जेफ्री एपस्टीन के सऊदी कनेक्शन को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक वह मोहम्मद बिन सलमान का सलाहकार बनना चाहता था। उसने अपने निजी द्वीप पर कथित ‘मस्जिद’ बनवाई, जिसमें काबा का किस्वा, सोने का गुंबद और इस्लामिक डिजाइन इस्तेमाल किए गए।
वाशिंगटन: दुनिया के सबसे चर्चित सेक्स अपराधियों में शामिल जेफ्री एपस्टीन को लेकर एक बार फिर बड़े खुलासे सामने आए हैं। हालिया दस्तावेजों और ईमेल रिकॉर्ड्स से संकेत मिले हैं कि एपस्टीन केवल वित्तीय और राजनीतिक नेटवर्क बनाने तक सीमित नहीं था, बल्कि वह सऊदी अरब के शाही परिवार और मध्य-पूर्व के प्रभावशाली लोगों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, एपस्टीन सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का वित्तीय सलाहकार बनना चाहता था। इसी दौरान उसने इस्लामी वास्तुकला और धार्मिक प्रतीकों में गहरी रुचि दिखाई और अपने निजी कैरेबियन द्वीप पर एक विवादित इमारत तैयार करवाई, जिसे वह “मस्जिद” कहता था।
निजी द्वीप पर बनवाई गई विवादित ‘मस्जिद’
जेफ्री एपस्टीन के निजी द्वीप “लिटिल सेंट जेम्स” पर बनी एक रहस्यमयी इमारत लंबे समय से चर्चा का विषय रही है। कभी इसे मंदिर, कभी चैपल और कभी म्यूजिक रूम बताया गया, लेकिन नए दस्तावेजों से पता चला कि एपस्टीन इसे “मस्जिद” कहता था।
हालांकि इस इमारत का धार्मिक इस्तेमाल होने का कोई प्रमाण नहीं मिला है, लेकिन इसकी डिजाइन पूरी तरह इस्लामी वास्तुकला से प्रेरित बताई जाती है।
इमारत में—
- सोने का गुंबद लगाया गया
- मध्य-पूर्व शैली की मेहराबें बनाई गईं
- उज्बेकिस्तान की मस्जिदों जैसी हाथ से बनी टाइल्स इस्तेमाल की गईं
- इस्लामी बगीचे और तुर्की शैली के हमाम की योजना बनाई गई
बताया गया कि एपस्टीन ने इस इमारत की सजावट के लिए काबा से जुड़ा “किस्वा” भी मंगवाया था।
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क्या होता है किस्वा?
किस्वा वह विशेष काला कपड़ा होता है जो काबा को ढकने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इस पर सोने और चांदी के धागों से कुरान की आयतें कढ़ी होती हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक—
- इसे बनाने में लगभग 700 किलो रेशम इस्तेमाल होता है
- 100 किलो से ज्यादा सोने-चांदी के धागे लगाए जाते हैं
इसकी कीमत लाखों डॉलर तक होती है
जब हर साल किस्वा बदला जाता है, तो इसके कुछ हिस्से विशेष संस्थाओं या प्रतिष्ठित व्यक्तियों को भेंट किए जाते हैं।
एपस्टीन के स्टाफ के ईमेल्स से संकेत मिले हैं कि उसके पास काबा से जुड़े तीन अलग-अलग कपड़े पहुंचे थे, जिनमें एक ऐसा कपड़ा भी था जो कथित रूप से काबा के अंदर इस्तेमाल किया गया था।
नॉर्वे के राजनयिक के जरिए बना सऊदी कनेक्शन
दस्तावेजों के अनुसार, एपस्टीन की दोस्ती नॉर्वे के राजनयिक टेरजे रोड-लार्सन से हुई थी। इसी संपर्क के जरिए उसे सऊदी अरब के प्रभावशाली लोगों तक पहुंच मिली।
इनमें शामिल थे—
- शाही सलाहकार राफत अल सब्बाग
- शाही सहयोगी अजीजा अल अहमदी
- सऊदी शाही परिवार से जुड़े अन्य लोग
बताया गया कि एपस्टीन ने इन संपर्कों के जरिए मोहम्मद बिन सलमान तक पहुंच बनाने की कोशिश की।
क्राउन प्रिंस का सलाहकार बनना चाहता था एपस्टीन
