की आपराधिक जांच विभाग (CID) द्वारा की जा रही जांच में पूरा सहयोग करेंगे। न्यायमूर्ति कौशिक चंदा की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जांच के दौरान आवश्यकता पड़ने पर CID आजाद को पूछताछ के लिए बुला सकती है। इसके लिए एजेंसी को उन्हें कम से कम सात दिन पहले नोटिस देना होगा। यह मामला कथित तौर पर एक कारोबारी से 15 लाख रुपये की मांग और धमकी से जुड़ा है। आजाद ने आरोपों से इनकार किया है और इसे उन्हें बदनाम करने की साजिश बताया है।
22 सितंबर को पूछताछ के लिए बुला सकती है CID
अदालत में सुनवाई के दौरान CID की ओर से पेश वकील ने बताया कि एजेंसी ने कीर्ति आजाद को पूछताछ के लिए 22 सितंबर को अपने मुख्यालय भवानी भवन बुलाया है। भवानी भवन दक्षिण कोलकाता में स्थित है।
हाईकोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम सुरक्षा के बावजूद आजाद को जांच में सहयोग करना होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ने पर CID निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें पूछताछ के लिए बुला सकती है।
इसका अर्थ है कि फिलहाल सांसद को गिरफ्तार किए जाने से अंतरिम सुरक्षा मिली हुई है, लेकिन जांच एजेंसी की पूछताछ की प्रक्रिया जारी रहेगी।
कारोबारी ने लगाए 15 लाख रुपये मांगने के आरोप
मामले की शिकायत के अनुसार, एक कारोबारी को पिछले साल 21 मई को दुर्गापुर स्थित कीर्ति आजाद के बंगले पर बुलाया गया था। आरोप है कि आजाद के एक सहयोगी ने कारोबारी से 15 लाख रुपये की मांग की।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि रकम नहीं देने पर उसके कुकिंग गैस कारोबार को बंद कराने की धमकी दी गई। कारोबारी ने यह भी दावा किया कि कथित घटना की बातचीत ऑडियो में रिकॉर्ड की गई थी।
इसके बाद पुलिस में कीर्ति आजाद और उनके कुछ सहयोगियों के खिलाफ प्राथमिकी यानी FIR दर्ज की गई। इसी मामले में आजाद ने गिरफ्तारी से पहले जमानत और पुलिस की कार्रवाई से सुरक्षा के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था।
आजाद ने आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि उनके खिलाफ राजनीतिक और व्यक्तिगत स्तर पर साजिश की जा रही है।
आजाद का दावा- घटना के दिन दुर्गापुर में मौजूद नहीं थे
कीर्ति आजाद ने अदालत के समक्ष अपने बचाव में कहा कि कथित घटना वाले दिन वह दुर्गापुर में मौजूद ही नहीं थे। अपने दावे के समर्थन में उन्होंने अदालत के सामने अपनी उड़ान से संबंधित विवरण भी पेश किया।
उनके वकील ने सुनवाई के दौरान इस बिंदु को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जिस दिन कथित वसूली की घटना होने का आरोप लगाया गया है, उस दिन आजाद की मौजूदगी को लेकर उनके पास अलग जानकारी है।
अदालत में आजाद की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि कथित घटना के करीब 15 महीने बाद FIR दर्ज की गई। बचाव पक्ष ने प्राथमिकी दर्ज करने में हुई देरी पर सवाल उठाया और इसे मामले की विश्वसनीयता से जुड़ा महत्वपूर्ण पहलू बताया।
बचाव पक्ष ने कहा- हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं
कीर्ति आजाद के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि कथित वसूली की रकम आजाद को मिलने का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं और पूछताछ के लिए उनकी हिरासत की आवश्यकता नहीं है।
बचाव पक्ष ने अदालत से अंतरिम सुरक्षा की मांग करते हुए कहा कि आजाद जांच एजेंसी के समक्ष उपलब्ध रहने और आवश्यक जानकारी देने के लिए तैयार हैं।
इन दलीलों के बाद हाईकोर्ट ने फिलहाल गिरफ्तारी सहित जबरदस्ती की पुलिस कार्रवाई से उन्हें अंतरिम सुरक्षा प्रदान की, लेकिन जांच में सहयोग की शर्त भी लगा दी।
FIR रद्द कराने के लिए भी हाईकोर्ट पहुंचे आजाद
वसूली मामले में गिरफ्तारी से सुरक्षा मांगने के अलावा कीर्ति आजाद ने कलकत्ता हाईकोर्ट में FIR रद्द करने की मांग भी की है। इस याचिका के जरिए वह अपने खिलाफ दर्ज मामले को खत्म कराने की कोशिश कर रहे हैं।
फिलहाल अदालत की ओर से दी गई अंतरिम राहत केवल जांच के दौरान गिरफ्तारी और अन्य जबरदस्ती की कार्रवाई से संबंधित है। FIR रद्द करने की उनकी अलग याचिका पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया जारी रहेगी।
इसलिए मौजूदा आदेश को मामले की अंतिम सुनवाई या आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। जांच एजेंसी को अपनी जांच आगे बढ़ाने की अनुमति है।
मामला कैसे सामने आया?
