CID जांच और इस्तीफों के बाद अधर में JPSC की परीक्षाएं: 1,645 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित, अभ्यर्थियों की बढ़ी चिंता

झारखंड में JPSC की परीक्षाएं कथित गड़बड़ियों की CID जांच और आयोग के सदस्यों के इस्तीफे के बाद प्रभावित हैं। 1,645 पदों की नियुक्ति प्रक्रिया पर असर पड़ा है।
CID जांच और इस्तीफों के बाद अधर में JPSC की परीक्षाएं: 1,645 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित, अभ्यर्थियों की बढ़ी चिंता
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झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। कथित परीक्षा अनियमितताओं की CID जांच, आयोग के पूर्व अध्यक्ष की गिरफ्तारी और तीन सदस्यों के इस्तीफे के बाद कई भर्ती प्रक्रियाओं के भविष्य को लेकर अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ गई है। भर्ती प्रक्रिया से जुड़े करीब 1,645 पदों पर नियुक्ति का काम प्रभावित होने की बात सामने आ रही है।

JPSC से जुड़ा विवाद केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है। जांच एजेंसियां परीक्षा संचालन, एजेंसी चयन, परीक्षा संबंधी डेटा की सुरक्षा और आयोग के प्रशासनिक फैसलों से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। इसी बीच आयोग के तीन मौजूदा सदस्यों के इस्तीफे ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। डॉ. अजीता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद ने अपने पदों से इस्तीफा दिया है।

इन इस्तीफों से पहले CID ने आयोग के सदस्यों को पूछताछ के लिए समन किया था। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसियों के चयन और अन्य प्रशासनिक फैसलों में आयोग के पदाधिकारियों की क्या भूमिका रही। जांच के दायरे में लखनऊ की TSR Data Processing Private Limited यानी TDPL भी है, जिसे JSSC ने मई 2025 में कथित अनियमितताओं के चलते ब्लैकलिस्ट किया था। इसके बावजूद बाद में इसी कंपनी को JPSC की कुछ परीक्षाओं से जुड़े काम मिलने को लेकर सवाल उठे हैं।

मामले में पूर्व JPSC चेयरमैन एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। झारखंड CID ने कथित भर्ती अनियमितताओं से जुड़े मामले में उन्हें गिरफ्तार किया। इसके बाद JPSC की कार्यप्रणाली और भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर विवाद और तेज हो गया।

जांच एजेंसियों की कार्रवाई का असर उन अभ्यर्थियों पर भी पड़ रहा है, जिन्होंने अलग-अलग JPSC भर्तियों के लिए आवेदन किया है या परीक्षा प्रक्रिया के अगले चरण का इंतजार कर रहे हैं। अभ्यर्थियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन परीक्षाओं और नियुक्तियों को लेकर विवाद चल रहा है, उनका अगला शेड्यूल क्या होगा और क्या उन्हें दोबारा परीक्षा या किसी अन्य प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा।

JPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर फिलहाल कई भर्ती प्रक्रियाओं से संबंधित नोटिस और विज्ञापन उपलब्ध हैं। इनमें झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-2025, बैकलॉग भर्तियां, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट, सिविल जज समेत कई नियुक्तियां शामिल हैं। इससे साफ है कि आयोग के स्तर पर कई भर्ती प्रक्रियाएं अलग-अलग चरणों में चल रही हैं।

विवाद का सबसे ज्यादा असर उन परीक्षार्थियों पर पड़ रहा है, जो लंबे समय से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं। JPSC की परीक्षा में सफलता के लिए अभ्यर्थी वर्षों तक तैयारी करते हैं। परीक्षा कार्यक्रम में अनिश्चितता आने से उनकी तैयारी, उम्र सीमा और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की योजना पर भी असर पड़ सकता है।

इसी कारण झारखंड में छात्र संगठनों का आंदोलन भी तेज हुआ है। अभ्यर्थी कथित परीक्षा गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। आंदोलन को लेकर राज्य में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो चुकी है।

