जालंधर के तलहन गांव स्थित गुरुद्वारा श्री तलहन साहिब अपनी अनोखी मान्यता के लिए प्रसिद्ध है। विदेश जाने की इच्छा रखने वाले श्रद्धालु यहां मन्नत मांगते हैं और मनोकामना पूरी होने पर खिलौना विमान चढ़ाते हैं।
जालंधर: तलहन गुरुद्वारा शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर गांव तलहन में स्थित है और अपनी अनोखी धार्मिक परंपरा के लिए जाना जाता है। यहां विदेश जाने की इच्छा रखने वाले लोग मन्नत मांगते हैं। श्रद्धालुओं की मान्यता है कि मनोकामना पूरी होने के बाद गुरुद्वारे में खिलौना विमान चढ़ाना आस्था का हिस्सा है। इसी परंपरा ने इस स्थान को पंजाब के प्रमुख आस्था केंद्रों में खास पहचान दिलाई है।
जालंधर का तलहन साहिब गुरुद्वारा क्यों है खास?
जालंधर शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर तलहन गांव में स्थित गुरुद्वारा श्री तलहन साहिब जी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। इसे शहीद बाबा निहाल सिंह जी गुरुद्वारा साहिब के नाम से भी जाना जाता है। धार्मिक आस्था के साथ-साथ यहां की एक अनोखी परंपरा इसे दूसरे गुरुद्वारों से अलग पहचान देती है।

गुरुद्वारा परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु देश-विदेश से पहुंचते हैं। खासतौर पर वे लोग यहां मन्नत लेकर आते हैं, जो विदेश जाने या विदेश में नौकरी हासिल करने की इच्छा रखते हैं। श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने के लिए अरदास करते हैं और सफलता मिलने के बाद दोबारा गुरुद्वारे में पहुंचकर आभार जताते हैं।
विदेश जाने की मन्नत और खिलौना विमान की परंपरा
तलहन साहिब से जुड़ी सबसे चर्चित परंपरा विदेश जाने की मन्नत से संबंधित है। कई श्रद्धालु विदेश जाने, वीजा मिलने या वहां नौकरी हासिल करने की इच्छा लेकर यहां आते हैं। वे गुरुद्वारे में माथा टेककर अपनी मनोकामना पूरी होने की अरदास करते हैं।
मान्यता पूरी होने के बाद कुछ श्रद्धालु गुरुद्वारे में खिलौना विमान चढ़ाते हैं। यही वजह है कि यहां अलग-अलग आकार और डिजाइन वाले खिलौना विमान देखने को मिलते हैं। श्रद्धालुओं के लिए ये विमान किसी दिखावे का हिस्सा नहीं, बल्कि उनकी आस्था और मनोकामना पूरी होने के बाद धन्यवाद व्यक्त करने का माध्यम हैं।
समय के साथ यह परंपरा तलहन साहिब की पहचान का हिस्सा बन गई है। विदेश जाने की तैयारी कर रहे कई परिवार भी यहां पहुंचकर अरदास करते हैं और अपने बेहतर भविष्य की कामना करते हैं।
आस्था के साथ जुड़ी है स्थानीय पहचान
गुरुद्वारा श्री तलहन साहिब केवल विदेश जाने की मन्नत के कारण ही प्रसिद्ध नहीं है। यह स्थानीय लोगों के लिए भी श्रद्धा और धार्मिक विश्वास का महत्वपूर्ण स्थान है। यहां श्रद्धालु गुरबाणी सुनते हैं, माथा टेकते हैं और अरदास में शामिल होते हैं।
गुरुद्वारे से जुड़ी परंपराएं पीढ़ियों से श्रद्धालुओं के बीच आस्था का हिस्सा बनी हुई हैं। खिलौना विमान चढ़ाने की परंपरा ने इसे खास तौर पर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनाया है। सोशल मीडिया और यात्रियों के अनुभवों के कारण भी तलहन साहिब की यह अनोखी पहचान पंजाब से बाहर तक पहुंची है।
विदेश जाने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए यह स्थान उम्मीद और विश्वास से जुड़ा हुआ है। हालांकि, मन्नत और उससे जुड़ी मान्यताएं व्यक्तिगत धार्मिक आस्था का विषय हैं। श्रद्धालु अपनी इच्छाओं के साथ यहां पहुंचते हैं और मनोकामना पूरी होने पर अपनी श्रद्धा के अनुसार गुरुद्वारे में सेवा या भेंट करते हैं।