पुलिस के अनुसार, कारोबारी से कथित तौर पर 15 लाख रुपये मांगने और कारोबार बंद कराने की धमकी देने के आरोपों के बाद मामला दर्ज किया गया था। शिकायत में कीर्ति आजाद के सहयोगी पर कथित तौर पर रकम मांगने का आरोप लगाया गया।
शिकायतकर्ता ने कथित बातचीत रिकॉर्ड किए जाने का दावा भी किया। इसके बाद आजाद और उनके कुछ सहयोगियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई।
हालांकि, आजाद ने आरोपों से इनकार किया और कहा कि उन्हें राजनीतिक रूप से बदनाम करने के उद्देश्य से उनके खिलाफ साजिश की जा रही है। अब जांच एजेंसी मामले से जुड़े आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है।
कीर्ति आजाद का राजनीतिक सफर
कीर्ति आजाद पूर्व क्रिकेटर हैं और भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा रह चुके हैं। क्रिकेट से राजनीति में आने के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति में लंबा सफर तय किया है।
वर्तमान में वह तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा सांसद हैं और बर्धमान-दुर्गापुर लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका राजनीतिक सफर विभिन्न दलों से जुड़ा रहा है और वह राष्ट्रीय स्तर पर भी सक्रिय रहे हैं।
उनका नाम फिलहाल पश्चिम बंगाल में दर्ज इस कथित वसूली मामले के कारण चर्चा में है।
TMC में आजाद की भूमिका
कीर्ति आजाद उन आठ तृणमूल कांग्रेस लोकसभा सांसदों में शामिल हैं, जो पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तथा पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व के साथ बने हुए हैं।
ऐसे समय में जब पश्चिम बंगाल की राजनीति में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक टकराव जारी है, एक सांसद के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो गया है।
हालांकि, अदालत ने अभी आरोपों की सत्यता पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच और आगे होने वाली न्यायिक सुनवाई के बाद ही स्पष्ट होगी।
आगे क्या होगा?
कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब CID मामले की जांच आगे बढ़ाएगी। एजेंसी ने कीर्ति आजाद को 22 सितंबर को पूछताछ के लिए बुलाया है। अदालत की शर्त के अनुसार, आजाद को जांच में सहयोग करना होगा।
यदि पूछताछ की आवश्यकता होती है तो CID उन्हें कम से कम सात दिन पहले नोटिस देकर बुला सकती है। वहीं, आजाद की ओर से FIR रद्द करने की मांग वाली याचिका पर भी हाईकोर्ट में आगे की सुनवाई होगी।
फिलहाल सांसद को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा मिली हुई है, लेकिन यह राहत जांच में उनके सहयोग पर निर्भर है। मामले में लगाए गए वसूली के आरोपों की पुष्टि या खंडन जांच और अदालत की आगामी कार्यवाही के बाद ही होगा।












