कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने केरल चुनाव में LDF की हार के लिए CPI-M की PR रणनीति को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि जनता अब दिखावे से नहीं, असली काम से प्रभावित होती है और यही उनकी जीत का कारण बना।
तिरवंतपुरम: केरल विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद राज्य की राजनीति में बयानबाज़ी तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने मंगलवार को CPI(M)-नीत लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) की हार को लेकर तीखा बयान दिया।
उन्होंने कहा कि एलडीएफ की हार सिर्फ सत्ता विरोधी लहर (anti-incumbency) का परिणाम नहीं है, बल्कि यह उनकी “खराब और अतिरंजित PR
रणनीति” का नतीजा है, जिसे जनता ने नकार दिया।
जेबी माथेर के इस बयान के बाद केरल की राजनीति में नया विवाद शुरू हो गया है, और राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।
“केवल PR से जनता को प्रभावित नहीं किया जा सकता”: जेबी माथेर
राज्यसभा सांसद जेबी माथेर ने समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में कहा कि केरल की जनता अब वास्तविक विकास और कामकाज को समझती है, और केवल प्रचार (PR) के आधार पर राजनीति नहीं चल सकती।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के नेतृत्व में सरकार ने बड़े पैमाने पर प्रचार पर ध्यान दिया, लेकिन जमीन पर वास्तविक परिणाम उतने प्रभावी नहीं दिखे।

माथेर ने कहा:
“केवल PR से जनता को प्रभावित नहीं किया जा सकता। लोग अब समझदार हैं और वे वास्तविक काम देखते हैं।
LDF की हार पर कांग्रेस का दावा: “जनता ने बदलाव चुना
जेबी माथेर ने कहा कि केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक अलायंस (UDA) की वापसी जनता का “स्पष्ट जनादेश” है।
उन्होंने इस जीत को “ऐतिहासिक और शानदार” बताते हुए कहा कि अब गठबंधन की जिम्मेदारी बढ़ गई है कि वह अपने चुनावी वादों को पूरा करे।
उन्होंने कहा कि जनता ने विकास, रोजगार और पारदर्शिता के मुद्दों पर वोट दिया है, और अब नई सरकार को इन अपेक्षाओं पर खरा उतरना होगा।
CPI(M) पर हमला: “बड़े-बड़े होर्डिंग और चेहरे की राजनीति”
कांग्रेस सांसद ने CPI(M) की चुनावी रणनीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि राज्य में हर जगह मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के बड़े-बड़े होर्डिंग लगाए गए थे, जो हर 50 मीटर पर दिखाई देते थे।
उनके अनुसार, यह “व्यक्तिगत छवि आधारित राजनीति” का हिस्सा था, जिसे जनता ने स्वीकार नहीं किया।
माथेर ने कहा कि यह चुनाव परिणाम इस बात का संकेत है कि लोग अब केवल चेहरे की राजनीति नहीं, बल्कि ठोस विकास कार्य चाहते हैं।
LDF की सीटों में गिरावट पर टिप्पणी
जेबी माथेर ने दावा किया कि LDF को इस चुनाव में भारी नुकसान हुआ है और कई प्रमुख मंत्री भी अपनी सीटें बचाने में असफल रहे।
उन्होंने कहा कि 35 सीटों तक सिमटना CPI(M) के लिए एक बड़ा झटका है, और अब उनके लिए विपक्ष के नेता का चयन करना भी कठिन हो सकता है।
उनके अनुसार, यह परिणाम राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत है।
कांग्रेस का आरोप: CPI(M) और BJP के बीच “अघोषित समझौता
जेबी माथेर ने एक बार फिर कांग्रेस का पुराना आरोप दोहराते हुए कहा कि CPI(M) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच किसी न किसी स्तर पर “समझ” रही है।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस इस कथित राजनीतिक गठजोड़ को उजागर करने में सफल रही है और जनता ने इसे समझ लिया है।
हालांकि, CPI(M) और BJP दोनों ही इन आरोपों को लगातार खारिज करते रहे हैं।
भाजपा की जीत पर भी टिप्पणी
केरल चुनाव में भाजपा को कुछ सीटों पर सफलता मिलने पर भी जेबी माथेर ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जिन सीटों पर भाजपा जीती है, वहां भी LDF सरकार के मंत्री हार गए हैं।
यह, उनके अनुसार, यह दर्शाता है कि जनता ने पूरे राज्य में बदलाव के पक्ष में मतदान किया है।
2029 लोकसभा चुनाव पर कांग्रेस का फोकस
जेबी माथेर ने कहा कि केरल के चुनाव परिणाम कांग्रेस के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक सकारात्मक संकेत हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि यह प्रदर्शन 2029 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगा।
उन्होंने कहा कि अगर जनता का भरोसा इसी तरह बना रहा, तो कांग्रेस राष्ट्रीय राजनीति में और मजबूत होकर उभरेगी।
राजनीतिक विश्लेषण: केरल में सत्ता विरोधी लहर का असर
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, केरल चुनाव परिणाम कई कारकों से प्रभावित हुए हैं।
इनमें शामिल हैं:
- सत्ता विरोधी लहर (anti-incumbency)
- रोजगार और विकास के मुद्दे
- राजनीतिक प्रचार की रणनीति
- गठबंधन राजनीति में बदलाव
- विशेषज्ञों का मानना है कि केरल जैसे राजनीतिक रूप से जागरूक राज्य में केवल प्रचार रणनीति लंबे समय तक काम नहीं करती।
“जनता अब काम देखती है, चेहरा नहीं”: बदलता राजनीतिक रुझान
केरल की राजनीति में यह रुझान स्पष्ट हो रहा है कि मतदाता अब केवल पार्टी या नेता के चेहरे पर वोट नहीं देते। विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे अब प्राथमिकता बन चुके हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव भारतीय राजनीति में एक बड़े ट्रेंड की ओर इशारा करता है, जहां पारदर्शिता और प्रदर्शन सबसे महत्वपूर्ण हो गए हैं।
विपक्ष और सत्ता पक्ष में बढ़ी बयानबाज़ी
चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस और CPI(M) के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।
जहां कांग्रेस इसे जनता का जनादेश बता रही है, वहीं CPI(M) इसे राजनीतिक गलत व्याख्या करार दे रही है।
दोनों दलों के बीच यह टकराव आने वाले समय में और बढ़ सकता है।









