वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दोहा में कतर के कारोबारियों से भारत में व्यापार और निवेश बढ़ाने की अपील की। उन्होंने भारत की 7.8% GDP वृद्धि और 94.53 अरब डॉलर FDI का उल्लेख किया। BIT, FTA और 10 अरब डॉलर निवेश प्रतिबद्धता पर भी चर्चा हुई।
दोहा: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कतर के कारोबारियों से भारत और कतर के बीच व्यापार एवं निवेश साझेदारी के नए अवसर तलाशने और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने का आग्रह किया है। दोहा में कतर बिजनेसमेन एसोसिएशन (QBA) के बिजनेस राउंडटेबल को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने भारत की आर्थिक वृद्धि, निवेश के अवसरों और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। सीतारमण ने कहा कि भारत और कतर के बीच व्यापार एवं निवेश संबंधों को बढ़ाना भारत के लिए महत्वपूर्ण है। दोनों देशों के बीच फरवरी 2025 में कतर के अमीर की भारत यात्रा के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक बढ़ाया गया था। अब व्यापार और निवेश को इस साझेदारी का महत्वपूर्ण आधार बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
QBA से नए व्यापार और निवेश अवसर तलाशने की अपील
वित्त मंत्री ने QBA के साथ बातचीत के दौरान दोनों देशों में उभरते आर्थिक अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने कतर के कारोबारियों से भारत में निवेश और व्यापार के नए अवसरों को सक्रिय रूप से तलाशने का आग्रह किया।
सीतारमण ने भारत की अर्थव्यवस्था की मौजूदा मजबूती और संरचनात्मक विकास की गति का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि 7.8 प्रतिशत रही। इसी अवधि में निवेश में 11.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वित्त मंत्री ने इन आंकड़ों को भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और विकास की निरंतर गति के संकेत के तौर पर सामने रखा।
भारत की रेटिंग में सुधार का भी जिक्र
सीतारमण ने भारत की क्रेडिट रेटिंग में हालिया सुधार का भी उल्लेख किया। जापान क्रेडिट रेटिंग (JCR) ने भारत की दीर्घकालिक जारीकर्ता रेटिंग को BBB+ से बढ़ाकर A- कर दिया है।
वित्त मंत्रालय के मुताबिक, रेटिंग में यह सुधार भारत में जारी संरचनात्मक सुधारों और अर्थव्यवस्था को लेकर बढ़े भरोसे को दर्शाता है।
वित्त मंत्री ने कतर के कारोबारियों के सामने भारत की आर्थिक क्षमता और निवेश के व्यापक अवसरों को रेखांकित किया। उन्होंने यह संदेश दिया कि भारत में बुनियादी ढांचे और विभिन्न आर्थिक क्षेत्रों में निवेश के लिए व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
FY26 में भारत का FDI 94.53 अरब डॉलर
वित्त मंत्री ने भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के आंकड़ों को भी प्रमुखता से रखा। भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 94.53 अरब डॉलर का अब तक का सबसे अधिक वार्षिक सकल FDI inflow दर्ज किया।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह पिछले 15 वर्षों में भारत में आया सबसे अधिक वार्षिक सकल FDI प्रवाह है।
सीतारमण ने इन आंकड़ों के जरिए भारत की निवेश क्षमता और वैश्विक निवेशकों के बीच देश की बढ़ती स्वीकार्यता को रेखांकित किया। उन्होंने कतर के कारोबारियों से भारत के विकास और निवेश के अवसरों में भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया।
कतर के मंत्री से भी हुई मुलाकात
QBA के साथ बैठक से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कतर के विदेश व्यापार राज्य मंत्री डॉ. अहमद बिन मोहम्मद अल-सैयद से मुलाकात की।
बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने भारत और कतर के बीच व्यापार तथा निवेश संबंधों को और मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा की। कतर के मंत्री ने 2025 में अपनी भारत यात्रा को याद करते हुए दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग की संभावनाओं पर विचार साझा किए।
उन्होंने भारत में बुनियादी ढांचे के कई क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं का उल्लेख किया। इनमें बंदरगाह, हवाई अड्डे, राजमार्ग और बिजली क्षेत्र शामिल हैं।
भारत की कंपनियों के लिए कतर में अवसर
कतर के विदेश व्यापार राज्य मंत्री ने भारत की कंपनियों के लिए कतर में भी निवेश के अवसरों पर प्रकाश डाला।
