Rahul Gandhi के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग से जुड़ी याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। Allahabad High Court ने सिमरन गुप्ता द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें राहुल गांधी के एक बयान को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी।
नई दिल्ली: कांग्रेस नेता राहुल गांधी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने उनके एक सार्वजनिक बयान—जिसमें उन्होंने “इंडियन स्टेट” से लड़ाई की बात कही थी—को लेकर एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने याचिका में पर्याप्त कानूनी आधार (मेरिट) न होने की बात कहते हुए इसे अस्वीकार कर दिया।
यह याचिका सिमरन गुप्ता नामक याची द्वारा दायर की गई थी, जिन्होंने पहले संभल जिले की चंदौसी कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान की पीठ ने की थी, जिन्होंने पहले ही इस मामले में आदेश सुरक्षित रख लिया था।
क्या था पूरा विवाद?
यह मामला जनवरी 2025 में कांग्रेस के नए मुख्यालय ‘इंदिरा भवन’ के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी द्वारा दिए गए भाषण से जुड़ा है। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और विभिन्न संस्थाओं पर तीखा हमला करते हुए कहा था कि कांग्रेस की लड़ाई अब केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं है।अपने बयान में राहुल गांधी ने कहा था कि भाजपा और आरएसएस के साथ-साथ “इंडियन स्टेट” से भी संघर्ष की स्थिति बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया था कि देश की संस्थाओं पर दबाव है और उनकी निष्पक्षता प्रभावित हो रही है।
इसी बयान को आधार बनाते हुए याची ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का बयान देश की संप्रभुता और संवैधानिक ढांचे के खिलाफ है, और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए।

निचली अदालतों में क्या हुआ?
इस मामले की शुरुआत संभल की एमपी/एमएलए अदालत में एफआईआर दर्ज कराने की मांग से हुई थी। हालांकि, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इसे क्षेत्राधिकार से बाहर बताते हुए याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद याची ने जिला जज की अदालत में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की। मई 2025 में जिला अदालत ने राहुल गांधी को नोटिस जारी करते हुए उन्हें पेश होने या जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।
हालांकि, नवंबर 2025 में चंदौसी स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने इस मामले को “कमजोर” बताते हुए याचिका को खारिज कर दिया था। इसी फैसले को सिमरन गुप्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट का फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि याचिका में पर्याप्त कानूनी आधार नहीं है। अदालत ने कहा कि इस मामले में आपराधिक कार्यवाही शुरू करने के लिए आवश्यक तत्व स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं किए गए हैं। इसके चलते कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया, जिससे राहुल गांधी को बड़ी राहत मिली।











