झारखंड में पिछले पांच वर्षों के दौरान कोयला खनन परियोजनाओं से प्रभावित 6,591 परिवारों का पुनर्वास किया गया। केंद्रीय सरकार के अनुसार, प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, पुनर्व्यवस्था और मुआवजे पर ₹1,108 करोड़ से अधिक खर्च किए गए।
रांची: झारखंड में कोयला खनन परियोजनाओं से विस्थापित परिवारों के पुनर्वास को लेकर केंद्र सरकार ने आंकड़े जारी किए हैं। पिछले पांच वर्षों में 6,591 प्रभावित परिवारों का पुनर्वास किया गया, जबकि पुनर्वास, पुनर्व्यवस्था और मुआवजे के रूप में ₹1,108 करोड़ की सहायता प्रदान की गई। यह जानकारी केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री ने राज्यसभा में दी।
पांच वर्षों में हजारों विस्थापित परिवारों का हुआ पुनर्वास
झारखंड में कोयला खनन परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को लेकर केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि पिछले पांच वर्षों के दौरान राज्य में 6,591 परियोजना प्रभावित परिवारों का पुनर्वास किया गया है। इसके साथ ही पुनर्वास, पुनर्व्यवस्था, भूमि अधिग्रहण और अन्य मुआवजा मदों में कुल ₹1,108 करोड़ से अधिक की राशि वितरित की गई। यह जानकारी राज्यसभा सांसद परिमल नथवाणी द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में दी गई।

सरकार के अनुसार, परियोजनाओं से प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता के साथ-साथ पुनर्वास संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न कोयला कंपनियां लगातार कार्य कर रही हैं। प्रभावित लोगों को समय पर मुआवजा और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
कोल इंडिया और NTPC की परियोजनाओं में मिला पुनर्वास और मुआवजा
केंद्रीय मंत्री के अनुसार, कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) की सहायक कंपनियां भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL), सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL), ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) और एनएलसी इंडिया लिमिटेड (NLCIL) ने मिलकर 1,791 परियोजना प्रभावित परिवारों का पुनर्वास किया। इन कंपनियों ने पुनर्वास, पुनर्व्यवस्था, भूमि और संपत्ति मुआवजे के रूप में करीब ₹587 करोड़ वितरित किए। इसके अलावा रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में भी कदम उठाए गए, जिसमें CCL ने 968 और ECL ने 174 लोगों को रोजगार दिया।
वहीं, NTPC समूह की झारखंड स्थित पकरी-बरवाडीह, चट्टी-बरियातू और केरंदरी कोयला परियोजनाओं से 4,800 परिवार प्रभावित हुए। इन परियोजनाओं के तहत प्रभावित परिवारों को ₹520.80 करोड़ का मुआवजा दिया गया। सरकार का कहना है कि इन परियोजनाओं में पुनर्वास और मुआवजा प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से लागू की गई है।
नियमित समीक्षा बैठकों से हो रहा पुनर्वास कार्य की निगरानी
सरकार ने यह भी बताया कि पचवारा साउथ ओपन कास्ट प्रोजेक्ट में NLCIL ने 86 परियोजना प्रभावित परिवारों को आवास के बदले मुआवजा दिया है, जबकि पांच परिवारों को रोजगार के स्थान पर एकमुश्त आर्थिक सहायता प्रदान की गई। अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक पुनर्वास मामले पर अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लिया जाता है, ताकि प्रभावित परिवारों को उनकी जरूरत के अनुसार सहायता मिल सके।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पुनर्वास और पुनर्व्यवस्था से जुड़े मामलों के प्रभावी समाधान के लिए परियोजना प्रभावित परिवारों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जाती हैं। इन बैठकों में मुआवजा वितरण, पुनर्वास की प्रगति और लंबित मामलों की समीक्षा की जाती है। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रभावित परिवारों की समस्याओं का समय पर समाधान करना और पुनर्वास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल आर्थिक सहायता देना पर्याप्त नहीं है। प्रभावित परिवारों के लिए स्थायी रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और बेहतर बुनियादी ढांचा भी पुनर्वास प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए। इससे कोयला खनन परियोजनाओं के विकास और स्थानीय लोगों के हितों के बीच बेहतर संतुलन स्थापित किया जा सकेगा।