इनमें खाद्य सुरक्षा, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्टार्टअप जैसे क्षेत्र शामिल हैं। दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग को दोतरफा निवेश के आधार पर आगे बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
इससे भारत और कतर के बीच व्यापारिक संबंधों को केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित रखने के बजाय निवेश और नए क्षेत्रों में सहयोग के रूप में विस्तार देने की दिशा दिखाई गई।
रणनीतिक साझेदारी को आर्थिक आधार देने पर जोर
सीतारमण ने कहा कि भारत कतर के साथ व्यापार और निवेश बढ़ाने को उच्च प्राथमिकता देता है। दोनों देशों के संबंधों को फरवरी 2025 में रणनीतिक साझेदारी का दर्जा मिलने के बाद आर्थिक सहयोग को इस रिश्ते का महत्वपूर्ण स्तंभ बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
वित्त मंत्री ने व्यापार और निवेश को द्विपक्षीय संबंधों में रणनीतिक आयाम जोड़ने वाले महत्वपूर्ण क्षेत्रों के रूप में रेखांकित किया।
दोनों देशों के बीच ऊर्जा, व्यापार, निवेश और अन्य आर्थिक क्षेत्रों में पहले से सहयोग है। नई बातचीत का उद्देश्य इन संबंधों को और व्यापक बनाना है।
सामान्य व्यापार बहाल करने पर जोर
बैठक में भारत और कतर समेत अन्य खाड़ी देशों के साथ सामान्य व्यापार व्यवस्था बहाल करने के मुद्दे पर भी चर्चा हुई।
वित्त मंत्री ने निर्बाध समुद्री नौवहन और वाणिज्य, विशेष रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए व्यापारिक गतिविधियों को सुचारु बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा और समुद्री व्यापार के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है। इस मार्ग से जुड़ी किसी भी बाधा का असर क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। ऐसे में भारत के लिए निर्बाध समुद्री आवाजाही और वाणिज्यिक गतिविधियां महत्वपूर्ण हैं।
10 अरब डॉलर के निवेश प्रतिबद्धता पर चर्चा
भारत और कतर के बीच 10 अरब डॉलर की कतर निवेश प्रतिबद्धता को लागू करने के मुद्दे पर भी बातचीत हुई। दोनों पक्षों ने इस प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।
इसके साथ ही भारत में Qatar Investment Authority (QIA) का कार्यालय स्थापित करने के विषय पर भी विचार-विमर्श हुआ।
QIA कतर का संप्रभु संपत्ति कोष है। भारत में इसकी मौजूदगी दोनों देशों के बीच संभावित निवेश सहयोग को संस्थागत स्तर पर बढ़ाने में भूमिका निभा सकती है।
Bilateral Investment Treaty पर तेज होगी बातचीत
बैठक में भारत और कतर के बीच Bilateral Investment Treaty (BIT) को अंतिम रूप देने पर भी सहमति जताई गई।
दोनों पक्षों ने निवेश संधि को पूरा करने में रुचि व्यक्त की और इसके लिए बातचीत की गति तेज करने का निर्णय लिया। ऐसी संधि दोनों देशों के निवेशकों के लिए निवेश संबंधी नियमों और सुरक्षा को लेकर एक ढांचा प्रदान कर सकती है।
BIT को आगे बढ़ाना दोनों देशों के बीच निवेश सहयोग को संस्थागत रूप से मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
FTA वार्ता को आगे बढ़ाने पर भी सहमति
भारत और कतर के बीच Free Trade Agreement (FTA) से संबंधित बातचीत भी बैठक के एजेंडे में रही। दोनों पक्षों ने FTA वार्ता को आगे बढ़ाने में रुचि व्यक्त की।
FTA का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को कम करना और वस्तुओं तथा सेवाओं के व्यापार के लिए अधिक अनुकूल परिस्थितियां तैयार करना होता है।
भारत और कतर के बीच FTA पर आगे की बातचीत से व्यापारिक संबंधों के विस्तार और दोनों देशों के कारोबारियों के लिए नए अवसर पैदा होने की संभावना है।
भारत-कतर आर्थिक संबंधों के लिए अगला चरण
निर्मला सीतारमण की कतर यात्रा के दौरान हुई बैठकों में व्यापार, निवेश, बुनियादी ढांचा, समुद्री व्यापार, निवेश संधि और FTA जैसे कई प्रमुख मुद्दे सामने आए।
भारत ने कतर के कारोबारियों को देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि और निवेश के अवसरों से अवगत कराया, जबकि कतर की ओर से भी भारत और कतर के बीच निवेश के संभावित क्षेत्रों पर चर्चा की गई।
10 अरब डॉलर की निवेश प्रतिबद्धता, QIA कार्यालय, BIT और FTA वार्ता पर हुई बातचीत दोनों देशों के आर्थिक संबंधों के अगले चरण के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। अब इन पहलों पर आगे होने वाली बातचीत और उनके क्रियान्वयन पर नजर रहेगी।











