पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में सोमवार सुबह प्लास्टिक कारखाने में भीषण आग लगने से इलाके में हड़कंप मच गया। आग इतनी तेजी से फैली कि कारखाने से उठता काले धुएं का गुबार काफी दूर तक दिखाई देने लगा। घटना सिवोक रोड स्थित इंडस्ट्रियल इलाके में होने की जानकारी सामने आई है। आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने का प्रयास शुरू किया।
बताया जा रहा है कि कारखाने से सुबह करीब 10:30 बजे धुआं निकलता हुआ दिखाई दिया। कुछ ही देर में आग ने विकराल रूप ले लिया। प्लास्टिक और अन्य ज्वलनशील सामग्री मौजूद होने के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। आसपास के लोगों ने जब आसमान में काले धुएं का बड़ा गुबार देखा तो इलाके में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई।
आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कारखाने से उठता धुआं कई किलोमीटर दूर से भी दिखाई दे रहा था। आसपास रहने वाले लोगों की नजर जब धुएं पर पड़ी तो बड़ी संख्या में लोग घटनास्थल के आसपास जुटने लगे। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर भीड़ को नियंत्रित किया और दमकल कर्मियों को आग बुझाने के लिए रास्ता उपलब्ध कराया।
आग की सूचना मिलने के बाद दमकल की चार गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने अलग-अलग दिशाओं से पानी की बौछार कर आग को नियंत्रित करने का प्रयास किया। कारखाने के अंदर प्लास्टिक, केमिकल और दूसरी ज्वलनशील सामग्री होने की वजह से आग बुझाने में चुनौती का सामना करना पड़ा।
आग इतनी तेज थी कि कारखाने का बड़ा हिस्सा इसकी चपेट में आ गया। शुरुआती अनुमान के मुताबिक आग से कारखाने को कई करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। हालांकि वास्तविक नुकसान का आकलन आग पूरी तरह बुझने और कारखाने में रखे सामान की जांच के बाद ही किया जा सकेगा।
घटना की जानकारी मिलने के बाद भक्ति नगर थाना पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आग की परिस्थितियों की जानकारी जुटाई। सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नर सैयद वकार रजा के भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने की जानकारी सामने आई है।
फिलहाल आग लगने के वास्तविक कारण का पता नहीं चल पाया है। प्रारंभिक स्तर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है, लेकिन पुलिस और दमकल विभाग अन्य संभावनाओं की भी जांच कर रहे हैं। आग लगने की सही वजह फोरेंसिक जांच और घटनास्थल से जुटाए जाने वाले साक्ष्यों के आधार पर स्पष्ट हो सकेगी।
आग की घटना के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि कारखाने में अग्नि सुरक्षा के कितने इंतजाम मौजूद थे। औद्योगिक क्षेत्रों में प्लास्टिक और केमिकल जैसी ज्वलनशील सामग्री के कारण आग का खतरा अधिक रहता है। ऐसे स्थानों पर फायर एक्सटिंग्विशर, पर्याप्त पानी की व्यवस्था, आपातकालीन निकासी मार्ग और अन्य सुरक्षा इंतजाम बेहद जरूरी होते हैं।
घटना के दौरान सबसे बड़ी प्राथमिकता आग को आसपास के दूसरे औद्योगिक प्रतिष्ठानों तक फैलने से रोकना रही। इंडस्ट्रियल इलाके में एक कारखाने से दूसरे कारखाने की दूरी कम होने के कारण आग फैलने का खतरा बना रहता है। दमकल कर्मियों ने आग की लपटों को सीमित रखने के साथ आसपास के क्षेत्र पर भी नजर रखी।
प्लास्टिक के जलने से निकलने वाला घना धुआं भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। आग की वजह से आसपास के इलाके में धुएं का असर महसूस किया गया। स्थानीय लोगों को घटनास्थल से दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई, ताकि धुएं और आग की चपेट में आने का खतरा कम हो।
आग लगने के बाद कारखाने के अंदर मौजूद सामग्री को बाहर निकालना भी चुनौतीपूर्ण रहा। ज्वलनशील सामान के कारण दमकल कर्मियों को सावधानी के साथ अभियान चलाना पड़ा। आग पर पूरी तरह नियंत्रण पाने के बाद ही कारखाने के भीतर नुकसान और संरचनात्मक स्थिति का आकलन किया जा सकेगा।
घटना के कारण औद्योगिक क्षेत्र में कुछ समय के लिए गतिविधियां प्रभावित होने की भी संभावना है। आग बुझाने के दौरान दमकल वाहनों की आवाजाही और सुरक्षा कारणों से आसपास के हिस्से में लोगों की आवाजाही नियंत्रित की जा सकती है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक आग के दौरान धुएं का गुबार इतना बड़ा था कि दूर-दूर से लोग इसे देख पा रहे थे। सोशल मीडिया पर भी घटना से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सामने आने लगे, जिनमें आसमान की ओर उठता काला धुआं दिखाई दे रहा था।
पुलिस और दमकल विभाग अब यह पता लगाने में जुटे हैं कि आग किस वजह से शुरू हुई और कितनी देर में पूरे कारखाने में फैल गई। कारखाने में सुरक्षा उपकरणों और बिजली के सिस्टम की भी जांच की जा सकती है। फोरेंसिक टीम द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण किए जाने की संभावना है।
कारखाने में रखी ज्वलनशील सामग्री की मात्रा और उसके भंडारण के तरीके की भी जांच महत्वपूर्ण होगी। यदि जांच में सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की बात सामने आती है तो संबंधित विभाग आगे की कार्रवाई कर सकता है। हालांकि अभी आग की वजह को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
फिलहाल दमकल विभाग की प्राथमिकता आग को पूरी तरह बुझाना और दोबारा आग भड़कने की संभावना को खत्म करना है। इसके बाद पुलिस और संबंधित विभाग नुकसान का आकलन करेंगे। शुरुआती तौर पर किसी जनहानि की सूचना सामने नहीं आई है, हालांकि घटना के संबंध में आधिकारिक स्थिति जांच पूरी होने के बाद और स्पष्ट हो सकती है।
सिलीगुड़ी जैसे व्यस्त शहर में औद्योगिक क्षेत्रों में आग की ऐसी घटनाएं सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। खासकर प्लास्टिक और अन्य ज्वलनशील सामग्री से जुड़े कारखानों में नियमित सुरक्षा जांच और आग से बचाव के इंतजामों की निगरानी जरूरी होती है।
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी के सिवोक रोड स्थित इंडस्ट्रियल इलाके में सोमवार सुबह प्लास्टिक कारखाने में भीषण आग लग गई। कारखाने से उठता काले धुएं का गुबार कई किलोमीटर दूर तक दिखाई दिया। दमकल की चार गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। शुरुआती तौर पर शॉर्ट सर्किट की आशंका है, लेकिन आग की वास्तविक वजह की जांच जारी है। शुरुआती अनुमान में कई करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका जताई गई है।










