India-US ट्रेड डील पर ट्रंप की धमकी, रूस से तेल खरीद पर 25% टैरिफ का खतरा, जानें वजह

2 फरवरी की India-US ट्रेड डील में ट्रंप ने रूस से तेल खरीद पर पेनल्टी की धमकी दी। भारत ने किसानों के हित सुरक्षित रखने और ऊर्जा सुरक्षा पर जोर दिया।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील के बाद ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने पर 25% पेनल्टी की धमकी दी। भारत ने किसानों के हित सुरक्षित रखने और ऊर्जा जरूरतों को प्राथमिकता देने का रुख अपनाया।

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच 2 फरवरी 2026 को हुई ट्रेड डील को लेकर हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किया। इस डील में 25 फीसदी पेनल्टी टैरिफ हटाया गया, लेकिन उसी ऑर्डर में कुछ शर्तें भी रखी गई हैं, जो भारत के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। 

ट्रंप ने साफ किया कि यदि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद नहीं किया, तो अमेरिका फिर से 25 फीसदी पेनल्टी लगा सकता है और कुल टैरिफ 43 फीसदी हो जाएगा। इस धमकी के बाद सवाल उठ रहे हैं कि भारत की ओर से इस पर कोई जवाब क्यों नहीं दिया गया।

ट्रेड डील में भारत के हित की बातें

2 फरवरी को ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर डील की घोषणा की। डील के दौरान भारत के लिए दो मुख्य बिंदु विवाद का कारण बने। पहला भारत को अपने बाजार को अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खोलना और दूसरा रूस से तेल खरीदने पर रोक। 

कृषि उत्पादों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा और सवाल उठे, लेकिन वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत ने किसी भी राष्ट्रीय हित से समझौता नहीं किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि डील से भारतीय किसानों को नुकसान नहीं होगा और उनकी अधिकांश उपज इस डील के बाहर रखी गई है।

किसानों के उत्पाद डील से बाहर

पीयूष गोयल ने विस्तार से बताया कि भारत के किसान जो उत्पाद पर्याप्त मात्रा में पैदा करते हैं, उन्हें डील के दायरे से बाहर रखा गया है। इसमें मीट, पोल्ट्री, डेयरी उत्पाद, जेनेटिकली मॉडिफाइड प्रोडक्ट्स, चावल, गेहूं, चीनी, सोया, कॉर्न, ज्वार, बाजरा, रागी, अमारंथ, फल, दालें, मूंगफली, पशुओं का चारा, शहद, एथनॉल, तंबाकू आदि शामिल हैं। 

उन्होंने कहा कि जिन चीजों के लिए भारत आयात पर निर्भर नहीं है, उन्हें डील में शामिल नहीं किया गया। कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी इस बात की पुष्टि की और कहा कि किसानों को नुकसान पहुंचाने वाला कोई उत्पाद इस डील में शामिल नहीं है।

रूस से तेल खरीदने का मुद्दा

ट्रंप के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में मुख्य शर्त यह है कि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करे। इस मामले पर किसी केंद्रीय मंत्री की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है। पीयूष गोयल ने कहा कि इस मुद्दे पर जवाब विदेश मंत्रालय देगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार की प्राथमिकता 140 करोड़ लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना है।

एग्जीक्यूटिव ऑर्डर की धमकी

7 फरवरी को साइन हुए ट्रंप के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में कहा गया कि यदि भारत रूस से तेल खरीदना जारी रखता है तो अमेरिका 25 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगा सकता है। इस ऑर्डर का नाम MODIFYING DUTIES TO ADDRESS THREATS TO THE UNITED STATES BY THE GOVERNMENT OF THE RUSSIAN FEDERATION है। इसमें कहा गया है कि अमेरिकी सचिवालय और राष्ट्रपति के सलाहकार भारत की गतिविधियों पर निगरानी रखेंगे और अगर तेल खरीद का पता चला तो भारत पर टैरिफ फिर से लागू किया जाएगा।

भारत का रुख

भारत और अमेरिका की ओर से जारी जॉइंट स्टेटमेंट में इस तरह की धमकी नहीं दी गई है। भारत का रुख है कि ट्रेड डील से देश की सुरक्षा और किसानों के हितों को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए। पीयूष गोयल ने बार-बार कहा कि डील में भारत की संकल्प शक्ति और विकास की प्राथमिकताएं सुरक्षित हैं।

ट्रंप के एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में रूस से तेल खरीदने को लेकर कड़ा रुख अपनाया गया है। यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और विदेश नीति के लिए चुनौती बन सकता है। भारत को न केवल घरेलू जरूरतों का ध्यान रखना है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय दबावों का भी सामना करना है।

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