यह कहानी सुंदरपुर गाँव के दो दोस्तों, अमन और विकास, की है। अमन ताकतवर और निडर था, विकास समझदार और चतुर। उनकी दोस्ती पूरे गाँव में मशहूर थी। एक यात्रा में उन्हें लालच और मित्रता के बीच चुनना पड़ा। कहानी सिखाती है कि सच्चा खजाना सोना-चाँदी नहीं, बल्कि मुसीबत में साथ निभाने वाला सच्चा दोस्त है।
कहानी
सुंदरपुर गाँव पहाड़ियों की गोद में बसा एक खुशहाल इलाका था, लेकिन पिछले कुछ महीनों से वहाँ एक अजीब सी मुसीबत आ गई थी। गाँव की नदी अचानक सूखने लगी थी। किसान परेशान थे और जानवर प्यासे। गाँव के बुजुर्गों का कहना था कि घने जंगलों के पार स्थित 'नीलगिरी पर्वत' की चोटी पर एक जादुई झरना है, जिसका पानी अगर गाँव की नदी में मिला दिया जाए, तो नदी फिर से बहने लगेगी। लेकिन रास्ता बहुत कठिन और खतरनाक था।
गाँव की भलाई के लिए अमन और विकास ने फैसला किया कि वे उस झरने का पानी लाने जाएंगे। गाँव वालों ने उन्हें आशीर्वाद दिया और वे अपनी यात्रा पर निकल पड़े।
यात्रा की शुरुआत शुरुआत में रास्ता आसान था, लेकिन जैसे-जैसे वे जंगल के अंदर बढ़ते गए, सूरज की रोशनी कम होने लगी और घने पेड़ों ने रास्ते को अंधेरा कर दिया। अमन, जो बहुत बहादुर था, सबसे आगे चल रहा था और कँटीली झाड़ियों को हटा रहा था। विकास, अपनी बुद्धिमानी का इस्तेमाल करते हुए नक्शे और सूरज की दिशा को देखकर रास्ता बता रहा था।
चलते-चलते शाम हो गई। तभी अचानक उनके सामने एक बहुत बड़ी खाई आ गई। खाई के ऊपर एक पुराना, जर्जर लकड़ी का पुल था जो हवा में झूल रहा था।
अमन ने कहा, 'विकास, यह पुल बहुत कमजोर लग रहा है। मुझे लगता है हमें कोई और रास्ता ढूँढना चाहिए।' विकास ने ध्यान से पुल को देखा और गणित लगाया। उसने कहा, 'अमन, दूसरा रास्ता ढूँढने में हमें दो दिन और लगेंगे, और गाँव के पास इतना समय नहीं है। अगर हम एक-एक करके धीरे-धीरे जाएं और रस्सियों का सहारा लें, तो हम इसे पार कर सकते हैं।'
अमन ने विकास पर भरोसा किया। विकास ने अपनी बुद्धिमानी से रस्सियों को कसकर बाँधा और पहले खुद पार गया, फिर अमन को इशारा किया। अमन की ताकत और विकास की सूझबूझ से उन्होंने वह खतरनाक खाई पार कर ली।
मायावी गुफा पहाड़ की चढ़ाई शुरू हुई। आधे रास्ते पर उन्हें एक चमकती हुई गुफा दिखाई दी। गुफा के बाहर लिखा था, 'जो अंदर आएगा, वह अपनी सबसे बड़ी चाहत पाएगा।'
थकान और भूख से बेहाल दोनों दोस्त गुफा के अंदर चले गए। अंदर का नज़ारा देखकर उनकी आँखें फटी रह गईं। वहाँ सोने के सिक्के, हीरे-जवाहरात और कीमती पत्थरों के ढेर लगे थे।
अचानक एक गूँजती हुई आवाज़ आई, 'रुको मुसाफिरों! तुम दोनों में से कोई एक ही यहाँ से अपनी इच्छा पूरी करके जा सकता है। या तो तुम यह सारा खजाना ले जाओ और दुनिया के सबसे अमीर आदमी बन जाओ, या फिर उस झरने का रास्ता पूछ लो जिसके लिए तुम आए हो। लेकिन याद रखना, अगर तुमने खजाना चुना, तो तुम्हें झरने का रास्ता कभी नहीं मिलेगा।'
