उत्तर प्रदेश के एटा जिले के नगला गांव के मानसी और प्रियांशु दीक्षित ने 8 मार्च 2026 को एक साथ भारतीय सेना में कमीशन हासिल किया। दोनों ने पिता के सेना में जाने के अधूरे सपने को पूरा किया।
Indian Army Success Story: उत्तर प्रदेश के एटा जिले के नगला गांव के रहने वाले मानसी दीक्षित और प्रियांशु दीक्षित ने भारतीय सेना में अफसर बनकर परिवार और गांव का नाम रोशन किया। 8 मार्च 2026 को OTA की पासिंग आउट परेड में दोनों ने एक साथ कदमताल की। मानसी को आर्मी एविएशन रेजिमेंट और प्रियांशु को सिख रेजिमेंट में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन मिला।
गांव से भारतीय सेना तक पहुंची भाई-बहन की कहानी
मानसी दीक्षित और प्रियांशु दीक्षित की कहानी उत्तर प्रदेश के एटा जिले के नगला गांव से शुरू होकर भारतीय सेना की ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी तक पहुंची। दोनों भाई-बहन बचपन से साथ स्कूल जाते थे। कॉलेज के दौरान उनकी पढ़ाई अलग-अलग दिशा में आगे बढ़ी, लेकिन सेना में शामिल होने का सपना उन्हें फिर एक साथ ले आया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मानसी और प्रियांशु अपने पूरे गांव से भारतीय सेना में अफसर बनने वाली पहली भाई-बहन की जोड़ी हैं। दोनों ने अपने लक्ष्य के लिए लगातार तैयारी की और आखिरकार सेना में अधिकारी के रूप में कमीशन हासिल किया।
मानसी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से LLB की पढ़ाई की, जबकि उनके छोटे भाई प्रियांशु ने मैथ्स में BSc की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के अलग-अलग क्षेत्र होने के बावजूद दोनों ने भारतीय सेना में करियर बनाने का लक्ष्य साझा किया।
पिता सेना में जाना चाहते थे, बच्चों ने पूरा किया सपना
मानसी और प्रियांशु के पिता विजेंद्र बहादुर दीक्षित खुद भी भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा करना चाहते थे। वह NCC कैडेट रह चुके थे और सेना में चयन भी हुआ था, लेकिन मेडिकल कारणों के चलते उन्हें अनफिट घोषित कर दिया गया। इसके बाद उनका सेना में जाने का सपना पूरा नहीं हो सका।
हालांकि, पिता ने अपना सपना कभी बच्चों पर नहीं थोपा। उन्होंने दोनों की शिक्षा और तैयारी में पूरा सहयोग दिया। परिवार के मुताबिक, बच्चों की पढ़ाई और तैयारी के लिए वह सुबह जल्दी उठने से लेकर दूसरी जरूरी व्यवस्थाएं करने तक हर संभव प्रयास करते थे।
विजेंद्र बहादुर दीक्षित ने पासिंग आउट परेड के दौरान कहा कि बच्चों के सेना में शामिल होने से उन्हें खुशी और संतुष्टि मिली। उनके अनुसार, वह खुद सेना में शामिल होना चाहते थे, लेकिन मेडिकल कारणों से ऐसा नहीं कर सके। बच्चों के सेना में अधिकारी बनने को उन्होंने अपने अधूरे सपने के पूरा होने के रूप में देखा।
भाई के कहने पर बहन ने दी SSB परीक्षा
मानसी की सेना तक पहुंचने की यात्रा में उनके छोटे भाई प्रियांशु की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। मानसी के मुताबिक, उनके भाई ने ही उन्हें आर्म्ड फोर्सेज में जाने और SSB की तैयारी करने के लिए प्रेरित किया।
मानसी ने बताया कि उन्हें एकेडमी के लिए पांच बार रिकमेंड किया गया था। इस दौरान भाई-बहन एक-दूसरे का सहयोग करते रहे। ट्रेनिंग के दौरान भी दोनों ने एक-दूसरे का ख्याल रखा। मानसी के लिए यह अनुभव इसलिए भी खास रहा क्योंकि उनके भाई उनके कोर्समेट थे।
दोनों ने अपनी-अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद सेना में अधिकारी बनने के लिए आवश्यक चयन प्रक्रिया को पूरा किया। इसके बाद उन्हें ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में प्रशिक्षण मिला।
8 मार्च 2026 को एक साथ मिला कमीशन
8 मार्च 2026 को ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी की पासिंग आउट परेड में मानसी और प्रियांशु ने एक साथ भारतीय सेना में कमीशन हासिल किया। इस मौके पर दोनों ने एक साथ कदमताल की और सेना में अधिकारी के रूप में अपनी नई जिम्मेदारी संभाली।
मानसी दीक्षित को आर्मी एविएशन रेजिमेंट में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्ति मिली, जबकि प्रियांशु दीक्षित को सिख रेजिमेंट (इन्फेंट्री) में लेफ्टिनेंट के रूप में कमीशन किया गया।
भाई-बहन की इस उपलब्धि ने उनके परिवार के साथ-साथ नगला गांव को भी गौरवान्वित किया। एक ही परिवार के दो बच्चों का एक साथ सेना में अधिकारी बनना उनके पिता के लिए भी भावनात्मक उपलब्धि रही। मानसी और प्रियांशु की यात्रा यह दिखाती है कि अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि के बावजूद स्पष्ट लक्ष्य, परिवार का सहयोग और लगातार प्रयास किसी भी करियर की दिशा को बदल सकते हैं।













