इमैनुएल मैक्रों ने इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में ‘नमस्ते’ कहकर संबोधन शुरू किया। उन्होंने भारत की डिजिटल पहचान, National Payments Corporation of India के UPI सिस्टम और हेल्थ ID पहल की सराहना की, इसे वैश्विक मॉडल बताया।
New Delhi: फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में अपने संबोधन की शुरुआत ‘नमस्ते’ कहकर की। उनका यह अंदाज वहां मौजूद लोगों को पसंद आया और भारत के प्रति सम्मान का संदेश भी दिया। अपने भाषण में उन्होंने भारत की डिजिटल प्रगति की खुलकर सराहना की।
मैक्रों ने कहा कि भारत ने वह कर दिखाया है जो दुनिया का कोई और देश नहीं कर पाया। उन्होंने डिजिटल पहचान, पेमेंट सिस्टम और हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को भारत की बड़ी उपलब्धि बताया। उनका कहना था कि यह केवल टेक्नोलॉजी की कहानी नहीं, बल्कि एक सिविलाइजेशन की कहानी है।
मुंबई से शुरू हुआ भारत दौरा
मैक्रों ने अपने भारत दौरे की शुरुआत मुंबई से की थी। छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पर उनकी रात की वॉक का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। इस दौरान उन्होंने आम लोगों से बातचीत की और भारत की ऊर्जा को महसूस करने की बात कही।
समिट में बोलते हुए उन्होंने मुंबई का एक अनुभव साझा किया। उन्होंने सड़क किनारे सामान बेचने वाले एक विक्रेता की कहानी सुनाई, जिससे डिजिटल पेमेंट ने उसकी जिंदगी बदल दी।
एक विक्रेता की बदली जिंदगी
मैक्रों ने कहा कि लगभग दस साल पहले मुंबई में एक सड़क विक्रेता के पास बैंक खाता खोलने की सुविधा नहीं थी। उसके पास स्थायी पता नहीं था, जरूरी कागजात नहीं थे और बैंकिंग सिस्टम तक पहुंच नहीं थी। ऐसे लाखों लोग औपचारिक वित्तीय व्यवस्था से बाहर थे।
लेकिन आज वही विक्रेता अपने मोबाइल फोन पर डिजिटल पेमेंट स्वीकार कर रहा है। अब वह नकद पर निर्भर नहीं है। उसके पास डिजिटल ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड है, जिससे उसे लोन और अन्य वित्तीय सेवाएं मिलने की संभावना भी बढ़ी है।

मैक्रों ने कहा कि यह बदलाव केवल टेक्नोलॉजी की वजह से नहीं, बल्कि व्यवस्था और सोच में आए परिवर्तन की वजह से संभव हुआ है।
UPI बना डिजिटल क्रांति का आधार
भारत की डिजिटल पेमेंट क्रांति का सबसे बड़ा आधार यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी National Payments Corporation of India द्वारा संचालित UPI है। इस प्लेटफॉर्म ने छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यवसायों तक को एक ही सिस्टम से जोड़ दिया है।
मैक्रों ने बताया कि भारत में हर महीने लगभग 20 बिलियन डिजिटल ट्रांजैक्शन होते हैं। यह संख्या दुनिया के कई देशों की कुल आबादी से भी ज्यादा है। उनके अनुसार इतने बड़े स्तर पर डिजिटल लेनदेन का सफल संचालन भारत की तकनीकी क्षमता और प्रशासनिक दक्षता को दिखाता है।
उन्होंने कहा कि 1.4 बिलियन लोगों के लिए डिजिटल पहचान और पेमेंट सिस्टम तैयार करना आसान काम नहीं था। यह एक बड़े विजन और मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर का परिणाम है।
डिजिटल पहचान और हेल्थ ID पर भी चर्चा
मैक्रों ने अपने संबोधन में डिजिटल पहचान प्रणाली की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत ने बड़ी आबादी को डिजिटल रूप से जोड़ने का काम किया है। इससे सरकारी सेवाओं तक पहुंच आसान हुई है।
उन्होंने यह भी बताया कि भारत ने 500 मिलियन से ज्यादा डिजिटल हेल्थ ID जारी की हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं का डेटा प्रबंधन बेहतर हुआ है और लोगों को इलाज में सुविधा मिली है। मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का यह मॉडल कई देशों के लिए प्रेरणा बन सकता है।
टेक्नोलॉजी से बढ़ी समावेशन की ताकत
मैक्रों ने कहा कि डिजिटल सिस्टम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे समाज के उन वर्गों को भी अवसर मिला है जो पहले पीछे रह जाते थे। छोटे व्यापारी, ग्रामीण महिलाएं और असंगठित क्षेत्र के कामगार अब सीधे डिजिटल इकोनॉमी से जुड़े हैं।
उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी तभी सफल मानी जाती है जब वह लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाए। भारत का उदाहरण इसी बात का प्रमाण है।
मैक्रों के मुताबिक भारत ने AI, डिजिटल पेमेंट और डिजिटल पहचान को मिलाकर एक मजबूत इकोसिस्टम बनाया है। इससे स्टार्टअप, इनोवेशन और बिजनेस को भी बढ़ावा मिला है।









