ट्रंप प्रशासन के काउंटर टेररिज्म प्रमुख जों केंट ने इस्तीफा देने के बाद कहा कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के करीब नहीं था। उन्होंने इजरायल पर अमेरिका को जंग में खींचने का आरोप लगाया और मध्य पूर्व नीति पर नई बहस शुरू कर दी।
वाशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी और काउंटर टेररिज्म मामलों के शीर्ष अधिकारी जों केंट ने अपने पद से इस्तीफा देने के बाद बड़ा बयान दिया है। केंट ने कहा कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के करीब भी नहीं था। उन्होंने सीधे तौर पर जंग की जिम्मेदारी इजरायल पर डाली और कहा कि अमेरिकी प्रशासन को जंग की ओर धकेलने में इजरायल का बड़ा हाथ था।
केंट के इस बयान ने अमेरिकी विदेश नीति और मध्य पूर्व में हालिया घटनाओं पर नई बहस छेड़ दी है। ट्रंप प्रशासन की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लेविट ने हालांकि कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा अमेरिका के राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए काम करते हैं और किसी भी देश के प्रभाव में नहीं आते।
इस्तीफे के पीछे केंट का फैसला
जों केंट ने अपने इस्तीफे के पीछे की वजह एक हाई-प्रोफाइल इंटरव्यू में साझा की। उन्होंने पॉडकास्टर टकर कार्लसन के साथ बातचीत में कहा कि उन्होंने यह पद छोड़ने का फैसला इसलिए किया क्योंकि उन्हें लगता था कि अमेरिकी प्रशासन को अनावश्यक जंग की ओर धकेला जा रहा है।
केंट ने बताया कि ईरान पर हमला करने की कार्रवाई इजरायल ने तय की थी, और इस निर्णय के बाद एक पूरी श्रृंखला शुरू हुई थी। उनका कहना है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार ने जंग शुरू करने की योजना बनाई और अमेरिका को बस प्रतिक्रिया देनी थी।
ईरान का परमाणु कार्यक्रम
ट्रंप प्रशासन ने फरवरी में ईरान पर हमले का औचित्य बताते हुए दावा किया कि तेहरान केवल दो हफ्ते दूर था परमाणु हथियार बनाने से। प्रशासन ने इसे अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बताया।

लेकिन केंट ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के करीब नहीं था। उन्होंने बताया कि 2004 से ही ईरान के इस्लामी शासन में एक फतवा लागू था, जो उन्हें परमाणु हथियार बनाने से रोकता था। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के पास कोई ऐसा संकेत नहीं था कि ईरान इस फतवे का उल्लंघन कर रहा था।
अयातुल्ला खामेनेई की मौत पर केंट का विश्लेषण
केंट ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के संभावित परिणामों पर भी टिप्पणी की। उनका कहना है कि अयातुल्ला की मौत से अमेरिका को कोई फायदा नहीं हुआ, बल्कि उनके कट्टर समर्थकों को और बढ़ावा मिला।
केंट ने कहा, 'अयातुल्ला को मारने का कोई डर नहीं था। वह समझते थे कि उनका शासन सुरक्षित रहेगा। उनका कोई सनक या पागलपन नहीं था।' इस बयान ने यह स्पष्ट किया कि अमेरिकी रणनीति में कई मामलों में परिणामों का गलत अनुमान लगाया गया।
केंट का इजरायल पर आरोप
जों केंट ने सीधे तौर पर इजरायल को जंग की जिम्मेदारी बताया। उनका कहना है कि इजरायल ने कार्रवाई की योजना बनाई और अमेरिका को मजबूर किया कि वह इस प्रतिक्रिया में शामिल हो। केंट के अनुसार, इस कदम से मध्य पूर्व में तनाव और जटिलता और बढ़ गई।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी प्रशासन को इजरायल के रणनीतिक लाभ के लिए जंग में खींचा गया। उनके बयान ने यह सवाल उठाया कि अमेरिका को किस हद तक अन्य देशों के दबाव में निर्णय लेना चाहिए।










