नाग पंचमी पर खास कहानी: 53 साल से सांपों का रेस्क्यू कर रहे कैलाशनाथ, 12 फीट के सांप से भी भिड़े

इंदौर के कैलाशनाथ 53 साल से सांपों का रेस्क्यू कर रहे हैं। 12 साल की उम्र से शुरू हुआ सफर आज भी जारी है। 12 फीट के सांप को भी बचाया।

इंदौर के 65 वर्षीय कैलाशनाथ 53 साल से सांपों का रेस्क्यू कर रहे हैं। बारिश के मौसम में रोजाना कई सूचनाओं पर पहुंचते हैं। नाग पंचमी पर वन विभाग ने सांपों के प्रदर्शन को रोकने के लिए तीन टीमें तैनात की हैं।

नाग पंचमी: इंदौर में बारिश के साथ सांपों के रेस्क्यू की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसे समय में 65 वर्षीय कैलाशनाथ दिन-रात लोगों की मदद के लिए पहुंचते हैं। उन्होंने 12 साल की उम्र में सांप पकड़ना शुरू किया था और पिछले 53 वर्षों से इस काम से जुड़े हैं। अपने अनुभव के दौरान वे करीब 12 फीट लंबे सांप को भी 30 मिनट की मशक्कत के बाद सुरक्षित पकड़ चुके हैं।

12 साल की उम्र से सांपों का रेस्क्यू कर रहे कैलाशनाथ

इंदौर में बारिश का मौसम शुरू होते ही घरों, दुकानों, कार्यालयों, गाड़ियों और खाली जगहों पर सांप निकलने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। ऐसी स्थिति में लोग अक्सर घबरा जाते हैं और सांप को पकड़ने के लिए रेस्क्यू टीम की मदद लेते हैं।

65 वर्षीय कैलाशनाथ पिछले 53 वर्षों से सांपों के रेस्क्यू का काम कर रहे हैं। उन्होंने महज 12 साल की उम्र में हाथ में छड़ी लेकर सांप पकड़ना शुरू किया था। उनका कहना है कि उन्होंने अपने माता-पिता को यह काम करते देखा और धीरे-धीरे सांपों की पहचान तथा उन्हें सुरक्षित तरीके से पकड़ने का तरीका सीखा।

बारिश के दिनों में उन्हें रोजाना करीब 2 से 4 सांपों के रेस्क्यू के लिए फोन आते हैं। उनका कहना है कि सांपों को पकड़ने के बाद उन्हें सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया जाता है।

12 फीट के सांप को पकड़ने में लगे 30 मिनट

कैलाशनाथ के रेस्क्यू करियर में कई ऐसे मामले आए, जिन्हें वह आज भी याद करते हैं। किला मैदान में उन्हें करीब 12 फीट लंबा सांप मिला था। सांप काफी बड़ा था और आसानी से काबू में नहीं आ रहा था।

उसे सुरक्षित पकड़ने में करीब 30 मिनट तक मशक्कत करनी पड़ी। कैलाशनाथ के मुताबिक, इस दौरान उनकी सांस तक फूल गई थी। काफी प्रयास के बाद सांप को सुरक्षित तरीके से काबू में किया गया और बाद में उसे सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया गया।

उनका कहना है कि सांप को पकड़ने के दौरान जल्दबाजी या लापरवाही खतरनाक हो सकती है। इसलिए अनुभव और सही उपकरण के साथ ही रेस्क्यू करना जरूरी है।

रात 2 बजे भी मदद के लिए पहुंचने की कोशिश

कैलाशनाथ के पास सांपों से जुड़ी सूचना दिन या रात किसी भी समय आ सकती है। उनका कहना है कि लोग सांप को देखकर डर जाते हैं और उस समय उनकी पहली जरूरत ऐसे व्यक्ति की होती है, जो उसे सुरक्षित तरीके से हटा सके।

रात 2 या 3 बजे फोन आने पर भी वह मौके पर पहुंचने की कोशिश करते हैं। उनके लिए समय से ज्यादा जरूरी लोगों की परेशानी दूर करना है।

सांप दिखाई देने पर आम लोगों को खुद उसे पकड़ने या मारने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। ऐसी स्थिति में प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या वन विभाग को सूचना देना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।

सांप की स्थिति के अनुसार इस्तेमाल करते हैं उपकरण

कैलाशनाथ बताते हैं कि सांप की स्थिति के अनुसार रेस्क्यू का तरीका तय किया जाता है। अगर सांप एक जगह मौजूद हो या धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा हो तो नियंत्रित तरीके से उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाने का प्रयास किया जाता है।

अगर सांप तेजी से भाग रहा हो तो रेस्क्यू कैचर जैसे उपकरणों की मदद ली जाती है। वहीं, किसी छेद, बिल या सामान के पीछे छिपे सांप को निकालने के लिए आसपास की वस्तुओं को सावधानी से हटाया जाता है।

कैलाशनाथ के मुताबिक, सबसे ज्यादा खतरा तब पैदा होता है जब कोई व्यक्ति खुद सांप को पकड़ने या डंडे से दबाने की कोशिश करता है। चोट या खतरा महसूस होने पर सांप अधिक आक्रामक हो सकता है।

सांप के काटने पर तुरंत अस्पताल जाएं

सांप के काटने की स्थिति में घरेलू नुस्खों या झाड़-फूंक पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। काटे गए हिस्से पर रस्सी या कपड़ा बहुत कसकर बांधना, घाव को काटना या जहर चूसने की कोशिश करना नुकसानदायक हो सकता है।

ऐसी स्थिति में व्यक्ति को शांत रखना और बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल पहुंचाना जरूरी है। आम लोगों के लिए सांप की प्रजाति की सही पहचान करना भी आसान नहीं होता, इसलिए सांप दिखाई देने पर उससे दूरी बनाए रखना सबसे सुरक्षित कदम है।

नाग पंचमी पर वन विभाग की तीन टीमें तैनात

नाग पंचमी के अवसर पर वन विभाग ने सांपों के प्रदर्शन और उन्हें लेकर घूमने वालों पर निगरानी बढ़ा दी है। इसके लिए इंदौर में तीन टीमें बनाई गई हैं, जो शहर और ग्रामीण इलाकों में निगरानी करेंगी।

नवलखा, भंवरकुआं, रिंग रोड और आसपास के क्षेत्रों की जिम्मेदारी कोमल पालीवाल को दी गई है। राजबाड़ा, विजय नगर और अन्य शहरी क्षेत्रों की जिम्मेदारी आशीष यादव संभालेंगे। अन्नपूर्णा, लाबरिया भेरू और आसपास के क्षेत्रों की निगरानी महेश सोनगरा की टीम करेगी।

वन विभाग का उद्देश्य नाग पंचमी के दौरान वन्यजीवों के साथ होने वाली अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना और सांपों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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