IRFC Share Price Crash: ₹100 की नवरत्न कंपनी में 5% गिरावट, सरकार के OFS से दबाव

IRFC Share Price में आज तेज गिरावट देखने को मिली है। ₹100 के आसपास ट्रेड करने वाली नवरत्न कंपनी के शेयर 5% तक टूट गए, जिसका कारण सरकार की OFS (Offer for Sale)

इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन के शेयरों Indian Railway Finance Corporation (IRFC) में 24 जून को तेज गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट उस खबर के बाद आई है जिसमें सरकार ने ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए कंपनी में अपनी 2% हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। 

बिजनेस न्यूज़: इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) के शेयरों में मंगलवार को भारी दबाव देखने को मिला, जब सरकार ने कंपनी में 2% हिस्सेदारी ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचने की घोषणा की। अतिरिक्त 1% हिस्सेदारी ग्रीनशू ऑप्शन के तहत शामिल की गई है। इस फैसले के बाद IRFC के शेयर करीब 5% तक टूट गए और निवेशकों में हलचल बढ़ गई। सरकार ने इस OFS के लिए प्रति शेयर ₹91 का फ्लोर प्राइस तय किया है, जो बाजार भाव से नीचे होने के कारण डिस्काउंट माना जा रहा है।

IRFC शेयर में गिरावट: क्या हुआ बाजार में?

OFS की घोषणा के बाद IRFC का शेयर 24 जून को गिरावट के साथ खुला। शुरुआती कारोबार में शेयर करीब ₹94 के स्तर पर खुला और दिन के दौरान ₹93.18 तक फिसल गया। बाजार में यह गिरावट मुख्य रूप से सरकारी हिस्सेदारी बिक्री और संभावित सप्लाई बढ़ने की आशंका के कारण देखी गई। विश्लेषकों का मानना है कि OFS के चलते शॉर्ट-टर्म में शेयर पर दबाव बनना सामान्य है, क्योंकि बाजार में अतिरिक्त सप्लाई आने की संभावना बढ़ जाती है।भारत सरकार के DIPAM (Department of Investment and Public Asset Management) के अनुसार, यह OFS दो चरणों में लागू होगा:

  • नॉन-रिटेल निवेशक: 24 जून को बोली लगाने का अवसर
  • रिटेल निवेशक: 25 जून को भाग ले सकेंगे
  • कुल हिस्सेदारी बिक्री: 2% + 1% ग्रीनशू ऑप्शन

सरकार इस OFS के जरिए बाजार आधारित तरीके से राजस्व जुटाने की रणनीति पर काम कर रही है।

IRFC का फ्लोर प्राइस ₹91 क्यों रखा गया?

IRFC Share Price Crash: ₹100 की नवरत्न कंपनी में 5% गिरावट, सरकार के OFS से दबाव

सरकार द्वारा ₹91 का फ्लोर प्राइस तय करना निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सवाल बन गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इसके पीछे तीन प्रमुख कारण हो सकते हैं:

  • निवेशकों को आकर्षित करना: डिस्काउंटेड प्राइस पर OFS रखने से अधिक निवेशक भाग लेते हैं, जिससे शेयर की बिक्री सफल होती है।
  • बाजार लिक्विडिटी सुनिश्चित करना: कम कीमत पर ऑफर देने से बड़ी मात्रा में शेयर तेजी से सब्सक्राइब हो सकते हैं।
  • सरकारी विनिवेश रणनीति: सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में हिस्सेदारी धीरे-धीरे कम कर संसाधन जुटाने की नीति पर काम कर रही है।

IRFC: भारत की नवरत्न रेलवे फाइनेंस कंपनी

IRFC, रेल मंत्रालय के तहत आने वाली एक नवरत्न PSU (Public Sector Undertaking) है। यह कंपनी भारतीय रेलवे के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने का प्रमुख माध्यम है। IRFC का मुख्य कार्य शामिल है:

  • रेलवे परियोजनाओं के लिए फंड जुटाना
  • रोलिंग स्टॉक (ट्रेन, कोच आदि) की खरीद में वित्तीय सहायता
  • रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को सपोर्ट करना

कंपनी भारतीय रेलवे की सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय इकाइयों में से एक मानी जाती है। IRFC में गिरावट का असर व्यापक PSU सेक्टर पर भी देखा गया। सरकारी OFS के चलते निवेशकों में यह धारणा बनी कि आने वाले दिनों में और भी सार्वजनिक कंपनियों में हिस्सेदारी बिक्री हो सकती है।

पिछले कुछ महीनों में सरकार ने कोल इंडिया, NLC इंडिया, NHPC, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और GIC जैसे कई सार्वजनिक उपक्रमों में हिस्सेदारी बेचकर ₹16,000 करोड़ से अधिक जुटाए हैं।

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