IRGC विवाद पर पलटवार! ईरान ने यूरोपीय सेनाओं के खिलाफ लिया बड़ा फैसला

ईरान ने यूरोपीय संघ के फैसले का जवाब देते हुए EU के सभी सदस्य देशों की सेनाओं को आतंकवादी संगठन घोषित किया। पश्चिम एशिया में तनाव और गहराया।

यूरोपीय संघ द्वारा IRGC को आतंकी संगठन घोषित करने के बाद ईरान ने कड़ा जवाब दिया है। ईरानी संसद अध्यक्ष ने EU के सभी सदस्य देशों की सेनाओं को आतंकवादी संगठन करार दिया, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ गया।

World News: पश्चिम एशिया में पहले से ही चल रहे तनाव के बीच ईरान ने यूरोपीय संघ को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कालिबाफ ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान अब यूरोपीय संघ के सभी सदस्य देशों की सेनाओं को आतंकवादी संगठन मानता है। यह बयान सिर्फ एक प्रतिक्रिया नहीं बल्कि एक सख्त राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

ईरान का यह कदम ऐसे समय आया है जब यूरोपीय संघ ने ईरान के अर्धसैनिक बल इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर यानी IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित किया है। इसी फैसले के जवाब में तेहरान ने यह सख्त रुख अपनाया है।

IRGC को लेकर बढ़ा अंतरराष्ट्रीय विवाद

यूरोपीय संघ ने हाल ही में IRGC को आतंकवादी संगठन की सूची में शामिल किया था। EU का आरोप है कि ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान IRGC ने हिंसक कार्रवाई की। इसी आधार पर यूरोपीय संघ ने यह फैसला लिया।

ईरान का कहना है कि IRGC देश की संप्रभुता और सुरक्षा की रक्षा करने वाला एक वैध सैन्य बल है। ईरानी नेतृत्व इसे सीधे तौर पर अपने आंतरिक मामलों में दखल मानता है। यही वजह है कि यूरोपीय संघ के फैसले के बाद ईरान ने जवाबी कदम उठाया।

संसद में IRGC की वर्दी पहनकर दिया संदेश

मोहम्मद बाकिर कालिबाफ ने यह बयान ईरानी संसद में दिया। इस दौरान एक खास दृश्य देखने को मिला जब कालिबाफ और कई अन्य सांसद IRGC की वर्दी पहने नजर आए। इसे IRGC के प्रति एकजुटता और समर्थन के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है।

कालिबाफ ने संसद में 2019 में पारित ईरान के एक कानून के अनुच्छेद 7 का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि अगर कोई विदेशी संगठन या देश ईरान की सशस्त्र सेनाओं को आतंकवादी घोषित करता है, तो ईरान भी उसी तरह की कार्रवाई करेगा।

यूरोपीय सेनाओं को आतंकवादी घोषित करने का मतलब

ईरान द्वारा यूरोपीय संघ की सेनाओं को आतंकवादी संगठन घोषित करना मुख्य रूप से प्रतीकात्मक कदम माना जा रहा है। हालांकि इसका राजनीतिक और कूटनीतिक असर काफी गहरा हो सकता है।

इससे पहले जब अमेरिका ने IRGC को आतंकवादी संगठन घोषित किया था, तब भी ईरान ने अमेरिकी सेनाओं के खिलाफ इसी तरह का कदम उठाया था। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इस फैसले के जरिए यह दिखाना चाहता है कि वह दबाव में झुकने वाला देश नहीं है।

पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव

यह बयान ऐसे वक्त आया है जब पश्चिम एशिया में हालात पहले से ही बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई की धमकी दे चुके हैं। इसके जवाब में ईरान भी लगातार अपने सैन्य और रणनीतिक कदमों से ताकत दिखा रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य अभ्यास की तैयारी

ईरान ने रविवार और सोमवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य अभ्यास करने की घोषणा की है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक माना जाता है।

वैश्विक तेल व्यापार का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ऐसे में इस इलाके में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन जाती है।

ईरान का यह सैन्य अभ्यास पश्चिमी देशों के लिए एक सीधा संदेश माना जा रहा है कि अगर उस पर दबाव बढ़ाया गया, तो वह रणनीतिक स्तर पर जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा।

IRGC की ताकत

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ईरान की सबसे ताकतवर संस्थाओं में से एक है। यह बल न सिर्फ ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को नियंत्रित करता है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था में भी इसकी गहरी पकड़ है।

IRGC तेल, निर्माण, टेलीकॉम और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कई अहम सेक्टरों में सक्रिय है। यही वजह है कि पश्चिमी देश इसे सिर्फ सैन्य बल नहीं बल्कि राजनीतिक और आर्थिक ताकत के रूप में भी देखते हैं।

खामेनेई के प्रति सीधे जवाबदेह

IRGC सीधे तौर पर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को जवाबदेह है। यह इसे ईरानी राजनीतिक सिस्टम में बेहद खास और प्रभावशाली बनाता है।

संसद सत्र के दौरान जब यह बयान दिया गया, तब वहां अमेरिका मुर्दाबाद और इज़रायल मुर्दाबाद जैसे नारे भी लगाए गए। इससे साफ है कि ईरान का रुख पश्चिमी देशों के प्रति और सख्त होता जा रहा है।

Leave a comment