इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में डायरेक्ट क्लाउड तकनीक पेश की गई, जो सैटेलाइट के जरिए डेटा सीधे क्लाउड सर्वर तक भेजती है। इसके लिए इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क की जरूरत नहीं। यह ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में AI एप्लिकेशन, IoT डेटा और हेल्थ सर्विसेज को रियल-टाइम और सुरक्षित तरीके से उपलब्ध कराएगी।
Direct Cloud Technology: नई दिल्ली में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में डायरेक्ट क्लाउड तकनीक का डेमो पेश किया गया, जो सैटेलाइट से सीधे क्लाउड सर्वर तक डेटा भेजती है। यह तकनीक 3GPP Release 17 स्टैंडर्ड पर काम करती है और इसके लिए यूजर को केवल छोटा एंटीना या सैटेलाइट-सपोर्टेड डिवाइस चाहिए। इससे इंटरनेट न होने वाले ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में AI एप्लिकेशन और IoT डेटा को सुरक्षित, रियल-टाइम और किफायती तरीके से एक्सेस करना संभव होगा।
डायरेक्ट क्लाउड से डेटा भेजना अब होगा आसान
नई दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में डायरेक्ट क्लाउड तकनीक का प्रदर्शन किया गया, जो सैटेलाइट के जरिए डेटा सीधे क्लाउड सर्वर तक भेजती है। इस तकनीक के लिए इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क की आवश्यकता नहीं है। यूजर बस एक छोटा एंटीना या सैटेलाइट-सपोर्टेड डिवाइस इस्तेमाल करें, और डेटा सीधे क्लाउड में पहुंच जाएगा। इससे दूरदराज इलाकों में AI एप्लिकेशन और रियल-टाइम डेटा शेयरिंग बेहद आसान होगी।
कैसे काम करता है डायरेक्ट क्लाउड
डायरेक्ट क्लाउड नॉन-टेरेस्ट्रियल नेटवर्क (NTN) पर काम करता है, जो सैटेलाइट से सीधे क्लाउड कनेक्टिविटी देता है। 3GPP Release 17 स्टैंडर्ड पर आधारित यह तकनीक यूजर डिवाइस से क्लाउड सर्वर तक डेटा ट्रांसफर करती है, बिना Wi-Fi या मोबाइल इंटरनेट की जरूरत के। समिट में इसका डेमो दिखाया गया, जिसमें डेटा सीधे क्लाउड में भेजा गया।
यह प्रणाली ग्रामीण क्षेत्रों के लिए खास तौर पर फायदेमंद है, जहां इंटरनेट या मोबाइल नेटवर्क कमजोर या अनुपलब्ध होते हैं। किसानों, हेल्थ सेंसर या IoT डिवाइस के डेटा को तुरंत क्लाउड में भेजा जा सकता है।

कंपनियों ने दिखाया डेमो
समिट में Skylo और अन्य पार्टनर्स ने डायरेक्ट क्लाउड का लाइव डेमो प्रस्तुत किया। डिवाइस uCloudlink के MeowGo G50 Max हब से जुड़ा था, जो ऑर्बिटल, इन-फ्लाइट और ग्राउंड नेटवर्क को एकीकृत करता है। डिवाइस बिना बाहरी एंटीना के सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट हुआ और AI से कनेक्शन ऑप्टिमाइजेशन किया।
इस डेमो से यह साबित हुआ कि ग्रामीण इलाकों में AI ट्रेनिंग, फार्मिंग डेटा मॉनिटरिंग और हेल्थ डेटा ट्रांसफर अब बिना इंटरनेट के भी संभव हो पाएगा।
डायरेक्ट क्लाउड के फायदे
- दूरदराज क्षेत्रों में पहुंच: इंटरनेट न होने वाले गांव, पहाड़ या द्वीप में भी AI क्लाउड सर्विस का उपयोग किया जा सकेगा।
- रियल-टाइम डेटा: IoT डिवाइस तुरंत क्लाउड पर डेटा भेजेंगे, डिले कम होगा।
- कम लागत: पारंपरिक इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत नहीं, सैटेलाइट कनेक्टिविटी सस्ती साबित होगी।
- सुरक्षा: एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से डेटा लीक का खतरा कम।
- AI इंटीग्रेशन: क्लाउड पर AI मॉडल रन होंगे, लोकल प्रोसेसिंग की जरूरत नहीं।









