Indian Navy Day 2025: भारतीय नौसेना कितनी मजबूत? जानिए INS सूरत, INS नीलगिरी और INS वाघशीर की ताकत

Indian Navy Day 2025: भारतीय नौसेना कितनी मजबूत? जानिए INS सूरत, INS नीलगिरी और INS वाघशीर की ताकत

आज यानी 4 दिसंबर को भारतीय नौसेना दिवस मनाया जा रहा है। भारतीय नौसेना दुनिया की पाँचवीं बड़ी नौसैनिक महाशक्ति के रूप में जानी जाती है। ग्लोबल फायरपावर रैंकिंग 2025 के अनुसार, अमेरिका पहले, चीन दूसरे, रूस तीसरे और जापान चौथे नंबर पर हैं, जबकि भारत की नौसेना पांचवे नंबर पर है। 

नई दिल्ली: 4 दिसंबर को भारत नेवी डे मनाता है, इस दिन भारतीय नौसेना की ताकत और उसकी उपलब्धियों को याद किया जाता है। वर्तमान में भारतीय नौसेना दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी नौसेना है, जो चीन और पाकिस्तान के मुकाबले काफी मजबूत स्थिति में है। ग्लोबल फायरपावर रैंकिंग 2025 के अनुसार, दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना क्रमशः अमेरिका, चीन, रूस, जापान और भारत की है। पाकिस्तान की नौसेना 27वें नंबर पर है।

भारतीय नौसेना की संरचना और ताकत

भारतीय नौसेना के बेड़े में दो एयरक्राफ्ट कैरियर शामिल हैं – INS विक्रमादित्य और नया INS विक्रांत। इसके अलावा नौसेना के पास डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट, कॉर्वेट, सबमरीन, पेट्रोल वेसल और एम्फीबियस वॉरफेयर शिप हैं।

  1. एयरक्राफ्ट और युद्धपोत: INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत नेवी की एयर पावर दिखाने की क्षमता रखते हैं। INS विक्रांत 36 एयरक्राफ्ट वाला एयर ग्रुप ले जा सकता है और इसमें STOBAR कॉन्फ़िगरेशन है। डिस्ट्रॉयर जैसे INS कोलकाता और INS विशाखापत्तनम, अलग-अलग मिशन के लिए एडवांस्ड मिसाइलों से लैस हैं।
  2. फ्रिगेट और कॉर्वेट: शिवालिक-क्लास फ्रिगेट और कामोर्टा-क्लास कॉर्वेट एंटी-सबमरीन वॉरफेयर और कोस्टल डिफेंस में अहम भूमिका निभाते हैं। INS नीलगिरी और INS तुषिल जैसे फ्रिगेट एडवांस्ड स्टेल्थ फीचर्स और ब्रह्मोस मिसाइल जैसे हथियारों से लैस हैं।
  3. नई शिप्स: इस साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नौसेना को INS सूरत, INS नीलगिरी और INS वाघशीर सौंपे।
  4. INS सूरत: P15B गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर, ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और लंबी दूरी की SAM से लैस।
  5. INS नीलगिरी: P17A स्टील्थ फ्रिगेट, एडवांस्ड स्टेल्थ फीचर्स और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमता।
  6. INS वाघशीर: फ्रांस के नेवल ग्रुप के सहयोग से बनाई गई अंडरसी वॉरफेयर शिप, टॉरपीडो और एंटी-शिप मिसाइलों से लैस।
  7. सबमरीन और बैलिस्टिक मिसाइल: इंडियन नेवी के पास 17 से अधिक सबमरीन हैं, जिनमें तीन परमाणु मिसाइल दाग सकती हैं। जल्द ही INS अरिधमान के शामिल होने के बाद भारत के पास पहली बार तीन ऑपरेशनल न्यूक्लियर बैलिस्टिक सबमरीन होंगी।
  8. मानव संसाधन और एयरक्राफ्ट: नौसेना में लगभग 67,252 सक्रिय नौसैनिक और 75,000 रिज़र्व हैं। बेड़े में 150 वेसल और सबमरीन तथा 300 एयरक्राफ्ट शामिल हैं।

चीन और पाकिस्तान से तुलना

इंडियन नेवी के पास मौजूदा समय में दो एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत हैं, जोकि ऑपरेशनल हैं। चीन के पास भी दो एयरक्राफ्ट कैरियर है। पाकिस्तान के पास एक भी नहीं है। भारत के पास 18 सबमरीन यानी पनडुब्बियां हैं। इनमे से तीन परमाणु मिसाइलें दाग सकती हैं। जबकि चीन के पास 78 तो पाकिस्तान के पास 9 पनडुब्बियां हैं। भारत के पास 12 फ्रिगेट्स हैं जबकि चीन के पास 42 तो पाकिस्तान के पास महज छह ही हैं। इंडियन नेवी के पास 138 गश्ती जहाज है जबकि चीनी नेवी में 150 तो पाकिस्तान के पास दो हैं। 

भारत के पास 12 विध्वंसक युद्धपोत (डेस्ट्रॉयर) हैं जबकि चीन के पास 49 विध्वंसक युद्धपोत हैं। पाकिस्तान के पास दो डेस्ट्रॉयर है। भारत आने वाले 10 सालों में 96 जहाज और पनडुब्बियों की नौसेना में शामिल करेगा। भारत के पास 2030 तक 160 वॉरशिप होगी। जबकि चीन भी अपनी ताकत बढ़ा रहा है। 

भारतीय नौसेना के प्रमुख मिशन

भारतीय नौसेना लगातार अपने बेड़े को आधुनिक बना रही है। इसमें स्वदेशी जहाज निर्माण, आधुनिक ड्रोन और रोबोटिक सिस्टम, और राफेल-एम फाइटर जेट शामिल हैं। नौसेना को 2029 तक चार राफेल जेट मिलने की संभावना है। INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत के साथ कोलकाता और विशाखापत्तनम क्लास डिस्ट्रॉयर, स्टील्थ फ्रिगेट, ब्रह्मोस और बराक-8 मिसाइल सिस्टम ने नौसेना को सशक्त सामरिक शक्ति प्रदान की है।

  • सामरिक समुद्री नियंत्रण: SLOCs और समुद्री लेन की सुरक्षा।
  • एंटी-सबमरीन और एंटी-शिप ऑपरेशन: उन्नत मिसाइल और टॉरपीडो सिस्टम।
  • हिंड महासागर में प्रभुत्व: चीन की समुद्री मौजूदगी को काउंटर करना।
  • आपदा प्रबंधन और बचाव मिशन: समुद्री सुरक्षा और मानवता सेवा।

भारतीय नौसेना आज विश्व की सबसे शक्तिशाली नौसेनाओं में से एक है। चीन और पाकिस्तान की तुलना में भारतीय बेड़े का तकनीकी और सामरिक बढ़त साफ दिखाई देती है। एयरक्राफ्ट कैरियर, डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट, कॉर्वेट, सबमरीन और पेट्रोल वेसल के साथ, इंडियन नेवी हिंद महासागर और उससे आगे समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम है।

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