जेलेंस्की ने लौटाया पोलैंड का सर्वोच्च सम्मान, द्वितीय विश्व युद्ध के इतिहास को लेकर फिर उभरा विवाद

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने पोलैंड का सर्वोच्च सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल’ लौटा दिया। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक विवाद फिर चर्चा में है।

Volodymyr Zelenskyy ने पोलैंड का सर्वोच्च सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल’ लौटा दिया। यह फैसला पोलैंड द्वारा सम्मान वापस लेने के बाद आया। दोनों देशों के बीच द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़ा ऐतिहासिक विवाद फिर से चर्चा में है।

कीव/वारसा: Volodymyr Zelenskyy और Poland के बीच हाल के वर्षों में मजबूत रणनीतिक साझेदारी देखने को मिली है, लेकिन अब एक ऐतिहासिक विवाद ने दोनों देशों के संबंधों में नया तनाव पैदा कर दिया है। यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने पोलैंड का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल’ वापस कर दिया है। यह कदम उस समय सामने आया जब पोलैंड के राष्ट्रपति कारोळ नवरोत्स्की ने यह सम्मान वापस लेने का निर्णय लिया।

इस घटनाक्रम ने यूरोप में राजनीतिक और ऐतिहासिक बहस को फिर से तेज कर दिया है। दोनों देशों के बीच विवाद का केंद्र द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुई घटनाएं और उनसे जुड़ी ऐतिहासिक व्याख्याएं हैं।

क्या है ‘ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल’?

Order of the White Eagle पोलैंड का सबसे प्रतिष्ठित और सर्वोच्च राज्य सम्मान माना जाता है। यह सम्मान उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने देश, लोकतांत्रिक मूल्यों, अंतरराष्ट्रीय सहयोग या मानवाधिकारों के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया हो।

पूर्व पोलिश राष्ट्रपति Andrzej Duda ने वर्ष 2023 में यह सम्मान जेलेंस्की को प्रदान किया था। उस समय पोलैंड ने यूक्रेन की संप्रभुता की रक्षा, लोकतांत्रिक मूल्यों के समर्थन और क्षेत्रीय सुरक्षा में उनकी भूमिका की सराहना की थी।

रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान पोलैंड यूक्रेन के सबसे बड़े समर्थकों में शामिल रहा है और उसने सैन्य, मानवीय तथा कूटनीतिक स्तर पर कीव का लगातार समर्थन किया है।

विवाद की जड़ में यूक्रेनियन इंसर्जेंट आर्मी

ताजा विवाद तब शुरू हुआ जब यूक्रेन ने अपनी विशेष सैन्य इकाइयों में से एक का नाम यूक्रेनियन इंसर्जेंट आर्मी (UPA) के नाम पर रखा। यह संगठन द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान सक्रिय था और यूक्रेन के कुछ हिस्सों में इसे स्वतंत्रता आंदोलन का प्रतीक माना जाता है।

हालांकि पोलैंड का दृष्टिकोण इससे अलग है। पोलिश अधिकारियों और इतिहासकारों का आरोप है कि UPA से जुड़े लड़ाकों ने युद्धकाल के दौरान हजारों पोलिश नागरिकों की हत्या की थी। विशेष रूप से वोलिनिया और पूर्वी यूरोप के अन्य क्षेत्रों में हुए नरसंहार को लेकर पोलैंड लंबे समय से न्याय और ऐतिहासिक स्वीकार्यता की मांग करता रहा है।

यही कारण है कि यूक्रेन द्वारा UPA के नाम को सैन्य इकाई से जोड़ने के फैसले को पोलैंड में व्यापक आलोचना का सामना करना पड़ा।

जेलेंस्की ने लौटाया पोलैंड का सर्वोच्च सम्मान, द्वितीय विश्व युद्ध के इतिहास को लेकर फिर उभरा विवाद

जेलेंस्की का जवाब: यह सम्मान केवल मेरा नहीं था

सम्मान लौटाते हुए राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि यह पुरस्कार केवल उनके व्यक्तिगत सम्मान का प्रतीक नहीं था, बल्कि यूक्रेनी जनता, सैनिकों और उन सभी लोगों के लिए था जो देश की स्वतंत्रता और सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए बताया कि सम्मान को औपचारिक रूप से पोलिश राष्ट्रपति कार्यालय को वापस भेज दिया गया है। जेलेंस्की ने इसके साथ डाक रसीद और संबंधित दस्तावेजों की तस्वीरें भी साझा कीं।

उनका कहना था कि यूक्रेन के नागरिकों और सैनिकों का सम्मान किसी राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनना चाहिए।

यूक्रेनी अधिकारियों ने भी लौटाए सम्मान

जेलेंस्की के फैसले के बाद यूक्रेन के चार वरिष्ठ अधिकारियों ने भी पोलैंड से प्राप्त अपने राज्य सम्मान लौटाने की घोषणा की। इसे यूक्रेन के भीतर राष्ट्रीय सम्मान और ऐतिहासिक पहचान के मुद्दे पर एकजुट प्रतिक्रिया के रूप में देखा जा रहा है।

हालांकि इस कदम को लेकर यूक्रेन के भीतर भी मतभेद सामने आए हैं। कुछ राजनीतिक नेताओं और विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के प्रतीकात्मक कदम दोनों देशों के रिश्तों को और जटिल बना सकते हैं।

पूर्व प्रधानमंत्री ने की आलोचना

यूक्रेन के पूर्व प्रधानमंत्री Arseniy Yatsenyuk ने सम्मान लौटाने के फैसले की आलोचना की है। उनका मानना है कि किसी विवादास्पद या गलत निर्णय का जवाब दूसरे विवादास्पद निर्णय से नहीं दिया जाना चाहिए।

यात्सेन्युक ने कहा कि पोलैंड और यूक्रेन के बीच रणनीतिक साझेदारी यूरोप की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है और दोनों देशों को ऐतिहासिक मतभेदों के बावजूद संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।

उनके अनुसार, मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों में दोनों देशों के बीच सहयोग पहले से कहीं अधिक आवश्यक है।

इतिहास और राजनीति का जटिल संबंध

यूरोप में कई देशों के बीच द्वितीय विश्व युद्ध से जुड़े मुद्दे आज भी राजनीतिक और सामाजिक बहस का विषय बने हुए हैं। यूक्रेन और पोलैंड के मामले में भी इतिहास की अलग-अलग व्याख्याएं समय-समय पर संबंधों को प्रभावित करती रही हैं।

जहां यूक्रेन के कुछ वर्ग UPA को राष्ट्रीय स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाला संगठन मानते हैं, वहीं पोलैंड उसे युद्ध अपराधों और नागरिक हत्याओं से जोड़कर देखता है। यही ऐतिहासिक मतभेद आज भी दोनों देशों के राजनीतिक विमर्श में दिखाई देते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि साझा इतिहास वाले देशों के लिए अतीत और वर्तमान के बीच संतुलन बनाना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है असर

रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच पोलैंड और यूक्रेन का सहयोग यूरोपीय सुरक्षा ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है। पोलैंड ने लाखों यूक्रेनी शरणार्थियों को आश्रय दिया और सैन्य सहायता उपलब्ध कराने में भी प्रमुख भूमिका निभाई।

ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ता राजनीतिक तनाव यूरोप की सामूहिक सुरक्षा रणनीति के लिए चिंता का विषय बन सकता है। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान विवाद के बावजूद दोनों देशों के दीर्घकालिक रणनीतिक हित एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

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