हरियाणा के नूंह एक्सप्रेस-वे पर स्कॉर्पियो हादसे में जालौन के 4 पुलिसकर्मियों समेत 5 की मौत हो गई। पुलिस टीम अपहरण मामले की जांच कर दबिश देकर लौट रही थी, तभी ओवरटेक के दौरान हादसा हो गया।
जालौन: हरियाणा के नूंह जिले में मंगलवार सुबह एक भीषण सड़क हादसे में उत्तर प्रदेश के जालौन जिले के चार पुलिसकर्मियों समेत कुल पांच लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेस-वे पर धुलावट टोल प्लाजा के पास सुबह लगभग 10:30 बजे हुआ, जब एक तेज रफ्तार स्कॉर्पियो गाड़ी बेकाबू होकर आगे चल रही दूसरी गाड़ी से जा टकराई।
मृतकों में दो दरोगा, दो सिपाही और वाहन का ड्राइवर शामिल हैं। सभी पुलिसकर्मी एक अपहरण मामले की जांच और दबिश देने के लिए हरियाणा गए थे और वापस लौटते समय यह हादसा हो गया।
कैसे हुआ हादसा: ओवरटेक की कोशिश बनी जानलेवा
प्रारंभिक जांच के अनुसार, पुलिस टीम जिस स्कॉर्पियो से यात्रा कर रही थी, वह हरियाणा के जींद RTO में रजिस्टर्ड थी। बताया जा रहा है कि एक्सप्रेस-वे पर वाहन तेज गति में था और ड्राइवर ने ओवरटेक करने की कोशिश की।
इसी दौरान स्कॉर्पियो का संतुलन बिगड़ गया और वह सामने चल रही दूसरी गाड़ी से जोरदार तरीके से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि स्कॉर्पियो के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार सभी लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।
हादसे के बाद वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और शव अंदर ही फंस गए, जिन्हें निकालने के लिए पुलिस और बचाव दल को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
मृतकों की पहचान: जालौन पुलिस विभाग में शोक की लहर
इस दर्दनाक हादसे में जिन पुलिसकर्मियों की जान गई, उनकी पहचान इस प्रकार हुई है:
- दरोगा मोहित यादव
- दरोगा सत्यभान
- कॉन्स्टेबल अशोक कुमार
- सिपाही प्रदीप (सर्विलांस टीम)
- स्कॉर्पियो चालक (पहचान प्रक्रिया जारी)
सभी पुलिसकर्मी उत्तर प्रदेश के जालौन जिले की उरई कोतवाली में तैनात थे और एक गंभीर अपहरण मामले की जांच के लिए हरियाणा गए थे।

अपहरण केस से जुड़ा था पूरा मामला
यह पूरा मामला एक अपहरण केस से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। 4 मई को पंजाब के संगरूर निवासी अमरीक सिंह ने उरई कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके मौसेरे भाई बिजेंदर सिंह का अपहरण कर लिया गया है।
शिकायत के अनुसार, मामला 32 एकड़ जमीन के विवाद से जुड़ा हुआ था। 4 मई की सुबह ट्यूबवेल की कोठरी में सो रहे बिजेंदर सिंह को चार बदमाशों ने अगवा कर लिया था और उसका मोबाइल भी छीन लिया गया था।
परिवार द्वारा काफी तलाश के बाद जब कोई सुराग नहीं मिला, तब पुलिस में मामला दर्ज कराया गया। इसी केस की जांच और बरामदगी के लिए एसओजी टीम हरियाणा रवाना हुई थी।
हादसे के बाद का मंजर: शव निकालने में करनी पड़ी मशक्कत
हादसे के तुरंत बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्कॉर्पियो का आगे का हिस्सा पूरी तरह से चकनाचूर हो चुका था। अंदर फंसे शवों को बाहर निकालना बेहद कठिन हो गया था।
तावड़ू सदर थाना प्रभारी शीशराम ने बताया कि पुलिस और बचाव दल को शव निकालने में काफी समय लगा। बाद में एंबुलेंस की मदद से सभी शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया।
प्रशासन और पुलिस की प्रतिक्रिया
जालौन के पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह ने हादसे की पुष्टि करते हुए कहा कि टीम अपहृत व्यक्ति की बरामदगी के लिए हरियाणा गई थी और लौटते समय यह हादसा हो गया।
उन्होंने बताया कि हरियाणा पुलिस के साथ मिलकर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
इस हादसे ने सभी मृतकों के परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। खासकर दरोगा सत्यभान और कॉन्स्टेबल अशोक कुमार के परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
दरोगा सत्यभान अपने परिवार में सबसे बड़े थे और उनके तीन बेटे और दो बेटियां हैं। वहीं कॉन्स्टेबल अशोक कुमार के पिता की हाल ही में हार्ट अटैक से मौत हुई थी, जिससे परिवार पहले से ही सदमे में था।
सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस हादसे ने एक बार फिर एक्सप्रेस-वे पर तेज रफ्तार और लापरवाह ड्राइविंग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ओवरटेकिंग और स्पीड कंट्रोल न होने के कारण इस तरह के हादसे लगातार बढ़ रहे हैं।
जांच जारी: क्या लापरवाही बनी वजह?
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या हादसे में ड्राइवर की गलती थी या फिर सड़क पर किसी अन्य वाहन की वजह से स्थिति बिगड़ी। स्कॉर्पियो की तकनीकी जांच भी की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कोई मैकेनिकल फेलियर तो नहीं था।









