Iran Undersea Internet Cable Plan से बढ़ी चिंता, भारत समेत कई देशों की इंटरनेट सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं

Iran के undersea internet cable plan से भारत समेत कई देशों की इंटरनेट स्पीड, क्लाउड सेवाएं और डिजिटल कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है।

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली undersea internet cables पर फीस लगाने के संकेत दिए हैं। इससे Google, Meta और Amazon जैसी कंपनियों के साथ भारत समेत कई देशों की इंटरनेट कनेक्टिविटी और डिजिटल सेवाओं पर असर पड़ सकता है।

Technology: ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब undersea internet cable नेटवर्क को लेकर नई चिंता सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली समुद्री इंटरनेट केबलों पर लाइसेंस फीस और नियंत्रण लागू करने की तैयारी कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ग्लोबल इंटरनेट ट्रैफिक, क्लाउड सेवाओं और भारत सहित कई देशों की डिजिटल कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है।

होर्मुज रूट से गुजरती हैं अहम इंटरनेट केबलें

ईरान ने समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों पर नियंत्रण बढ़ाने के संकेत दिए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली undersea cables पर फीस लगाने और उनके संचालन के लिए नए नियम लागू करने की तैयारी कर रहा है।

ईरानी अधिकारियों का कहना है कि इन केबलों से जुड़े ऑपरेटर्स को स्थानीय कानूनों का पालन करना होगा। साथ ही केबलों की मरम्मत और रखरखाव का काम केवल ईरानी कंपनियों तक सीमित किया जा सकता है। यह इलाका सिर्फ तेल सप्लाई ही नहीं बल्कि एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच डिजिटल डेटा ट्रांसफर का भी अहम रास्ता माना जाता है।

Google, Meta और Amazon जैसी कंपनियों पर असर संभव

ग्लोबल टेक कंपनियों की कई सेवाएं undersea cable नेटवर्क पर निर्भर करती हैं। Google Search, WhatsApp, Instagram, Amazon Cloud Services और Netflix Streaming जैसी सेवाओं का बड़ा हिस्सा इन्हीं केबलों के जरिए संचालित होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर केबल नेटवर्क पर अतिरिक्त नियंत्रण या बाधाएं बढ़ती हैं, तो इंटरनेट स्पीड, डेटा ट्रांसफर और क्लाउड सर्विसेज प्रभावित हो सकती हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय डिजिटल कारोबार और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

भारत में इंटरनेट स्पीड और कनेक्टिविटी पर पड़ सकता है असर

भारत, एशिया और यूरोप के बीच डेटा ट्रांसफर के लिए इस समुद्री रूट का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जाता है। ऐसे में अगर इस क्षेत्र में किसी तरह की तकनीकी या राजनीतिक बाधा आती है, तो भारत में इंटरनेट सेवाएं धीमी हो सकती हैं या कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, undersea cables की मरम्मत करने वाले जहाजों को लंबे समय तक समुद्र में एक जगह रुकना पड़ता है। संघर्ष वाले क्षेत्रों में यह प्रक्रिया जोखिम भरी हो सकती है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि ईरान इस योजना को किस स्तर तक लागू करेगा, लेकिन बढ़ते तनाव ने वैश्विक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर चिंता जरूर बढ़ा दी है।

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