IPS पपिया सुल्ताना विवाद: संदेशखाली मामले से लेकर प्रोटोकॉल आरोपों तक फिर चर्चा में अधिकारी

संदेशखाली मामले में चर्चा में रहीं IPS पपिया सुल्ताना पर अब BJP विधायकों को सीट न देने और प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोप लगे हैं। उनके आचरण पर फिर उठे सवाल।

IPS पपिया सुल्ताना एक बार फिर विवादों में घिर गई हैं। उन पर संदेशखाली मामले के बाद अब शपथ ग्रहण समारोह में BJP विधायकों को सीट न देने और प्रोटोकॉल तोड़ने के आरोप लगे हैं, जिससे राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल कैडर की आईपीएस अधिकारी पपिया सुल्ताना एक बार फिर विवादों के केंद्र में हैं। सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में उनके खिलाफ अलग-अलग आरोप और दावे चर्चा में हैं। इनमें सबसे प्रमुख मामला संदेशखाली कांड से जुड़ा बताया जा रहा है, जबकि दूसरा हालिया विवाद एक सार्वजनिक कार्यक्रम में प्रोटोकॉल और व्यवहार से संबंधित है।

हालांकि इन सभी मामलों में लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या न्यायिक निष्कर्ष अभी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

संदेशखाली मामला और लगाए गए आरोप

संदेशखाली क्षेत्र में 2024 के दौरान महिलाओं ने यौन उत्पीड़न और हिंसा से जुड़े गंभीर आरोप लगाए थे। इसी मामले की जांच प्रक्रिया के दौरान IPS पपिया सुल्ताना की भूमिका पर सवाल उठाए गए।

आरोप है कि जांच के दौरान उन्होंने पीड़ित महिलाओं से ऐसे सवाल पूछे जिनमें मेडिकल रिपोर्ट और सबूतों की मांग शामिल थी, जिससे कुछ संगठनों और विपक्षी दलों ने इसे असंवेदनशील व्यवहार बताया। वहीं, कुछ अधिकारियों का कहना है कि जांच प्रक्रिया में साक्ष्य आधारित दृष्टिकोण अपनाना कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा होता है।

इस पूरे मामले को लेकर मानवाधिकार संगठनों और राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।

तबादला और प्रशासनिक कार्रवाई

विवादों के बीच वर्ष 2024 में पपिया सुल्ताना का तबादला बैरकपुर पुलिस लाइन में कर दिया गया था। राज्य सरकार ने इसे प्रशासनिक रूटीन ट्रांसफर बताया, लेकिन विपक्षी दलों ने इसे विवाद से जोड़कर देखा और सवाल उठाए।

हालांकि, अब तक किसी भी मामले में उनके खिलाफ कोई औपचारिक दंडात्मक कार्रवाई सार्वजनिक रूप से घोषित नहीं की गई है।

हालिया विवाद: प्रोटोकॉल और सार्वजनिक कार्यक्रम

ताजा विवाद एक सार्वजनिक राजनीतिक कार्यक्रम से जुड़ा बताया जा रहा है, जहां प्रधानमंत्री की मौजूदगी में एक शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया गया था। आरोप है कि इस दौरान कुछ बीजेपी विधायकों को बैठने की उचित व्यवस्था नहीं मिल पाई और इसे प्रोटोकॉल उल्लंघन से जोड़कर देखा जा रहा है।

सोशल मीडिया पर वायरल कुछ तस्वीरों और दावों के आधार पर यह चर्चा शुरू हुई कि कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच शिष्टाचार और समन्वय की कमी रही।

हालांकि इस मामले में भी प्रशासन या संबंधित अधिकारी की  कोई गलती नहीं है। 

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