अमन की आँखों में चमक आ गई। उसने सोचा कि इस खजाने से वह अपने परिवार की गरीबी दूर कर सकता है, एक बड़ा महल बना सकता है। वह खजाने की ओर बढ़ा। विकास चुपचाप खड़ा था। उसने अमन का हाथ पकड़ा और कहा, 'अमन, रुक जा। यह एक परीक्षा है।'
अमन ने कहा, 'लेकिन विकास, इतना सोना! हम अपनी सात पीढ़ियों को राजा बना सकते हैं। गाँव का क्या है? वे कोई और इंतज़ाम कर लेंगे।'
विकास ने उसे समझाया, 'मित्र, यह सोना हमारे लिए है, लेकिन वह पानी पूरे गाँव, हमारे माता-पिता और उन बेजुबान जानवरों के लिए है जो प्यास से मर रहे हैं। अगर हम आज अमीर बनकर लौटे, तो शायद हम राजा बन जाएं, लेकिन अपनी नज़रों में हम हमेशा स्वार्थी रहेंगे। और याद रख, अगर गाँव ही नहीं बचा, तो तू राजा बनकर किस पर राज करेगा?'
अमन ठिठक गया। उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने सोने का मोह त्याग दिया। दोनों ने एक स्वर में कहा, 'हमें खजाना नहीं चाहिए, हमें झरने का रास्ता चाहिए।'
जैसे ही उन्होंने यह कहा, सारा सोना गायब हो गया और गुफा रौशनी से भर गई। वह आवाज़ फिर आई, 'तुम दोनों अपनी परीक्षा में सफल हुए। लालच ने तुम्हें नहीं हराया। झरने का रास्ता गुफा के ठीक पीछे है।'
अंतिम चुनौती और जीत गुफा से निकलते ही उन्हें वह जादुई झरना दिखाई दिया। उसका पानी चमक रहा था। लेकिन वहाँ तक पहुँचने के लिए एक खड़ी चट्टान चढ़नी थी। अमन की ताकत यहाँ काम आई। उसने विकास को अपने कंधों पर उठाया और चट्टान के ऊपर पहुँचाया, फिर विकास ने ऊपर से रस्सी फेंककर अमन को खींचा।
उन्होंने अपने बर्तनों में वह जादुई पानी भरा। वापसी में उन्हें वही मुश्किलें फिर मिलीं, लेकिन अब उनके पास आत्मविश्वास था। जब वे गाँव लौटे और उन्होंने वह पानी सूखी नदी में डाला, तो चमत्कार हुआ। नदी फिर से लबालब भर गई। गाँव में खुशियां लौट आईं।
गाँव के मुखिया ने पूछा कि क्या उन्हें रास्ते में कोई खजाना मिला? अमन ने मुस्कुराते हुए विकास के कंधे पर हाथ रखा और कहा, 'हाँ काका, मुझे खजाना मिला था। बहुत सारा सोना। लेकिन मैंने उसे छोड़ दिया क्योंकि मुझे समझ आ गया कि मेरा असली खजाना यह विकास है। अगर इसने मुझे सही रास्ता न दिखाया होता, तो आज मैं अमीर तो होता, लेकिन अकेला होता और हमारा गाँव प्यासा होता।'
दोनों दोस्तों की जय-जयकार हुई। उस दिन अमन और विकास ने जाना कि ताकत और बुद्धि जब मिल जाते हैं, तो कोई भी लक्ष्य बड़ा नहीं होता।
सीख
सच्ची मित्रता वह है जो गलत राह पर जाने से रोके। सहयोग की शक्ति से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं। हमें व्यक्तिगत लालच के बजाय निस्वार्थ सेवा और समाज के कल्याण को प्राथमिकता देनी चाहिए।