2016 के आसपास, जब Saudi Aramco के संभावित वैश्विक शेयर बाजार लिस्टिंग की चर्चा चल रही थी, उसी समय एपस्टीन खुद को एक वित्तीय रणनीतिकार के रूप में पेश करना चाहता था।
रिपोर्ट्स के अनुसार उसने कई “अलग और महत्वाकांक्षी” विचार प्रस्तुत किए, जिनमें मुसलमानों के लिए “शरिया” नाम की नई मुद्रा बनाने का सुझाव भी शामिल था।
बताया जाता है कि एपस्टीन को सऊदी अरब आने का निमंत्रण भी मिला था और उसने न्यूयॉर्क तथा सऊदी अरब में कई प्रभावशाली लोगों से मुलाकात की।
कुछ तस्वीरों में एपस्टीन और सऊदी अधिकारियों को एक साथ देखा गया, जिन्हें उसने बाद में अपने घर में भी लगाया था।
इस्लामी डिजाइन और वास्तुकला में थी गहरी दिलचस्पी
रिकॉर्ड्स से यह भी पता चलता है कि जेफ्री एपस्टीन को लंबे समय से इस्लामी कला और वास्तुकला में दिलचस्पी थी।
वर्षों के दौरान सामने आए कुछ उदाहरण
2003
उसने दावा किया था कि उसके पास एक विशाल फारसी कालीन है जो संभवतः किसी मस्जिद से आया था।
2008
जेल में रहते हुए भी उसने अपने द्वीप पर हमाम और इस्लामी शैली के बगीचे बनवाने की योजना तैयार की।
2011
उसने उज्बेकिस्तान से मस्जिद जैसी टाइल्स मंगाने की कोशिश की।
2013
उसने अलेप्पो की 15वीं सदी की इस्लामी वास्तुकला से प्रेरित डिजाइन तैयार करवाने को कहा।
एक ईमेल में उसने यहां तक सुझाव दिया कि अरबी में “अल्लाह” लिखने के बजाय उसके अपने नाम “J” और “E” के अक्षर डिजाइन में शामिल किए जाएं।
कारोबारी और राजनीतिक नेटवर्क का विस्तार
एपस्टीन केवल वास्तुकला या धार्मिक प्रतीकों तक सीमित नहीं था। वह वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और कारोबारी नेटवर्क मजबूत करने की कोशिश कर रहा था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, उसके संपर्कों में कई बड़े कारोबारी और मध्य-पूर्व से जुड़े प्रभावशाली लोग शामिल थे।
इसी क्रम में दुबई पोर्ट ऑपरेटर DP World से जुड़े कारोबारी सुल्तान अहमद बिन सुलयेम का नाम भी सामने आया। बाद में एपस्टीन से संबंधों की वजह से उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
सलाहकार नहीं बन पाने पर बढ़ी नाराजगी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जब मोहम्मद बिन सलमान ने एपस्टीन की सलाह को महत्व नहीं दिया, तो वह नाराज हो गया।
उसने कथित तौर पर संदेशों में लिखा कि यदि उसकी सलाह मानी जाती, तो सऊदी अरब को “महंगी मदद” की जरूरत नहीं पड़ती।
हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि वह किस आर्थिक या राजनीतिक मुद्दे की बात कर रहा था।
जमाल खशोगी हत्या के बाद की बातचीत
2018 में पत्रकार जमाल खशोगी की इस्तांबुल में हत्या के बाद एपस्टीन और टेरजे रोड-लार्सन के बीच बातचीत भी सामने आई।
रिपोर्ट्स के अनुसार, रोड-लार्सन ने उस समय लिखा था कि “उनके सिर पर एक काला साया है।”
2019 में गिरफ्तारी और मौत
2019 में जेफ्री एपस्टीन को सेक्स ट्रैफिकिंग और नाबालिग लड़कियों के शोषण के आरोपों में दोबारा गिरफ्तार किया गया।
10 अगस्त 2019 को न्यूयॉर्क की जेल में उसकी मौत हो गई। आधिकारिक तौर पर इसे आत्महत्या बताया गया, हालांकि इस मामले को लेकर आज भी कई विवाद और साजिश सिद्धांत मौजूद हैं।









