सांस की समस्या वाले लोगों को हीटर का उपयोग करना चाहिए या नहीं, जानें एक्सपर्ट की राय

ठंड में हीटर हवा को सूखा कर धूल और एलर्जन फैलाता है, जिससे अस्थमा, खांसी और सांस की दिक्कत बढ़ती है। सही वेंटिलेशन और सीमित उपयोग ही सुरक्षित तरीका है।

ठंड में घरों में हीटर का इस्तेमाल आम है, लेकिन अस्थमा और अन्य सांस की बीमारियों वाले लोगों के लिए यह जोखिम भरा हो सकता है। हीटर हवा को सूखा करता है और धूल व एलर्जन फैलाता है, जिससे सांस फूलना, खांसी और अस्थमा अटैक का खतरा बढ़ जाता है। एक्सपर्ट्स कम समय और सही वेंटिलेशन के इस्तेमाल की सलाह देते हैं।

हीटर उपयोग और स्वास्थ्य सावधानियां: ठंड के मौसम में घरों में हीटर का इस्तेमाल बढ़ जाता है, लेकिन अस्थमा या किसी भी सांस की बीमारी वाले लोग इसे लेकर सतर्क रहें। लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल के डॉ. एल.एच. घोटेकर के अनुसार, हीटर कमरे की नमी कम कर हवा को सूखा करता है और धूल, एलर्जन या पालतू जानवरों के बाल फैलाता है, जिससे खांसी, सांस फूलना और अस्थमा अटैक का खतरा बढ़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मरीज केवल 20-30 मिनट के लिए हीटर का उपयोग करें, हल्की वेंटिलेशन रखें और ह्यूमिडिफायर या पानी से नमी बनाए रखें, ताकि स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कम हो।

हीटर इस्तेमाल करने के दौरान सुरक्षा उपाय

हीटर चलाते समय कमरे में हल्की वेंटिलेशन जरूरी है। खिड़की थोड़ा खुला रखें और हर 20-30 मिनट में हीटर बंद करके ताजी हवा आने दें।

कमरे में ह्यूमिडिफायर या पानी से भरा कटोरा रखने से नमी बनी रहती है। हीटर को सीधे अपने पास न रखें और बहुत अधिक तापमान पर न चलाएं। सोते समय लंबे समय तक हीटर चालू न रखें।

संवेदनशील समूह पर विशेष ध्यान

बच्चे, बुजुर्ग और हृदय या उच्च रक्तचाप के मरीज भी हीटर के कारण पैदा होने वाली समस्याओं के प्रति संवेदनशील होते हैं। हीटर लगातार चलाने से त्वचा और आंखों में जलन, नाक बंद होना, सिरदर्द, थकान, नींद में बाधा और चिड़चिड़ापन जैसी परेशानियां हो सकती हैं।

एक्सपर्ट्स के अनुसार, सांस की बीमारी वाले मरीजों को सबसे सुरक्षित उपाय यह है कि वे हीटर का इस्तेमाल कम समय के लिए करें और कमरे में हवा का संतुलन बनाए रखें।

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