छात्रों की मांग है कि भर्ती परीक्षाओं में किसी भी तरह की अनियमितता की आशंका को गंभीरता से लिया जाए। उनका कहना है कि सरकारी नौकरी की परीक्षा में एक छोटी गड़बड़ी भी हजारों उम्मीदवारों के भविष्य को प्रभावित कर सकती है। इसलिए परीक्षा प्रक्रिया से लेकर परिणाम और नियुक्ति तक हर चरण में पारदर्शिता जरूरी है।

वहीं सरकार की ओर से बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की कोशिश की जा रही है। छात्र आंदोलन के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई है, लेकिन अभी तक सभी मुद्दों पर सहमति नहीं बन सकी है। आंदोलन जारी रहने के कारण भर्ती परीक्षाओं को लेकर अनिश्चितता भी बनी हुई है।

CID की जांच में केवल परीक्षा के प्रश्नपत्र या परिणाम ही नहीं, बल्कि परीक्षा संचालन की पूरी व्यवस्था को देखा जा रहा है। एजेंसी परीक्षा कराने वाली कंपनियों के चयन, प्रशासनिक प्रक्रिया, डेटा सुरक्षा और आयोग के भीतर लिए गए फैसलों से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही है। इससे जांच का दायरा काफी व्यापक हो गया है।

आयोग के सदस्यों के इस्तीफे के बाद अब JPSC के प्रशासनिक कामकाज और आने वाली परीक्षाओं की प्रक्रिया को सुचारु रखना भी चुनौती बन गया है। नए सदस्यों की नियुक्ति और आयोग के कामकाज को लेकर सरकार तथा राजभवन स्तर पर आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

अभ्यर्थियों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि जांच पूरी होने तक भर्ती प्रक्रिया कितनी प्रभावित होगी। यदि किसी परीक्षा को लेकर गंभीर अनियमितता साबित होती है तो उसके परिणाम, मेरिट लिस्ट या नियुक्ति प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि किसी भी परीक्षा के संबंध में अंतिम निर्णय जांच और संबंधित प्रशासनिक या न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

JPSC विवाद ने झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर बड़ी बहस खड़ी कर दी है। छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्षता सबसे जरूरी है, क्योंकि बड़ी संख्या में उम्मीदवार सीमित पदों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। ऐसी स्थिति में किसी भी तरह की गड़बड़ी का असर सीधे युवाओं के भविष्य पर पड़ता है।

इस पूरे मामले में अब CID की जांच रिपोर्ट अहम होगी। जांच से यह पता चल सकेगा कि परीक्षा प्रक्रिया में वास्तव में क्या अनियमितताएं हुईं, किन लोगों की भूमिका रही और किन स्तरों पर नियमों का पालन नहीं किया गया। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई और भर्ती परीक्षाओं की दिशा तय हो सकती है।

फिलहाल अभ्यर्थियों की नजर आयोग की ओर से जारी होने वाले नए नोटिस और परीक्षा कार्यक्रम पर है। जिन परीक्षाओं पर जांच का असर पड़ा है, उनके संबंध में स्पष्ट जानकारी मिलने के बाद ही उम्मीदवार अपनी तैयारी और आगे की रणनीति तय कर सकेंगे।

कुल मिलाकर, JPSC में कथित परीक्षा अनियमितताओं की CID जांच, पूर्व चेयरमैन की गिरफ्तारी और तीन सदस्यों के इस्तीफे के बाद भर्ती परीक्षाओं पर संकट गहरा गया है। करीब 1,645 पदों की नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित होने से हजारों अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ी है। अब CID जांच के निष्कर्ष, आयोग में नई नियुक्तियां और सरकार की अगली कार्रवाई यह तय करेगी कि प्रभावित परीक्षाओं और नियुक्तियों को किस तरह आगे बढ़ाया जाएगा।

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